{"_id":"67992ae19b5d71b1220e7f4a","slug":"special-importance-of-bathing-on-mauni-amavasya-trilok-yamuna-nagar-news-c-246-1-ymn1001-132213-2025-01-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौनी अमावस्या पर स्नान का विशेष महत्व : त्रिलोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौनी अमावस्या पर स्नान का विशेष महत्व : त्रिलोक
Wed, 29 Jan 2025 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 29 Jan 2025 12:37 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। प्रयागराज में चल रह महाकुंभ में चल रहे हवन यज्ञ में जिले के सूर्य कुंड मंदिर के गुरुकुल के विद्यार्थियों ने भी वहां जाकर हिस्सा लिया और आहुतियां डालीं। सूर्य कुंड मंदिर के आचार्य त्रिलोक महाराज ने बताया कि हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या के दिन होने वाले इस स्नान का विशेष महत्व है।
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाकुंभ के अमृत स्नान को अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना गया है। इस साल मौनी अमावस्या के दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इस दिन चंद्रमा और सूर्य मकर राशि में होंगे, जबकि गुरु वृषभ राशि में स्थित रहेंगे, जिससे इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान 29 जनवरी को होगा, जिसे अत्यधिक पुण्यदायक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि पितर इस दिन धरती पर आते हैं। श्रद्धालुओं को इस दिन संगम में स्नान के साथ पितरों का तर्पण और दान भी करना चाहिए। ग्रहों की स्थिति के अनुसार तय की गई अमृत स्नान की तिथियां अत्यंत शुभ मानी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यमुनानगर। प्रयागराज में चल रह महाकुंभ में चल रहे हवन यज्ञ में जिले के सूर्य कुंड मंदिर के गुरुकुल के विद्यार्थियों ने भी वहां जाकर हिस्सा लिया और आहुतियां डालीं। सूर्य कुंड मंदिर के आचार्य त्रिलोक महाराज ने बताया कि हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या के दिन होने वाले इस स्नान का विशेष महत्व है।
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाकुंभ के अमृत स्नान को अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना गया है। इस साल मौनी अमावस्या के दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इस दिन चंद्रमा और सूर्य मकर राशि में होंगे, जबकि गुरु वृषभ राशि में स्थित रहेंगे, जिससे इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
विज्ञापन
महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान 29 जनवरी को होगा, जिसे अत्यधिक पुण्यदायक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि पितर इस दिन धरती पर आते हैं। श्रद्धालुओं को इस दिन संगम में स्नान के साथ पितरों का तर्पण और दान भी करना चाहिए। ग्रहों की स्थिति के अनुसार तय की गई अमृत स्नान की तिथियां अत्यंत शुभ मानी जाती है।
विज्ञापन