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Yamuna Nagar News: औषधियों से तैयार स्याही से ढाई साल में लिखी गई श्रीरामचरितमानस
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राहुल शर्मा
यमुनानगर। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दो दिन बाद प्राण प्रतिष्ठा समारोह है। इसमें काफी रामभक्त जा रहे हैं या जाने की तैयारी में हैं। जो समारोह में नहीं जा रहे, उनमें काफी लोग श्रीराम व उनके नाम से जुड़े मंदिरों में दर्शन-पूजन का मन बना रहे हैं। इन्हीं में से एक अमादलपुर गांव का सूर्य कुंड मंदिर भी राम भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। जहां श्रीराम चरित मानस मंदिर है, जिसके अंदर चारों ओर दीवारें व बीच बने स्तंभ श्रीराम के आदर्श व मर्यादा के मार्ग दिखा रहे हैं। चूंकि इन दीवारों व स्तंभों पर संपूर्ण श्रीराम चरित मानस अंकित है, जो 15 वर्ष पहले राजस्थान के व्यक्ति ने हाथों से ढाई वर्षों में लिखी थी। इसमें आम की लकड़ी से बनी कलम व औषधियों से तैयार स्याही इस्तेमाल हुई। मंदिर की एक और खास बात इसे श्रीराम नाम से जोड़ती है, वह है यहां गत 27 वर्षों से चल रहा अखंड श्रीराम चरित मानस पाठ, जिसमें चार ब्राह्मण तीन-तीन घंटे पाठ करते हैं। इसमें अब तक विभिन्न प्रदेशों के सैकड़ों ब्राह्मण पाठ कर चुके हैं।
सूर्यकुंड मंदिर में यज्ञ एवं पूजन कार्य देख रहे आचार्य त्रिलोक महाराज ने बताया कि वर्ष 2008 में श्रीराम चरित मानस मंदिर बनकर तैयार हुआ। जिसके द्वार पर श्रीराम जन्म सहित उनके केवट, जटायु, शबरी, भरत के साथ संवाद सहित श्रीराम राज अभिषेक के चित्र सहित हनुमान चालीसा व अन्य चौपाइयां अंकित हैं। मंदिर निर्माण के समय पीठाधीश्वर अखिलानंद ब्रह्मचारी थे। उस दौरान वर्ष 2005 में राजस्थान से पांच लोग बुलाए, जिनमें एक व्यक्ति ने आम की कलम व औषधियों से तैयार स्याही से श्रीरामचरितमानस लिखी, वहीं अन्य चार लोग मदद में रहे। इन पांच लोगों सहित मंदिर प्रबंधन की ढाई वर्षों की मेहनत से संपूर्ण श्रीरामचरितमानस को यहां बने श्रीराम चरित मानस मंदिर की दीवारों व स्तंभों पर अंकित किया गया। अभी तक पता चला है कि देश में केवल दो ही ऐसे मंदिर हैं, जहां इस तरह हस्तलिखित श्रीरामचरितमानस अंकित है। इसमें एक हरिद्वार का श्री तुलसी मानस मंदिर है तो दूसरा अमादलपुर के सूर्य कुंड मंदिर में बना श्रीराम चरित मानस मंदिर है। इसमें श्रीराम दरबार व शेरावाली माता की प्रतिमाएं भी हैं। मंदिर की यह विशेषता पता लगने पर विभिन्न प्रदेशों से श्रद्धालु मंदिर के दर्शन व परिक्रमा करने आते हैं। मंदिर के मौजूदा पीठाधीश्वर डॉ. गुणप्रकाश चैतन्य महाराज हैं, वहीं पुजारी सुरेश, व्यवस्था प्रमुख राज चैतन्य महाराज हैं। मंदिर की देखरेख स्वामी करपात्री फाउंडेशन कर रही है।
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यमुनानगर। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दो दिन बाद प्राण प्रतिष्ठा समारोह है। इसमें काफी रामभक्त जा रहे हैं या जाने की तैयारी में हैं। जो समारोह में नहीं जा रहे, उनमें काफी लोग श्रीराम व उनके नाम से जुड़े मंदिरों में दर्शन-पूजन का मन बना रहे हैं। इन्हीं में से एक अमादलपुर गांव का सूर्य कुंड मंदिर भी राम भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। जहां श्रीराम चरित मानस मंदिर है, जिसके अंदर चारों ओर दीवारें व बीच बने स्तंभ श्रीराम के आदर्श व मर्यादा के मार्ग दिखा रहे हैं। चूंकि इन दीवारों व स्तंभों पर संपूर्ण श्रीराम चरित मानस अंकित है, जो 15 वर्ष पहले राजस्थान के व्यक्ति ने हाथों से ढाई वर्षों में लिखी थी। इसमें आम की लकड़ी से बनी कलम व औषधियों से तैयार स्याही इस्तेमाल हुई। मंदिर की एक और खास बात इसे श्रीराम नाम से जोड़ती है, वह है यहां गत 27 वर्षों से चल रहा अखंड श्रीराम चरित मानस पाठ, जिसमें चार ब्राह्मण तीन-तीन घंटे पाठ करते हैं। इसमें अब तक विभिन्न प्रदेशों के सैकड़ों ब्राह्मण पाठ कर चुके हैं।
सूर्यकुंड मंदिर में यज्ञ एवं पूजन कार्य देख रहे आचार्य त्रिलोक महाराज ने बताया कि वर्ष 2008 में श्रीराम चरित मानस मंदिर बनकर तैयार हुआ। जिसके द्वार पर श्रीराम जन्म सहित उनके केवट, जटायु, शबरी, भरत के साथ संवाद सहित श्रीराम राज अभिषेक के चित्र सहित हनुमान चालीसा व अन्य चौपाइयां अंकित हैं। मंदिर निर्माण के समय पीठाधीश्वर अखिलानंद ब्रह्मचारी थे। उस दौरान वर्ष 2005 में राजस्थान से पांच लोग बुलाए, जिनमें एक व्यक्ति ने आम की कलम व औषधियों से तैयार स्याही से श्रीरामचरितमानस लिखी, वहीं अन्य चार लोग मदद में रहे। इन पांच लोगों सहित मंदिर प्रबंधन की ढाई वर्षों की मेहनत से संपूर्ण श्रीरामचरितमानस को यहां बने श्रीराम चरित मानस मंदिर की दीवारों व स्तंभों पर अंकित किया गया। अभी तक पता चला है कि देश में केवल दो ही ऐसे मंदिर हैं, जहां इस तरह हस्तलिखित श्रीरामचरितमानस अंकित है। इसमें एक हरिद्वार का श्री तुलसी मानस मंदिर है तो दूसरा अमादलपुर के सूर्य कुंड मंदिर में बना श्रीराम चरित मानस मंदिर है। इसमें श्रीराम दरबार व शेरावाली माता की प्रतिमाएं भी हैं। मंदिर की यह विशेषता पता लगने पर विभिन्न प्रदेशों से श्रद्धालु मंदिर के दर्शन व परिक्रमा करने आते हैं। मंदिर के मौजूदा पीठाधीश्वर डॉ. गुणप्रकाश चैतन्य महाराज हैं, वहीं पुजारी सुरेश, व्यवस्था प्रमुख राज चैतन्य महाराज हैं। मंदिर की देखरेख स्वामी करपात्री फाउंडेशन कर रही है।
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