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फिर लटका 200 बेड के अस्पताल का काम
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200 बेड के निर्माणाधीन सिविल अस्पताल यमुनानगर का काम एक बार फिर बीच में लटक गया। पेमेंट के लिए जमा कराए गए बिल पास न होने से ठेकेदार कभी काम शुरू कर देता है तो कभी बंद कर देता है। जबकि पिछले दिनों पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने डीसी के सामने कहा था कि वह 15 नवंबर तक अस्पताल का काम पूरा कर देंगे। जिस गति से अब अस्पताल का काम चल रहा है उसे देख कर अनुमान लगाया जा रहा है कि निर्माण कार्य इस साल भी पूरा नहीं हो पाएगा।
सिविल अस्पताल यमुनानगर का बजट पहले 78 करोड़ रुपये था। परंतु काम कछुआ गति से चलने के कारण अब इसका बजट बढ़ कर करीब 120 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। दरअसल अस्पताल का निर्माण पीडब्ल्यूडी के सिविल व इलेक्ट्रिक विंग के बीच फंस कर रह गया है। इलेक्ट्रिक विंग की तरफ से अभी तक इसमें बिजली का काम भी पूरा नहीं किया गया है। अस्पताल में सेंट्रलाइज्ड एसी लगाया जाना है। परंतु एसी के पाइप लगाने में हो रही देरी के कारण अस्पताल के दूसरे काम भी पूरे नहीं हो रहे। इलेक्ट्रिक विंग की करीब ढाई करोड़ रुपये की पेमेंट रूकी हुई है। इसी तरह सेंट्रलाइज्ड एसी की भी करीब एक करोड़ रुपये की पेमेंट बजट के अभाव में अभी तक नहीं हो पाई। शाम को लेबर अपनी मजदूरी मांगती है, लेकिन बिल पास न होने से ठेकेदार उन्हें पेमेंट नहीं कर पाते। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का आरोप है कि एजेंसी ने मजदूर न के बराबर लगा रखे हैं। जिस कारण इसका काम पूरा नहीं हो रहा।
सिविल अस्पताल यमुनानगर में 200 बेड के नए भवन का कार्य वर्ष 2020 में शुरू हुआ था। काम शुरू होते ही कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन से अस्पताल का निर्माण रूक गया। काम ने रफ्तार पकड़ी तो बजट के कारण काम रूक गया। जैसे-जैसे काम आगे बढ़ा तो इसका बजट भी बढ़ता गया। नए भवन में अस्पताल में तीन ब्लॉक बनाए जा रहे हैं। इनमें एक प्रशासनिक खंड, जबकि दो ब्लॉक मरीजों के लिए होंगे। इन्हीं में से एक ब्लॉक में ब्लड बैंक, लैब भी शिफ्ट होंगे। अस्पताल में जब से नए भवन को बनाने का काम शुरू हुआ है, तब से मरीज व उनके तीमारदार काफी परेशान हैं। अस्पताल का अपना भवन न होने से मरीजों की ओपीडी भी किसी तरह ट्रॉमा सेंटर के कमरों में हो रही है। भवन के अभाव में गर्भवती महिलाओं की ओपीडी व डिलीवरी सिविल अस्पताल जगाधरी में करनी पड़ रही है। जबकि उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने के लिए यमुनानगर आना पड़ता है। जिसके लिए उन्हें आने जाने में 10 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है।
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सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि पीडब्ल्यूडी ने 15 नवंबर तक काम पूरा करने की बात कही थी। हम उनके काम से संतुष्ट नहीं है। इस गति से तो अस्पताल का काम तीन-चार माह में भी पूरा नहीं होगा। यदि बजट को लेकर कोई इश्यू है तो हमें बताएं। उसे दूर किया जाएगा।
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन नवीन खत्री का कहना है कि अस्पताल में सेंट्रलाइज्ड ऐसी व अन्य कार्य इलेक्ट्रिक विंग को पूरे करने हैं। यदि वह एक माह में भी काम पूरा कर देते हैं तो हम 10 से 15 दिन में अपना काम खत्म कर भवन स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर देंगे।
