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Yamuna Nagar News: एक दिन स्कूल गया छात्र, 35 हजार रुपये प्रवेश शुल्क लौटाए संस्थान
Wed, 04 Mar 2026 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 04 Mar 2026 12:05 AM IST
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग कार्यालय। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्प्रिंग फील्ड्स पब्लिक स्कूल को 9वीं कक्षा में दाखिला लेने वाले छात्र की 35 हजार रुपये प्रवेश शुल्क वापस करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि स्कूल शिकायतकर्ता को 5,500 रुपये एकमुश्त राशि मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय के रूप में अदा करे। आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा, अन्यथा पूरी राशि पर शिकायत दायर करने की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।
मामले के अनुसार हरेंद्रर कौर ने अपने पुत्र ईशान का दाखिला 30 मार्च 2024 को स्प्रिंग फील्ड्स पब्लिक स्कूल में 9वीं कक्षा में कराया था। दाखिले के समय 35 हजार रुपये एडमिशन फीस, 5,750 रुपये मासिक व बस शुल्क और 100 रुपये आईडी कार्ड शुल्क जमा किए गए। कुल 40,850 रुपये की राशि रसीद के साथ अदा की गई थी।
छात्र ने 3 अप्रैल 2024 को केवल एक दिन स्कूल में कक्षा लगाई। उसी दिन उसने खुद को असहज महसूस किया और आगे पढ़ाई जारी रखने में रुचि नहीं दिखाई। अगले दिन 4 अप्रैल को अभिभावक ने स्कूल प्रबंधन से संपर्क कर दाखिला वापस लेने और फीस वापसी का अनुरोध किया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद 24 अप्रैल 2024 को उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की गई।
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आयोग की पीठ में अध्यक्ष राजबीर सिंह और सदस्य जसविंदर सिंह व सुमन राणा शामिल रहे। आयोग ने माना कि छात्र ने केवल एक दिन कक्षा अटेंड की थी और शिकायतकर्ता ने दाखिले की तिथि से एक माह के भीतर ही प्रवेश वापस लेने का निर्णय लेकर आयोग में मामला दायर किया। आदेश में कहा गया कि यदि छात्र ने स्कूल की सेवाओं का दीर्घकाल तक लाभ नहीं लिया।
अभिभावक ने अल्प अवधि में ही दाखिला वापस ले लिया, तो पूरी एडमिशन फीस रोकना न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। स्कूल की ओर से प्रॉस्पेक्टस में एडमिशन और रजिस्ट्रेशन शुल्क को नॉन-रिफंडेबल बताया गया था, लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसी शर्तें हर परिस्थिति में अंतिम नहीं मानी जा सकतीं।
हालांकि आयोग ने यह भी माना कि छात्र ने एक दिन कक्षा और बस सेवा का उपयोग किया था। इस आधार पर 5,750 रुपये मासिक व बस शुल्क लौटाने का दावा स्वीकार नहीं किया गया। आयोग ने कहा कि दाखिले के बाद सीट आरक्षित हो जाती है, जिससे स्कूल पर कुछ वित्तीय प्रभाव पड़ सकता है।
इसी कारण शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए केवल 35 हजार रुपये एडमिशन फीस लौटाने का आदेश दिया गया। उधर, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अस्सिटेंट रजिस्ट्रार नीरज वालिया का कहना है इस मामले में आयोग ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद ही अपना फैसला सुनाया है।
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यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्प्रिंग फील्ड्स पब्लिक स्कूल को 9वीं कक्षा में दाखिला लेने वाले छात्र की 35 हजार रुपये प्रवेश शुल्क वापस करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि स्कूल शिकायतकर्ता को 5,500 रुपये एकमुश्त राशि मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय के रूप में अदा करे। आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा, अन्यथा पूरी राशि पर शिकायत दायर करने की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।
मामले के अनुसार हरेंद्रर कौर ने अपने पुत्र ईशान का दाखिला 30 मार्च 2024 को स्प्रिंग फील्ड्स पब्लिक स्कूल में 9वीं कक्षा में कराया था। दाखिले के समय 35 हजार रुपये एडमिशन फीस, 5,750 रुपये मासिक व बस शुल्क और 100 रुपये आईडी कार्ड शुल्क जमा किए गए। कुल 40,850 रुपये की राशि रसीद के साथ अदा की गई थी।
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छात्र ने 3 अप्रैल 2024 को केवल एक दिन स्कूल में कक्षा लगाई। उसी दिन उसने खुद को असहज महसूस किया और आगे पढ़ाई जारी रखने में रुचि नहीं दिखाई। अगले दिन 4 अप्रैल को अभिभावक ने स्कूल प्रबंधन से संपर्क कर दाखिला वापस लेने और फीस वापसी का अनुरोध किया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद 24 अप्रैल 2024 को उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की गई।
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आयोग की पीठ में अध्यक्ष राजबीर सिंह और सदस्य जसविंदर सिंह व सुमन राणा शामिल रहे। आयोग ने माना कि छात्र ने केवल एक दिन कक्षा अटेंड की थी और शिकायतकर्ता ने दाखिले की तिथि से एक माह के भीतर ही प्रवेश वापस लेने का निर्णय लेकर आयोग में मामला दायर किया। आदेश में कहा गया कि यदि छात्र ने स्कूल की सेवाओं का दीर्घकाल तक लाभ नहीं लिया।
अभिभावक ने अल्प अवधि में ही दाखिला वापस ले लिया, तो पूरी एडमिशन फीस रोकना न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। स्कूल की ओर से प्रॉस्पेक्टस में एडमिशन और रजिस्ट्रेशन शुल्क को नॉन-रिफंडेबल बताया गया था, लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसी शर्तें हर परिस्थिति में अंतिम नहीं मानी जा सकतीं।
हालांकि आयोग ने यह भी माना कि छात्र ने एक दिन कक्षा और बस सेवा का उपयोग किया था। इस आधार पर 5,750 रुपये मासिक व बस शुल्क लौटाने का दावा स्वीकार नहीं किया गया। आयोग ने कहा कि दाखिले के बाद सीट आरक्षित हो जाती है, जिससे स्कूल पर कुछ वित्तीय प्रभाव पड़ सकता है।
इसी कारण शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए केवल 35 हजार रुपये एडमिशन फीस लौटाने का आदेश दिया गया। उधर, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अस्सिटेंट रजिस्ट्रार नीरज वालिया का कहना है इस मामले में आयोग ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद ही अपना फैसला सुनाया है।