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सात साल से बंद प्रदेश के एकमात्र प्लांट में बिखरेगी हल्दी की महक, तेल भी बनेगा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 22 May 2022 03:03 AM IST
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The smell of turmeric will be scattered in the only plant of the state closed for seven years, oil will also be made
रादौर में बंद पड़ा प्रदेश का एकमात्र हल्दी प्रोसेसिंग प्लांट। - फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। रादौर में बापौली रोड पर सालों से बंद पड़े प्लांट में एक बार फिर से हल्दी की महक बिखरेगी। प्रदेश के एकमात्र हल्दी प्रोसेसिंग प्लांट से किसानों को एक, दो नहीं बल्कि तीन-तीन फायदे होंगे। प्लांट में प्रोसेसिंग करने के साथ हल्दी का तेल भी निकाला जाएगा। इसके अलावा मसालों की प्रोसेसिंग भी की जाएगी, जिनकी पैकिंग कर बाजार में बेचा जाएगा। प्लांट में अत्याधुनिक मशीनें लगाने के लिए बेस बनाए जा रहे हैं। प्लांट के लिए हैफेड ने 6.69 करोड़ रुपये का टेंडर अत्याधुनिक मशीनरी के लिए लगाया है।
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उबाल कर सुखाई गई हल्दी की होगी खरीद
वर्ष 2009 में जब रादौर में दो टन क्षमता का हल्दी प्रोसेसिंग प्लांट लगाया था तो इसमें कच्ची हल्दी की खरीद होती थी। खेतों से उखाड़ने के बाद किसान सीधे हल्दी को प्लांट में ले आते थे, परंतु अब प्लांट में लाने से पहले हल्दी को अच्छी तरह से गर्म पानी में उबाल कर सुखाने के बाद ही बेचा जा सकेगा, जिसके बाद आधुनिक मशीनों की मदद से हल्दी की पिसाई होगी। साथ ही हल्दी का तेल भी निकाला जाएगा। इसी मशीन की मदद से मसालों को प्रोसेस कर उनकी पैकिंग की जाएगी। रोजाना प्लांट में दो टन मसालों की पिसाई हो सकेगी।
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प्रतापनगर, छछरौली और रादौर क्षेत्र में सबसे ज्यादा हल्दी
मई और जून में हल्दी खेतों में लगाई जाती है। गत वर्ष जिले में हल्दी का रकबा 200 एकड़ था। इस साल भी इतने एरिया में हल्दी लगने की उम्मीद है। प्रतापनगर, छछरौली और रादौर क्षेत्र में सबसे ज्यादा हल्दी लगाई जाती है। जिला बागवानी कार्यालय की तरफ से मुख्यालय में बीज की डिमांड भेजी गई है। एक एकड़ में आठ क्विंटल हल्दी का बीज लगता है। फरवरी में हल्दी उखाड़ी जाती है। प्रति एकड़ औसतन 80 क्विंटल हल्दी की पैदावार होती है।
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कम कीमत मिलने से घट गया हल्दी का रकबा
वर्ष 2009 में जब रादौर में हल्दी प्रोसेसिंग प्लांट लगा था तो प्रदेश सरकार ने 20 रुपये प्रति किलो की दर से किसानों से हल्दी खरीदने की घोषणा की थी। सरकार पर भरोसा कर किसानों ने 1200 हेक्टेयर में हल्दी लगाई। आरोप है कि सरकार ने वादे से मुकरते हुए 20 की बजाय छह रुपये की दर से ही हल्दी खरीदी। धीरे-धीरे किसानों ने हल्दी लगानी बंद कर दी। जिस कारण रकबा 200 एकड़ पर सिमट गया। प्लांट चलाने के लिए प्रदेश सरकार ने पश्चिमी बंगाल, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब व अन्य राज्यों से हल्दी का आयात भी किया, लेकिन घाटे का सौदा मानते हुए प्लांट बंद कर दिया।
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ज्यादा करक्यूमिन वाली हल्दी लगवाएगा बागवानी विभाग
जिला बागवानी अधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि हल्दी की जिस किस्म में करक्यूमिन की मात्रा अधिक होती है, वही ज्यादा लाभकारी होती है। जिस हल्दी की पैकिंग की जाती है, उसमें करक्यूमिन की मात्रा दो प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए। इससे कम मात्रा वाली हल्दी को एफएसएसएआई के मानकों पर खरा नहीं माना जाता। अब सरकार ने हल्दी को भावांतर भरपाई योजना में शामिल किया है। इसके अनुसार यदि किसान की हल्दी ज्यादा रेट पर नहीं बिकती तो सरकार किसान से कम से कम 1400 रुपये प्रति क्विंटल हल्दी की खरीद तो करेगी ही।

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दिसंबर तक हो जाएगा तैयार : पवन कांबोज
हैफेड के मैनेजर पवन कांबोज ने बताया कि प्लांट में अत्याधुनिक मशीनरी को लगाया जाना है। इसके लिए बेस तैयार कर रहे हैं। प्लांट के भवन का भी विस्तार किया जा रहा है। अब हल्दी को प्रोसेस करने के साथ-साथ इसमें तेल निकाला जाएगा। साथ ही मसालों की भी प्रोसेसिंग की जाएगी। किसानों को हल्दी की खेती के प्रति जागरूकता लाने के लिए विभाग की ओर से किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
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ज्यादा करक्यूमिन व तेल वाली हल्दी की किस्में:
हल्दी की किस्म करक्यूमिन तेल
रोमा 9.3 4.2
सुगुना 7.3 6.0
राजिंद्र सोनिया 8.4 5.0
आईआईएसआ- प्रतिभा 6.2 6.2
आईआईएसआर- प्रभा 6.5 6.5
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