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Yamuna Nagar News: हड़ताली कर्मियों की तीन स्थानों पर एजेंसी के कर्मचारियों के साथ बहस
Sun, 10 May 2026 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 10 May 2026 12:23 AM IST
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पंचायत भवन के पास लगे कचरे के ढेर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के नौवें दिन शनिवार को कैंप क्षेत्र, जगाधरी वार्ड-सात और वार्ड-16 में। इस दौरान डोर-टू-डोर कूड़ा उठान में लगी एजेंसी के कर्मचारियों के साथ उनकी बहस हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि एजेंसी के कर्मचारी सड़क किनारे ही कूड़ा डालकर चले गए। इसके बाद क्षेत्र में गंदगी और बढ़ गई।
हालात ऐसे हैं कि मुख्य सड़कें, बाजार, कॉलोनियां और वार्ड जगह-जगह कूड़े के अंबार से पटे पड़े हैं। शहर की सुंदरता और स्वच्छता पर गंदगी का ग्रहण लग गया है। वहीं नगर निगम की ओर से एक तरफ स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियां की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर शहर में फैली गंदगी निगम की रैंकिंग पर असर डाल सकती है।
पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में नगर निगम यमुनानगर को देशभर में 47वां स्थान मिला था, लेकिन मौजूदा हालात को देखकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो इस बार निगम की रैंकिंग प्रभावित हो सकती है। शहर में करीब 1700 मीट्रिक टन कूड़ा बिखरा पड़ा है। कई स्थानों पर 150 फीट तक लंबे कूड़े के ढेर लग चुके हैं।
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रेलवे रोड, बस स्टैंड क्षेत्र, मॉडल टाउन, जगाधरी रोड, कैंप क्षेत्र और कई आवासीय इलाकों में हालात बेहद खराब हैं। जगह-जगह आधी सड़क तक कूड़ा फैला होने से वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। गंदगी और बदबू के कारण लोगों को मुंह पर कपड़ा रखकर निकलना पड़ रहा है। कई इलाकों में नालियां जाम होने लगी हैं, जिससे बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। आवारा पशु और कुत्ते कूड़े को इधर-उधर फैलाते दिखाई दे रहे हैं, जिससे स्थिति और गंभीर बनती जा रही है। ल
सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदार के सुपरवाइजर हड़ताल को कमजोर करने के लिए खुद कूड़ा उठवाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। वहीं नगर निगम की ओर से अब तक कूड़ा उठान के लिए कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि निगम अधिकारियों की ओर से सख्त कदम उठाने की चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन अधिकारियों को यह भी आशंका है कि ऐसा करने से कर्मचारी और भड़क सकते हैं।
उधर, शहरवासियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। जयपाल, राजिंद्र कुमार का कहना है कि सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। बाजारों और कॉलोनियों में बदबू के कारण दुकानदारों और राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कई स्थानों पर लोग खुद ही कूड़ा हटाने को मजबूर हो रहे हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम कभी भी शहर का दौरा कर सकती है। ऐसे में शहर की सड़कों पर फैला कचरा और बदहाल सफाई व्यवस्था निगम के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
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यमुनानगर। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के नौवें दिन शनिवार को कैंप क्षेत्र, जगाधरी वार्ड-सात और वार्ड-16 में। इस दौरान डोर-टू-डोर कूड़ा उठान में लगी एजेंसी के कर्मचारियों के साथ उनकी बहस हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि एजेंसी के कर्मचारी सड़क किनारे ही कूड़ा डालकर चले गए। इसके बाद क्षेत्र में गंदगी और बढ़ गई।
हालात ऐसे हैं कि मुख्य सड़कें, बाजार, कॉलोनियां और वार्ड जगह-जगह कूड़े के अंबार से पटे पड़े हैं। शहर की सुंदरता और स्वच्छता पर गंदगी का ग्रहण लग गया है। वहीं नगर निगम की ओर से एक तरफ स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियां की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर शहर में फैली गंदगी निगम की रैंकिंग पर असर डाल सकती है।
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पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में नगर निगम यमुनानगर को देशभर में 47वां स्थान मिला था, लेकिन मौजूदा हालात को देखकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो इस बार निगम की रैंकिंग प्रभावित हो सकती है। शहर में करीब 1700 मीट्रिक टन कूड़ा बिखरा पड़ा है। कई स्थानों पर 150 फीट तक लंबे कूड़े के ढेर लग चुके हैं।
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रेलवे रोड, बस स्टैंड क्षेत्र, मॉडल टाउन, जगाधरी रोड, कैंप क्षेत्र और कई आवासीय इलाकों में हालात बेहद खराब हैं। जगह-जगह आधी सड़क तक कूड़ा फैला होने से वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। गंदगी और बदबू के कारण लोगों को मुंह पर कपड़ा रखकर निकलना पड़ रहा है। कई इलाकों में नालियां जाम होने लगी हैं, जिससे बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। आवारा पशु और कुत्ते कूड़े को इधर-उधर फैलाते दिखाई दे रहे हैं, जिससे स्थिति और गंभीर बनती जा रही है। ल
सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदार के सुपरवाइजर हड़ताल को कमजोर करने के लिए खुद कूड़ा उठवाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। वहीं नगर निगम की ओर से अब तक कूड़ा उठान के लिए कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि निगम अधिकारियों की ओर से सख्त कदम उठाने की चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन अधिकारियों को यह भी आशंका है कि ऐसा करने से कर्मचारी और भड़क सकते हैं।
उधर, शहरवासियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। जयपाल, राजिंद्र कुमार का कहना है कि सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। बाजारों और कॉलोनियों में बदबू के कारण दुकानदारों और राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कई स्थानों पर लोग खुद ही कूड़ा हटाने को मजबूर हो रहे हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम कभी भी शहर का दौरा कर सकती है। ऐसे में शहर की सड़कों पर फैला कचरा और बदहाल सफाई व्यवस्था निगम के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

पंचायत भवन के पास लगे कचरे के ढेर। संवाद