पीडब्ल्यूडी इलेक्ट्रिक विंग के एसडीओ सुखदेव शर्मा का कहना है कि भवन में सेंट्रलाइज्ड एसी बाद में जोड़ा गया। एजेंसी की करीब ढाई करोड़ व एसी की एक करोड़ की पेमेंट एफडी लेवल पर नहीं हो पाई है। जिस कारण ठेकेदार काम पूरा नहीं कर पा रहा। सर्दी में फिलहाल एसी की जरूरत नहीं है। बिना ऐसी वह काम कुछ दिन में खत्म कर देंगे।
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सिविल अस्पताल यमुनानगर का बजट पहले 78 करोड़ रुपये था। परंतु काम कछुआ गति से चलने के कारण अब इसका बजट बढ़ कर करीब 120 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। दरअसल अस्पताल का निर्माण पीडब्ल्यूडी के सिविल व इलेक्ट्रिक विंग के बीच फंस कर रह गया है। इलेक्ट्रिक विंग की तरफ से अभी तक इसमें बिजली का काम भी पूरा नहीं किया गया है। अस्पताल में सेंट्रलाइज्ड एसी लगाया जाना है। परंतु एसी के पाइप लगाने में हो रही देरी के कारण अस्पताल के दूसरे काम भी पूरे नहीं हो रहे। इलेक्ट्रिक विंग की करीब ढाई करोड़ रुपये की पेमेंट रूकी हुई है। इसी तरह सेंट्रलाइज्ड एसी की भी करीब एक करोड़ रुपये की पेमेंट बजट के अभाव में अभी तक नहीं हो पाई। शाम को लेबर अपनी मजदूरी मांगती है, लेकिन बिल पास न होने से ठेकेदार उन्हें पेमेंट नहीं कर पाते। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का आरोप है कि एजेंसी ने मजदूर न के बराबर लगा रखे हैं। जिस कारण इसका काम पूरा नहीं हो रहा।
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सिविल अस्पताल यमुनानगर में 200 बेड के नए भवन का कार्य वर्ष 2020 में शुरू हुआ था। काम शुरू होते ही कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन से अस्पताल का निर्माण रूक गया। काम ने रफ्तार पकड़ी तो बजट के कारण काम रूक गया। जैसे-जैसे काम आगे बढ़ा तो इसका बजट भी बढ़ता गया। नए भवन में अस्पताल में तीन ब्लॉक बनाए जा रहे हैं। इनमें एक प्रशासनिक खंड, जबकि दो ब्लॉक मरीजों के लिए होंगे। इन्हीं में से एक ब्लॉक में ब्लड बैंक, लैब भी शिफ्ट होंगे। अस्पताल में जब से नए भवन को बनाने का काम शुरू हुआ है, तब से मरीज व उनके तीमारदार काफी परेशान हैं। अस्पताल का अपना भवन न होने से मरीजों की ओपीडी भी किसी तरह ट्रॉमा सेंटर के कमरों में हो रही है। भवन के अभाव में गर्भवती महिलाओं की ओपीडी व डिलीवरी सिविल अस्पताल जगाधरी में करनी पड़ रही है। जबकि उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने के लिए यमुनानगर आना पड़ता है। जिसके लिए उन्हें आने जाने में 10 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है।
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सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि पीडब्ल्यूडी ने 15 नवंबर तक काम पूरा करने की बात कही थी। हम उनके काम से संतुष्ट नहीं है। इस गति से तो अस्पताल का काम तीन-चार माह में भी पूरा नहीं होगा। यदि बजट को लेकर कोई इश्यू है तो हमें बताएं। उसे दूर किया जाएगा।
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन नवीन खत्री का कहना है कि अस्पताल में सेंट्रलाइज्ड ऐसी व अन्य कार्य इलेक्ट्रिक विंग को पूरे करने हैं। यदि वह एक माह में भी काम पूरा कर देते हैं तो हम 10 से 15 दिन में अपना काम खत्म कर भवन स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर देंगे।
पीडब्ल्यूडी इलेक्ट्रिक विंग के एसडीओ सुखदेव शर्मा का कहना है कि भवन में सेंट्रलाइज्ड एसी बाद में जोड़ा गया। एजेंसी की करीब ढाई करोड़ व एसी की एक करोड़ की पेमेंट एफडी लेवल पर नहीं हो पाई है। जिस कारण ठेकेदार काम पूरा नहीं कर पा रहा। सर्दी में फिलहाल एसी की जरूरत नहीं है। बिना ऐसी वह काम कुछ दिन में खत्म कर देंगे।