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Yamuna Nagar News: मौसम की बेरुखी से धान की फसल पर संकट, ट्यूबवेल के सहारे किसान
Mon, 29 Jun 2026 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 29 Jun 2026 12:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण धान की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान पूरी तरह पानी पर निर्भर फसल मानी जाती है, लेकिन लगातार शुष्क मौसम के चलते खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है। अधिकांश किसान अब केवल ट्यूबवेल के सहारे फसल की सिंचाई कर रहे हैं।
वहीं जिन किसानों के पास सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं, उनके हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। कई खेतों में पानी की कमी के कारण मिट्टी में दरारें तक दिखाई देने लगी हैं। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की बढ़वार प्रभावित होने के साथ-साथ उत्पादन में भी गिरावट आ सकती है।
जिले में करीब 60 प्रतिशत एरिया में धान की रोपाई हो चुकी है। धान की रोपाई के बाद शुरुआती चरण में खेतों में लगातार नमी और समय-समय पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। इस बार मानसून की कमजोर सक्रियता के कारण खेतों में पानी की उपलब्धता कम हो गई है। ऐसे में किसान दिन-रात ट्यूबवेल चलाकर फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
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हालांकि लगातार सिंचाई करने से बिजली और डीजल पर खर्च बढ़ गया है, जिससे खेती की लागत में भी इजाफा हो रहा है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति आर्थिक रूप से बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एपीपीओ डॉ. सतीश अरोड़ा ने बताया कि धान के खेतों में लंबे समय तक गर्म पानी रहने से पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
समय पर बारिश होना बेहद जरूरी है। कई खेतों में पानी कम होने के कारण सतह पर काई की परत जम गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि इस काई को हटाने के बजाय जमीन पर बैठने दें, क्योंकि इसमें मौजूद लाभकारी जीवाणु प्राकृतिक खाद का कार्य करते हैं। इसके बाद खेत में सिंचाई करने से फसल को बेहतर लाभ मिलेगा।
मौजूदा मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसानों को आवश्यकता के अनुसार ही सिंचाई करने और खेतों में अनावश्यक पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी गई है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश हो जाती है तो धान की फसल को संभावित बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
किसान बोले- कम मिल रही बिजली
ट्यूबवेल के भरोसे सिंचाई कर रहे किसानों ने बिजली आपूर्ति को लेकर भी नाराजगी जताई है। किसानों का आरोप है कि उन्हें प्रतिदिन केवल पांच से छह घंटे ही बिजली मिल रही है। धान की सिंचाई के लिए इससे अधिक समय की जरूरत है। गांव रतनपुरा के किसान जितेंद्र राणा, राजबीर, अशोक कुमार, विरेंद्र कुमार, महिंद्र सिंह, ज्ञान चंद च राजकुमार का कहना है कि बिजली नहीं मिलने से फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति के घंटे बढ़ाने की मांग
भारतीय किसान यूनियन के नेता हरपाल सुढल, सुभाष गुर्जर और संजू गुंदियाना का कहना है कि धान की फसल इस समय नियमित पानी मांग रही है, लेकिन पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि धान के सीजन को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में ट्यूबवेलों के लिए बिजली आपूर्ति के घंटे बढ़ाए जाएं, ताकि किसान समय पर सिंचाई कर सकें और फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।
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यमुनानगर। जिले में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण धान की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान पूरी तरह पानी पर निर्भर फसल मानी जाती है, लेकिन लगातार शुष्क मौसम के चलते खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है। अधिकांश किसान अब केवल ट्यूबवेल के सहारे फसल की सिंचाई कर रहे हैं।
वहीं जिन किसानों के पास सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं, उनके हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। कई खेतों में पानी की कमी के कारण मिट्टी में दरारें तक दिखाई देने लगी हैं। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की बढ़वार प्रभावित होने के साथ-साथ उत्पादन में भी गिरावट आ सकती है।
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जिले में करीब 60 प्रतिशत एरिया में धान की रोपाई हो चुकी है। धान की रोपाई के बाद शुरुआती चरण में खेतों में लगातार नमी और समय-समय पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। इस बार मानसून की कमजोर सक्रियता के कारण खेतों में पानी की उपलब्धता कम हो गई है। ऐसे में किसान दिन-रात ट्यूबवेल चलाकर फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
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हालांकि लगातार सिंचाई करने से बिजली और डीजल पर खर्च बढ़ गया है, जिससे खेती की लागत में भी इजाफा हो रहा है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति आर्थिक रूप से बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एपीपीओ डॉ. सतीश अरोड़ा ने बताया कि धान के खेतों में लंबे समय तक गर्म पानी रहने से पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
समय पर बारिश होना बेहद जरूरी है। कई खेतों में पानी कम होने के कारण सतह पर काई की परत जम गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि इस काई को हटाने के बजाय जमीन पर बैठने दें, क्योंकि इसमें मौजूद लाभकारी जीवाणु प्राकृतिक खाद का कार्य करते हैं। इसके बाद खेत में सिंचाई करने से फसल को बेहतर लाभ मिलेगा।
मौजूदा मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसानों को आवश्यकता के अनुसार ही सिंचाई करने और खेतों में अनावश्यक पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी गई है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश हो जाती है तो धान की फसल को संभावित बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
किसान बोले- कम मिल रही बिजली
ट्यूबवेल के भरोसे सिंचाई कर रहे किसानों ने बिजली आपूर्ति को लेकर भी नाराजगी जताई है। किसानों का आरोप है कि उन्हें प्रतिदिन केवल पांच से छह घंटे ही बिजली मिल रही है। धान की सिंचाई के लिए इससे अधिक समय की जरूरत है। गांव रतनपुरा के किसान जितेंद्र राणा, राजबीर, अशोक कुमार, विरेंद्र कुमार, महिंद्र सिंह, ज्ञान चंद च राजकुमार का कहना है कि बिजली नहीं मिलने से फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति के घंटे बढ़ाने की मांग
भारतीय किसान यूनियन के नेता हरपाल सुढल, सुभाष गुर्जर और संजू गुंदियाना का कहना है कि धान की फसल इस समय नियमित पानी मांग रही है, लेकिन पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि धान के सीजन को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में ट्यूबवेलों के लिए बिजली आपूर्ति के घंटे बढ़ाए जाएं, ताकि किसान समय पर सिंचाई कर सकें और फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।