यमुनानगर वैश्विक महामारी कोरोना के कहर के चलते हुए लॉकडाउन ने सामान्यजन की दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर दिया है। निम्न वर्गीय लोग, जो दो समय के भोजन के लिए दिहाड़ी-मजदूरी पर निर्भर थे। लॉकडाउन के कारण खुद को बहुत ही असहाय व बेबस महसूस कर रहे हैं। इसी बेबसी के चलते जहां एक ओर राशन, खाने इत्यादि के लिए बच्चे 1098 पर कॉल कर रहे है। वहीं इतने दिनों से घरों में कैद बच्चे मानसिक व भावनात्मक रूप से परेशानी का शिकार हो रहे हैं। चाइल्डलाइन के समन्वयक भानू प्रताप ने बताया कि ऐसे में बच्चों को उनके अभिभावक डांटे ना, उनको पीटे नहीं। ये समय है, उनके साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने का उनकी रुचि, उनकी अरुचि को जानने का, बच्चों को संयम से सुनने का। उन्होंने कहा कि कोविड-19 को लेकर बच्चों में डर जैसी स्थिति है। वे अपने स्कूल और कैरियर को लेकर चिंतित हैं, ऐसी कॉल्स भी 1098 पर हमें प्राप्त हो रही हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को मानसिक व भावनात्मक तनाव से दूर रखने की आवश्यकता है।चाइल्डलाइन की निदेशिका डॉ अंजू बाजपाई ने बताया कि चाइल्डलाइन टीम निरंतर 1098 पर मिल रही कॉल्स के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को राशन जैसे आटा, दाल, चावल व अन्य जरूरत की सामग्री प्रदान कर रही है। टीम वहां मौजूद लोगों से जब बात करती है, तो कुछ लोग भावुक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस महामारी व लॉकडाउन ने हम जैसे लोगों को शारीरिक व मानसिक रूप से सक्षम होते हुए भी अपंग बना दिया है। हम अपने बच्चों की मूलभूत आवश्यकताओं को पुर्ण करने में भी असक्षम है। इस पर चाइल्डलाइन की टीम ने उन्हें समझाया रही है और इस स्थिति का डटकर सामना करने के लिए प्रेरित कर रही है। उन्हें विश्वास दिला रही है कि इस मुसीबत के समय में चाइल्डलाइन उनकी बच्चों से सम्बंधित हर संभव सहायता करने का प्रयास करेंगी। परंतु वे इस लॉकडाऊन का पालन करें और देश को इस महामारी से बचाने में योगदान दे।