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Yamuna Nagar News: बीमा कंपनी को 3.28 लाख का मुआवजा सात फीसदी ब्याज के साथ देने का आदेश

Sat, 11 Apr 2026 02:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sat, 11 Apr 2026 02:58 AM IST
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The insurance company was ordered to pay compensation of Rs 3.28 lakh along with 7% interest.
यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी की लापरवाही और सेवा में कमी को गंभीर मानते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। फोरम ने चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता शुभम कुमार को 3,28,950 रुपये का मुआवजा सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे।
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इसके अलावा मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 11 हजार रुपये अतिरिक्त देने के आदेश भी दिए गए हैं। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के सहायक रजिस्ट्रार नीरज वालिया ने बताया कि जिले के गांव अलीपुर निवासी शुभम कुमार ने अपने महिंद्रा पिकअप वाहन का बीमा 22 मार्च 2023 को कराया था।
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इसके लिए उन्होंने 33,923 रुपये का प्रीमियम अदा किया था। 21 जून 2023 को केएमपी रोड, खरखोदा के पास उसका वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें वाहन को भारी नुकसान पहुंचा। शिकायतकर्ता ने तुरंत बीमा कंपनी को सूचना दी और सर्वेक्षक ने मौके पर पहुंच कर निरीक्षण भी किया। वाहन को एजेंसी में भेजा गया, जहां सर्वे में करीब 6.50 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया।
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सभी आवश्यक दस्तावेज बीमा कंपनी को सौंपने के बावजूद कंपनी ने भुगतान नहीं किया और टालमटोल करती रही। अंततः शिकायतकर्ता को कानूनी नोटिस भेजना पड़ा, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिला। सहायक रजिस्ट्रार नीरज वालिया ने बताया कि बीमा कंपनी ने अपने बचाव में दावा किया कि दुर्घटना के समय वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक भार था। कंपनी के अनुसार, वाहन की लोडिंग क्षमता 1245 किलोग्राम थी, जबकि उस समय करीब 2000 किलोग्राम टमाटर लदे हुए थे, जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। इसी आधार पर कंपनी ने क्लेम खारिज कर दिया।
इस पर शुभम कुमार ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपना मामला रखा। आयोग ने दोनों पक्षों के तर्कों और साक्ष्यों की गहन समीक्षा की। जांच में सामने आया कि वाहन में 42 क्रेट टमाटर लदे हुए थे। सामान्य तौर पर एक क्रेट में 20 से 30 किलोग्राम वजन होता है, ऐसे में कुल वजन लगभग 1218 किलोग्राम बनता है। आयोग ने माना कि 2000 किलोग्राम का दावा तर्कसंगत नहीं है और बीमा कंपनी इसे साबित करने में विफल रही। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मान भी लिया जाए कि वाहन ओवरलोड था, तब भी यह साबित नहीं हुआ कि दुर्घटना का मुख्य कारण ओवरलोडिंग थी। बीमा कंपनी के सर्वेक्षक भी अपनी रिपोर्ट में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दे सके। ऐसे में केवल ओवरलोडिंग के आधार पर पूरे क्लेम को खारिज करना अनुचित है। बीमा कंपनी पुलिस या परिवहन विभाग का कार्य नहीं कर सकती। ओवरलोडिंग के लिए जुर्माना लगाना अलग विषय है, लेकिन इससे बीमा क्लेम स्वतः निरस्त नहीं किया जा सकता।

चूंकि बीमा पॉलिसी वैध थी और प्रीमियम का भुगतान किया गया था, इसलिए कंपनी को नुकसान की भरपाई करनी होगी। फोरम ने बीमा कंपनी के इस रवैये को सेवा में कमी और लापरवाही करार दिया। आदेश में कहा गया कि कंपनी 45 दिनों के भीतर भुगतान करे, अन्यथा देरी होने पर ब्याज दर नौ प्रतिशत वार्षिक हो जाएगी। संवाद
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