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Yamuna Nagar News: यूरिया की हो रही तस्करी, किसान परेशान
Sun, 21 Jul 2024 03:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 21 Jul 2024 03:47 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। यूरिया तस्करी के काले कारोबार की जड़ें काफी गहरी हैं। इतना ही नहीं तस्करी का नेटवर्क भी बहुत बड़ा है। जिसमें यूरिया तस्कर ही नहीं बल्कि कृषि एवं कल्याण विभाग के अधिकारी भी मिले हुए हैं। यूरिया तस्करों से मिले होने पर कृषि विभाग के तत्कालीन उपनिदेशक आत्मा राम गोदारा (अब पानीपत में कार्यरत) का नाम आने से पहले भी विभाग के कई अधिकारी लपेटे में आ चुके हैं।
यूरिया तस्करों से अधिकारियों की मिलीभगत का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। किसान को यूरिया के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है और उनके हिस्से का यूरिया प्लाईवुड फैक्टरियों में खप रहा है। सीएम फ्लाइंग की टीम ने शुक्रवार को कृषि विभाग के कार्यालय में दबिश देकर यूरिया के सैंपल लेने और गलत लैब में भेजने के खेल का भंडाफोड़ किया था।
इसके लिए टीम ने आत्मा राम गोदारा को जिम्मेदार ठहराया था। इसी साल फरवरी माह में कृषि विभाग के गुणवत्ता नियंत्रक बलबीर सिंह भान पर पुलिस ने केस दर्ज किया था। मानकपुर औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री में यूरिया खाद की तस्करी के मामले बलबीर सिंह की मिलीभगत सामने आई थी। पुलिस ने इस मामले में खाद तस्कर गांव भाटली निवासी सुमित को भी गिरफ्तार किया था।
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यहां कृषि योग्य यूरिया के 150 बैग से भरी ट्रैक्टर ट्राली को पकड़ा गया था। बलबीर सिंह ने फैक्ट्री मालिक व सुमित के साथ मिलकर फर्जी बिल व रिपोर्ट बनाई थी। इसके अतिरिक्त दो साल पहले टेक्निकल ग्रेड यूरिया के सैंपल लगातार फेल आने व जीएसटी चोरी होने पर यमुनानगर के तत्कालीन उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सैनी, एसडीओ सतबीर लोहिया व गुणवत्ता नियंत्रक बालमुकंद पर गाज गिरी थी।
तीनों अधिकारियों का तबादला एक साथ हुआ था। तब यूरिया की बिक्री के मुकाबले जीएसटी की वसूली कम हो रही थी। जिसकी जांच के लिए सेंट्रल जीएसटी की टीम शादीपुर की तरफ फैक्टरियों में जांच करने गई थी। तब जीएसटी टीम पर पथराव तक कर दिया गया था। तब अधिकारियों की मिलीभगत का भी नाम सामने आया था।
साल में करीब डेढ़ लाख एमटी यूरिया की खपत
जिले में हर साल करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन यूरिया कृषि कार्यों में इस्तेमाल होता है। यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल गेहूं, धान व गन्ने की फसल में होता है। परंतु कृषि योग्य यूरिया की फैक्टरियों में तस्करी होने से किसानों को काफी परेशानी होती है। पिछले साल तो किसानों ने यूरिया किल्लत पर गांव खजूरी स्थित पैक्स केंद्र पर ताला लगा दिया था।
इसके अलावा अन्य पैक्स केंद्रों पर भी लंबी लाइन देखने को मिली। दरअसल यमुनानगर प्लाईबोर्ड का हब है। फैक्टरियों में ग्लू बनाने के लिए यूरिया खाद का इस्तेमाल होता है। वहीं ग्लू बनाने के लिए टेक्निकल ग्रेड यूरिया का इस्तेमाल होना चाहिए। तस्करी रोकने के लिए सरकार ने कुछ साल पहले डीलरों के माध्यम से बिकने वाले यूरिया पर रोक लगा दी थी।
केवल सरकारी केंद्रों के माध्यम से किसानों को यूरिया दिया जाता था। प्लाईवुड फैक्ट्रियों में कृषि योग्य यूरिया की तस्करी रोकने केलिए नीम कोटिंग यूरिया बेची जाने लगी। इसके बावजूद तस्करी नहीं रुक रही। तस्कर टेक्निकल यूरिया के बैग में नीम कोटिंग यूरिया डाल कर फैक्ट्रियों में भेज रहे हैं।
किसान को तो यूरिया मिलती ही नहीं : संजू गुंदियाना
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना ने बताया कि जब भी किसी फसल की बिजाई करते हैं तो किसान को उसमें डालने के लिए पर्याप्त यूरिया नहीं मिलती है। किसान के हिस्से का यूरिया प्लाईवुड फैक्टरियों में जा रहा है। भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से ऐसा हो रहा है। सरकार को इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाना चाहिए।
