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Yamuna Nagar News: रामपुर के गैंडा गांव में बना अजान चाह परंपरा का पहला बौद्ध मठ
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संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। हिमाचल की पहाड़ियों से सटे गांव रामपुर गैंंडा में रविवार को अजान चाह परंपरा के भारत में पहले अरण्य संघाराम बौद्ध मठ के कल्याण मित्र भवन का उद्घाटन आचार्य लुमपोलियन ने किया।
इस दौरान थाईलैंड ,इंग्लैंड, नेपाल व देश के विभिन्न हिस्सों से आए साधक शामिल हुए। सबसे पहले बौद्ध वंदना की गई। इसके पश्चात आसपास के ग्रामीणों ने बौद्ध साधकों को भोजन दान किया। बाद में परिता चार्ट का पाठ किया गया।
इस अवसर पर आचार्य लुमपोलियन ने बौद्ध धर्म का इतिहास व शिक्षाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि हजारों साल पहले भगवान बुद्ध के चरण भारत की धरा पर पड़े। बुद्ध हमेशा समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चले। आचार्य ने कहा, मन की शांति जरूरी है। इसके लिए साधना करनी चाहिए। वहीं, राकेश कांबोज ने कहा कि जिस भी क्षेत्र में बौद्ध संन्यासी व भिक्षु जाते हैं उनका प्रयास रहता है की बौद्ध परंपराओं व शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए साफ मन से कार्य कर अन्य लोगों के मन को साफ करने का प्रयास किया जाए।
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अजान चाह परंपरा के हैं 33 बौद्ध विहार
प्रबंधक राहुल शाक्य ने बताया कि गांव के गांव रामपुर गैंडा में अजान चाह परंपरा का भारत का पहला बौद्ध विहार है। जहां देश विदेश के साधक साधना करने के लिए पहुंचेंगे। नवनिर्मित अरण्य संघराम बौद्ध विहार 28 एकड़ भूमि में दो करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। विश्व में प्राचीन अजान चाह परंपरा के 33 मठ बने हुए हैं। इसके पश्चात भारत में पहला व विश्व में 34वें मठ का निर्माण यहां किया गया है। शाक्य ने बताया कि मठ में एक यज्ञशाला बनाई गई है जहां बौद्ध की मूर्ति को स्थापित किया गया है। मठ में छह कमरे बनाए गए हैं जो कि साधकों के लिए निर्धारित हैं। दो डोरमेट्री भी हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता अजान केबली ने की।
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व्यासपुर। हिमाचल की पहाड़ियों से सटे गांव रामपुर गैंंडा में रविवार को अजान चाह परंपरा के भारत में पहले अरण्य संघाराम बौद्ध मठ के कल्याण मित्र भवन का उद्घाटन आचार्य लुमपोलियन ने किया।
इस दौरान थाईलैंड ,इंग्लैंड, नेपाल व देश के विभिन्न हिस्सों से आए साधक शामिल हुए। सबसे पहले बौद्ध वंदना की गई। इसके पश्चात आसपास के ग्रामीणों ने बौद्ध साधकों को भोजन दान किया। बाद में परिता चार्ट का पाठ किया गया।
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इस अवसर पर आचार्य लुमपोलियन ने बौद्ध धर्म का इतिहास व शिक्षाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि हजारों साल पहले भगवान बुद्ध के चरण भारत की धरा पर पड़े। बुद्ध हमेशा समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चले। आचार्य ने कहा, मन की शांति जरूरी है। इसके लिए साधना करनी चाहिए। वहीं, राकेश कांबोज ने कहा कि जिस भी क्षेत्र में बौद्ध संन्यासी व भिक्षु जाते हैं उनका प्रयास रहता है की बौद्ध परंपराओं व शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए साफ मन से कार्य कर अन्य लोगों के मन को साफ करने का प्रयास किया जाए।
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अजान चाह परंपरा के हैं 33 बौद्ध विहार
प्रबंधक राहुल शाक्य ने बताया कि गांव के गांव रामपुर गैंडा में अजान चाह परंपरा का भारत का पहला बौद्ध विहार है। जहां देश विदेश के साधक साधना करने के लिए पहुंचेंगे। नवनिर्मित अरण्य संघराम बौद्ध विहार 28 एकड़ भूमि में दो करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। विश्व में प्राचीन अजान चाह परंपरा के 33 मठ बने हुए हैं। इसके पश्चात भारत में पहला व विश्व में 34वें मठ का निर्माण यहां किया गया है। शाक्य ने बताया कि मठ में एक यज्ञशाला बनाई गई है जहां बौद्ध की मूर्ति को स्थापित किया गया है। मठ में छह कमरे बनाए गए हैं जो कि साधकों के लिए निर्धारित हैं। दो डोरमेट्री भी हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता अजान केबली ने की।