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Yamuna Nagar News: साढौरा से जीते विधायकों से हमेशा दूर रही मंत्री की कुर्सी
Sun, 01 Sep 2024 03:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 01 Sep 2024 03:29 AM IST
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साहिल घई
साढौरा। साढौरा आरक्षित विधानसभा क्षेत्र से अभी तक जीते किसी भी विधायक को मंत्री बनने का सौभाग्य नहीं मिल पाया है। इस सीट पर जितने विधायक रहे उनमें से किसी को भी मंत्री की कुर्सी पर बैठना नसीब नहीं हुआ।
जीत की तिकड़ी लगाने वाले भागमल को भी 1987 में संसदीय सचिव ही बनाया गया। वही 1991 में बतौर आजाद उम्मीदवार जीते शेर सिंह को तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल के नजदीकी होने के कारण पहले योजना बोर्ड का उपाध्यक्ष और कुछ समय बाद हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था। 1996 में समता पार्टी के रामजी लाल को हरिजन कल्याण निगम का चेयरमैन बनाया गया था। साढौरा विधानसभा क्षेत्र से 1991 में विधायक चुने गए शेर सिंह अब तक के इकलौते आजाद विधायक है।
वर्ष 1991 में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष शेर सिंह साढौरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट के प्रबल दावेदार थे। उस समय कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी के कारण भजन लाल के नजदीकी माने जाने वाले शेर सिंह के बजाय लोकदल छोड़कर कांग्रेस में रातोंरात शामिल हुए पूर्व मंत्री कृपा राम पुनिया को टिकट थमा दी गई। इस पर शेर सिंह ने कांग्रेस से बगावत करके आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और बतौर एकमात्र आजाद प्रत्याशी इस सीट से जीत दर्ज की। कृपा राम पुनिया को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ।
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भागमल ने 1977 में जनता पार्टी, 1982 में भाजपा और 1987 में भाजपा-लोकदल गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की। बलवंत सिंह को भी इस क्षेत्र से तीन बार विधायक बनने का अवसर मिल चुका है। बलवंत सिंह ने 2000 तो 2005 में बतौर इनेलो प्रत्याशी तो 2014 में बतौर भाजपा प्रत्याशी जीत हासिल की है। समता पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर रामजी लाल 1991 में विधायक चुने गए थे। कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर 2009 में राजपाल भूखड़ी तो 2019 में रेनू बाला विधायक चुनीं गईं। संवाद
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साढौरा। साढौरा आरक्षित विधानसभा क्षेत्र से अभी तक जीते किसी भी विधायक को मंत्री बनने का सौभाग्य नहीं मिल पाया है। इस सीट पर जितने विधायक रहे उनमें से किसी को भी मंत्री की कुर्सी पर बैठना नसीब नहीं हुआ।
जीत की तिकड़ी लगाने वाले भागमल को भी 1987 में संसदीय सचिव ही बनाया गया। वही 1991 में बतौर आजाद उम्मीदवार जीते शेर सिंह को तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल के नजदीकी होने के कारण पहले योजना बोर्ड का उपाध्यक्ष और कुछ समय बाद हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था। 1996 में समता पार्टी के रामजी लाल को हरिजन कल्याण निगम का चेयरमैन बनाया गया था। साढौरा विधानसभा क्षेत्र से 1991 में विधायक चुने गए शेर सिंह अब तक के इकलौते आजाद विधायक है।
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वर्ष 1991 में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष शेर सिंह साढौरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट के प्रबल दावेदार थे। उस समय कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी के कारण भजन लाल के नजदीकी माने जाने वाले शेर सिंह के बजाय लोकदल छोड़कर कांग्रेस में रातोंरात शामिल हुए पूर्व मंत्री कृपा राम पुनिया को टिकट थमा दी गई। इस पर शेर सिंह ने कांग्रेस से बगावत करके आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और बतौर एकमात्र आजाद प्रत्याशी इस सीट से जीत दर्ज की। कृपा राम पुनिया को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ।
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भागमल ने 1977 में जनता पार्टी, 1982 में भाजपा और 1987 में भाजपा-लोकदल गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की। बलवंत सिंह को भी इस क्षेत्र से तीन बार विधायक बनने का अवसर मिल चुका है। बलवंत सिंह ने 2000 तो 2005 में बतौर इनेलो प्रत्याशी तो 2014 में बतौर भाजपा प्रत्याशी जीत हासिल की है। समता पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर रामजी लाल 1991 में विधायक चुने गए थे। कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर 2009 में राजपाल भूखड़ी तो 2019 में रेनू बाला विधायक चुनीं गईं। संवाद