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यमुनानगर। यूरिया तस्करी के काले कारोबार की जड़ें काफी गहरी हैं। इतना ही नहीं तस्करी का नेटवर्क भी बहुत बड़ा है। जिसमें यूरिया तस्कर ही नहीं बल्कि कृषि एवं कल्याण विभाग के अधिकारी भी मिले हुए हैं। यूरिया तस्करों से मिले होने पर कृषि विभाग के तत्कालीन उपनिदेशक आत्मा राम गोदारा (अब पानीपत में कार्यरत) का नाम आने से पहले भी विभाग के कई अधिकारी लपेटे में आ चुके हैं।
यूरिया तस्करों से अधिकारियों की मिलीभगत का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। किसान को यूरिया के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है और उनके हिस्से का यूरिया प्लाईवुड फैक्टरियों में खप रहा है। सीएम फ्लाइंग की टीम ने शुक्रवार को कृषि विभाग के कार्यालय में दबिश देकर यूरिया के सैंपल लेने और गलत लैब में भेजने के खेल का भंडाफोड़ किया था।
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इसके लिए टीम ने आत्मा राम गोदारा को जिम्मेदार ठहराया था। इसी साल फरवरी माह में कृषि विभाग के गुणवत्ता नियंत्रक बलबीर सिंह भान पर पुलिस ने केस दर्ज किया था। मानकपुर औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री में यूरिया खाद की तस्करी के मामले बलबीर सिंह की मिलीभगत सामने आई थी। पुलिस ने इस मामले में खाद तस्कर गांव भाटली निवासी सुमित को भी गिरफ्तार किया था।
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यहां कृषि योग्य यूरिया के 150 बैग से भरी ट्रैक्टर ट्राली को पकड़ा गया था। बलबीर सिंह ने फैक्ट्री मालिक व सुमित के साथ मिलकर फर्जी बिल व रिपोर्ट बनाई थी। इसके अतिरिक्त दो साल पहले टेक्निकल ग्रेड यूरिया के सैंपल लगातार फेल आने व जीएसटी चोरी होने पर यमुनानगर के तत्कालीन उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सैनी, एसडीओ सतबीर लोहिया व गुणवत्ता नियंत्रक बालमुकंद पर गाज गिरी थी।
तीनों अधिकारियों का तबादला एक साथ हुआ था। तब यूरिया की बिक्री के मुकाबले जीएसटी की वसूली कम हो रही थी। जिसकी जांच के लिए सेंट्रल जीएसटी की टीम शादीपुर की तरफ फैक्टरियों में जांच करने गई थी। तब जीएसटी टीम पर पथराव तक कर दिया गया था। तब अधिकारियों की मिलीभगत का भी नाम सामने आया था।
साल में करीब डेढ़ लाख एमटी यूरिया की खपत
जिले में हर साल करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन यूरिया कृषि कार्यों में इस्तेमाल होता है। यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल गेहूं, धान व गन्ने की फसल में होता है। परंतु कृषि योग्य यूरिया की फैक्टरियों में तस्करी होने से किसानों को काफी परेशानी होती है। पिछले साल तो किसानों ने यूरिया किल्लत पर गांव खजूरी स्थित पैक्स केंद्र पर ताला लगा दिया था।
इसके अलावा अन्य पैक्स केंद्रों पर भी लंबी लाइन देखने को मिली। दरअसल यमुनानगर प्लाईबोर्ड का हब है। फैक्टरियों में ग्लू बनाने के लिए यूरिया खाद का इस्तेमाल होता है। वहीं ग्लू बनाने के लिए टेक्निकल ग्रेड यूरिया का इस्तेमाल होना चाहिए। तस्करी रोकने के लिए सरकार ने कुछ साल पहले डीलरों के माध्यम से बिकने वाले यूरिया पर रोक लगा दी थी।
केवल सरकारी केंद्रों के माध्यम से किसानों को यूरिया दिया जाता था। प्लाईवुड फैक्ट्रियों में कृषि योग्य यूरिया की तस्करी रोकने केलिए नीम कोटिंग यूरिया बेची जाने लगी। इसके बावजूद तस्करी नहीं रुक रही। तस्कर टेक्निकल यूरिया के बैग में नीम कोटिंग यूरिया डाल कर फैक्ट्रियों में भेज रहे हैं।
किसान को तो यूरिया मिलती ही नहीं : संजू गुंदियाना
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना ने बताया कि जब भी किसी फसल की बिजाई करते हैं तो किसान को उसमें डालने के लिए पर्याप्त यूरिया नहीं मिलती है। किसान के हिस्से का यूरिया प्लाईवुड फैक्टरियों में जा रहा है। भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से ऐसा हो रहा है। सरकार को इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाना चाहिए।