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Yamuna Nagar News: श्रीराम-भरत का मिलाप देखकर दर्शक भाव-विभोर

Fri, 26 Sep 2025 02:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Fri, 26 Sep 2025 02:15 AM IST
सार

जगाधरी शहर में छह स्थानों पर रामलीला का भव्य मंचन किया जा रहा है। भावनात्मक दृश्यों और शानदार अभिनय के कारण दर्शकों की भीड़ उमड़ रही है। कलाकारों के प्रदर्शन से लोग भाव-विभोर हो रहे हैं।

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The audience was moved by the meeting of Shri Ram and Bharat.
बूड़िया रामलीला में सीता स्वयंवर का मंचन करते कलाकार। संवाद

विस्तार

संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। जिले में चल रही विभिन्न स्थानों पर रामलीला का मंचन किया जा रहा है। रामलीला को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। रामलीला देखने के लिए रोजाना लोगों की भीड़ उमड़ रही है। लोगों में इसे लेकर इतना उत्साह है कि रात नौ बजे ही पंडालों में लोग पहु्ंचने शुरू हो जाते हैं। शहर में छह स्थानों पर रामलीला का मंचन किया जा रहा है।
वहीं बुधवार को विभिन्न स्थानों पर राम वनवास, श्रीराम-केवट संवाद और भरत मिलाप कथा का मंचन किया गया। भरत मिलाप का मार्मिक दृश्य देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए और लोगों की आंखें छलक पड़ी। वहीं, बूड़िया की रामलीला में ताड़वा वध, सीता स्वयंवर और लक्ष्मण परशुराम संवाद का दृश्य दिखाया गया।
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आईटीआई रामलीला, कैटल कंपाउंट, रामपुरा पार्क, जगाधरी अनाजमंडी, झंड़ा चौक पर हो रही रामलीला में श्रीराम भरत मिलाप की कथा मंथन किया गया। इस दौरान कलाकारों ने शानदार अभिनय का प्रदर्शन किया, जिसे देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए। इस दौरान दिखाया गया कि पिता दशरथ की मृत्यु के बाद भरत अयोध्या लौटते हैं, तो उन्हें माता केकई और मंथरा के षड्यंत्र के बारे पता चलता है।
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इससे वे क्रोधित हो जाते हैं और उनका माता केकई से कड़ा संवाद होता है। इसके बाद तीनों माताओं भाई शुत्रघन के साथ बड़े भाई श्रीराम, भाभी सीता और अनुज लक्ष्मण को लेने चित्रकूट पहुंचते हैं। यहां पर वे श्रीराम को मनाकर वापस चलने के लिए जिद्द करते हैं, परंतु श्रीराम पिता की आज्ञा व उनके वरदान की दुहाई देकर ऐसा करने से मना कर देते हैं। इसके बाद भरत कुमार बड़े भाई की खड़ाऊं लेकर लौटते हैं। इस दौरान वे प्रण लेते हैं जब तक भईया वन में रहेंगे वे नंदीग्राम में वनवासी की तरह जीवन व्यतित करेंगे और वहीं से राज्य के कार्य करेंगे।
वहीं बूड़िया की पुरानी डिस्पेंसरी में हो रही रामलीला में ताड़का वध, सीता स्वयंवर और परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन किया गया। इस दौरान दिखाया गया कि सुंदरवन की राक्षसी ताड़का और उनके पुत्र मारीछ व सुबाहू ऋषियों को प्रताड़ित करते हैं और उनके यज्ञ व अन्य अनुष्ठान भंग कर देते हैं।

इसके बाद ऋषि विश्वामित्र राम-लखन को ताड़का का वध करने के लिए साथ लेकर आते हैं। इस दौरान ताड़का का भयावह रूप दिखाया गया, जिसे देखकर लोगों में भय दिखाई दिया। ताड़का के वध के बाद पंडाल जय श्रीराम के घोष से गूंज उठा। इसके बाद सीता स्वयंवर और परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन किया गया।
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