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Yamuna Nagar News: हरियाणा-हिमाचल की सीमा पर बना था लोहगढ़ का पुराना किला
Sun, 26 Oct 2025 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 26 Oct 2025 12:46 AM IST
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इसी भूमि पर बनेगा लोहगढ़ का स्मारक व संग्रहालय। विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। हरियाणा-हिमाचल की सीमा पर लोहगढ़ का पुराना किला हुआ करता था, जोकि 7000 एकड़ में फैला था और इसमें 200 छोटे किले भी बने थे। दोनों राज्यों की सीमा पर बने पुराने किले के अवशेष आज भी मौजूद हैं। यमुनानगर से हिमाचल की शिवालिक पहाड़ियों पर नजर दौड़ाएं तो पुराने किले की एक दीवार भी दिखाई देती है। इसे बनाने में 75 से 80 साल लगे थे।
बाबा बंदा सिंह बहादुर ने 1710 में सरहिंद जीतने के बाद इस किला लोहगढ़ को सिखों की पहली राजधानी बनाया था। वहीं इसी की तर्ज पर अब लोहगढ़ से डेढ़ किलोमीटर दूर भगवानपुर गांव में 112 करोड़ रुपये की लागत से अब बाबा बंदा सिंह बहादुर स्मारक व संग्रहालय बनाया जाना है। प्रथम चरण के कार्य के लिए सिंचाई विभाग ने 35 करोड़ रुपये की निविदा लगा दी है।
विभाग के अनुसार शोधकर्ताओं को पुराने किले के अवशेषों में बड़ी दीवारें मिल चुकी। अभी तक मोर्चे, कुएं, आटा पीसने की चक्कियां, घड़े के टूटे अवशेष और तेल निकालने के कोल्लू इत्यादि मिल चुके हैं। जंगल में कुएं बने हैं। इन अवशेषों से यह प्रतीत होता है कि लोहगढ़ के अंदर बहुत बड़ा शहर बसता था।
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अब शिवालिक की पहाड़ियों से सटे गांव भगवानपुर में लोहगढ़ किलेनुमा स्मारक व संग्रहालय बनाया जाएगा। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल 27 अक्तूबर को स्मारक की नींव रखेंगे। वहीं यह स्मारक व संग्रहालय बाबा बंदा सिंह बहादुर के साहसी नेतृत्व में खालसा साम्राज्य की दृढ़ता की कहानी और भारतीय उपमहाद्वीप में राजनीतिक व्यवस्था पर इसके प्रभाव को उजागर करेगा।
स्मारक के प्रवेश द्वार पर दिखेगा सिक्का
112 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस भव्य स्मारक की दीवारें पुराने किले की तरह होगी, वहीं जब पर्यटक इस भवन में दाखिल होंगे तो उन्हें प्रवेश द्वार पर एक विशाल घूमता हुआ सिक्का भी दिखाई देगा। जो स्मारक में प्रवेश करने वाले सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करेगा। यह सिक्का बाबा बंदा सिंह बहादुर के नेतृत्व में इस्तेमाल किए गए वास्तविक सिक्के के स्वरूप और विवरण को दोहराने के लिए तैयार किया जाएगा। इतना ही नहीं स्मारक के अंदर सुंदर फूल व पार्कनुमा जगह भी बनाई जाएगी। इसके साथ ही सेल्फी प्वाइंट भी होंगे।
स्मारक पर 112 करोड़ रुपये की लागत आएगी। प्रथम चरण के कार्य के लिए 35 करोड़ रुपये का टेंडर लगा दिया गया है। हरियाणा-हिमाचल की सीमा पर बने पुराने किले के अवशेष के रूप में एक दीवार यमुनानगर की तरफ से भी दिखाई देती है। - अमित मलिक, एक्सईएन, सिंचाई विभाग नारायगढ़।
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यमुनानगर। हरियाणा-हिमाचल की सीमा पर लोहगढ़ का पुराना किला हुआ करता था, जोकि 7000 एकड़ में फैला था और इसमें 200 छोटे किले भी बने थे। दोनों राज्यों की सीमा पर बने पुराने किले के अवशेष आज भी मौजूद हैं। यमुनानगर से हिमाचल की शिवालिक पहाड़ियों पर नजर दौड़ाएं तो पुराने किले की एक दीवार भी दिखाई देती है। इसे बनाने में 75 से 80 साल लगे थे।
बाबा बंदा सिंह बहादुर ने 1710 में सरहिंद जीतने के बाद इस किला लोहगढ़ को सिखों की पहली राजधानी बनाया था। वहीं इसी की तर्ज पर अब लोहगढ़ से डेढ़ किलोमीटर दूर भगवानपुर गांव में 112 करोड़ रुपये की लागत से अब बाबा बंदा सिंह बहादुर स्मारक व संग्रहालय बनाया जाना है। प्रथम चरण के कार्य के लिए सिंचाई विभाग ने 35 करोड़ रुपये की निविदा लगा दी है।
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विभाग के अनुसार शोधकर्ताओं को पुराने किले के अवशेषों में बड़ी दीवारें मिल चुकी। अभी तक मोर्चे, कुएं, आटा पीसने की चक्कियां, घड़े के टूटे अवशेष और तेल निकालने के कोल्लू इत्यादि मिल चुके हैं। जंगल में कुएं बने हैं। इन अवशेषों से यह प्रतीत होता है कि लोहगढ़ के अंदर बहुत बड़ा शहर बसता था।
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अब शिवालिक की पहाड़ियों से सटे गांव भगवानपुर में लोहगढ़ किलेनुमा स्मारक व संग्रहालय बनाया जाएगा। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल 27 अक्तूबर को स्मारक की नींव रखेंगे। वहीं यह स्मारक व संग्रहालय बाबा बंदा सिंह बहादुर के साहसी नेतृत्व में खालसा साम्राज्य की दृढ़ता की कहानी और भारतीय उपमहाद्वीप में राजनीतिक व्यवस्था पर इसके प्रभाव को उजागर करेगा।
स्मारक के प्रवेश द्वार पर दिखेगा सिक्का
112 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस भव्य स्मारक की दीवारें पुराने किले की तरह होगी, वहीं जब पर्यटक इस भवन में दाखिल होंगे तो उन्हें प्रवेश द्वार पर एक विशाल घूमता हुआ सिक्का भी दिखाई देगा। जो स्मारक में प्रवेश करने वाले सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करेगा। यह सिक्का बाबा बंदा सिंह बहादुर के नेतृत्व में इस्तेमाल किए गए वास्तविक सिक्के के स्वरूप और विवरण को दोहराने के लिए तैयार किया जाएगा। इतना ही नहीं स्मारक के अंदर सुंदर फूल व पार्कनुमा जगह भी बनाई जाएगी। इसके साथ ही सेल्फी प्वाइंट भी होंगे।
स्मारक पर 112 करोड़ रुपये की लागत आएगी। प्रथम चरण के कार्य के लिए 35 करोड़ रुपये का टेंडर लगा दिया गया है। हरियाणा-हिमाचल की सीमा पर बने पुराने किले के अवशेष के रूप में एक दीवार यमुनानगर की तरफ से भी दिखाई देती है। - अमित मलिक, एक्सईएन, सिंचाई विभाग नारायगढ़।

इसी भूमि पर बनेगा लोहगढ़ का स्मारक व संग्रहालय। विभाग

इसी भूमि पर बनेगा लोहगढ़ का स्मारक व संग्रहालय। विभाग