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Yamuna Nagar News: पढ़ाई में कमजोर बच्चों को विभाग बनाएगा दक्ष

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Oct 2024 01:10 AM IST
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The department will make students who are weak in studies proficient
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। सरकारी स्कूलों के बच्चे भी अब निजी स्कूलों के विद्यार्थियों की तरह पढ़ाई लिखाई में दक्ष बनेंगे। सरकारी स्कूल के बच्चे भी अब फर्राटेदार पैराग्राफ पढ़ सकेंगे। इसके लिए स्कूलों में विशेष कार्यक्रम चलाकर बच्चों को दक्ष बनाया जाएगा। इससे पहले स्कूलों में ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी, जो पढ़ाई, उच्चारण व चीजों के समझने में कक्षा के औसत बच्चों से पीछे हैं।

शिक्षा विभाग का यह कार्यक्रम जिले के सभी प्राइमरी स्कूल की पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों के लिए चलाया जाएगा। यह कार्यक्रम निपुण हरियाणा मिशन के तहत निपुण ग्रेड के अंतर्गत चलेगा। इसके माध्यम से सभी स्कूलों में बच्चों के अध्ययन व अन्य चीजों को समझने की क्षमता की परख की जाएगी। बच्चों की पढ़ाई का निरीक्षण व ऑनलाइन परख किया जाएगा।
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इसके लिए विभाग की ओर से मानक निर्धारित किए गए हैं। जो बच्चों निर्धारित मानक व दक्षता पूरी करेगा उसे दक्ष श्रेणी में रखा जाएगा। जो बच्चे इससे पीछे रहेंगे उन्हें दूसरी श्रेणी में रखा जाएगा। जिसके बाद इस श्रेणी के बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए अधिकारी व शिक्षक विशेष रणनीति के तहत काम करेंगे, जिससे बच्चों की दक्षता व कुशलता में सुधार होगा।
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इस विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत हर महीने स्कूलों में निपुण ग्रेड निरीक्षण किया जाएगा। कक्षा में डेढ़ घंटे के निरीक्षण में बच्चों से एप के जरिए सवाल किए जाएंगे। वहीं, एप पर ही बच्चों को पैराग्राफ पढ़ने के लिए दिया जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से मानक निर्धारित किए गए हैं।

यह निरीक्षण स्कूलों में पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों का किया जाएगा। पहली कक्षा में बच्चों को एप पर दिए गद्यांश के 15 से 20 शब्द एक मिनट में पढ़ने होंगे। वहीं, दूसरी कक्षा के लिए 45 शब्द प्रति मिनट का मानक निर्धारित किया गया है। इसी तरह तीसरी कक्षा के बच्चों के लिए 60 शब्द प्रति मिनट की क्षमता निर्धारित की गई है।



यदि बच्चे यह दक्षता नहीं प्राप्त कर पाते और कक्षा की निर्धारित अन्य दक्षताओं में भी पीछे हैं तो उनका रेमिडेशन किया जाएगा। उन्हें उपचारात्मक शिक्षण दिया जाएगा। इससे बच्चों की कमजोर कड़ियों पर काम किया जाएगा। शब्दों की बनावट, मात्राएं, चीजों की समझ, उच्चारण इत्यादि के अनुसार उन्हें तैयार किया जाएगा। जिन चीजों में बच्चे कमजोर होंगे उन्हें दुरुस्त करने के लिए विशेष प्रणाली अपनाई जाएगी।


स्कूलों में बच्चों को दक्ष बनाने के लिए काम किया जा रहा है। इस दौरान कक्षा की 50 प्रतिशत से कम दक्षता अंक प्राप्त करने वाले बच्चों पर काम किया जाएगा। इससे उनकी कार्य में कुशलता आएगी और वे भी अन्य बच्चों की तरह दक्ष बनेंगे। इसके लिए हर महीने स्कूलों में निरीक्षण से कमजोर विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी। - संजीव सैनी, एफएलएन समन्वयक।
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