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मिड-डे मील के दाल-चावल में परोसी चूहे की बीट
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Wed, 07 Oct 2015 12:00 AM IST
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सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना में स्वच्छ व पौष्टिक आहार के नाम पर बच्चों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। एक स्कूल के मिड-डे मील के दाल-चावल में चूहे की बीट मिली है। खिजराबाद के गांव अराईयावाला स्थित राजकीय उच्च विद्यालय में विद्यार्थियों को दोपहर में दिए दाल-चावल में चूहे की बीट भी परोस दी गईं।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब तीसरी कक्षा की छात्रा दोपहर के खाने को घर ले आई। परिजनों ने जब दाल-चावल को देखा तो उसमें चूहे की बीट मिलीं। अभिभावकों ने स्कूल में खराब खाना परोसे जाने पर रोष जताया और इस शिक्षा विभाग से इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग की।
अराईयांवाला के प्रेम ने बताया कि उनकी बेटी पलक गांव के राजकीय उच्च स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ती है। सोमवार को उनकी बेटी स्कूल गई थी, जहां दोपहर में मिले मिड-डे मील के दाल-चावल वह अपने साथ घर ले आई। वह स्वयं दाल-चावल खाने लगे तो उन्हें उसके बीच काले रंग का कुछ पदार्थ नजर आया।
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जांच की गई तो वह चूहे की बीट थी। यह देख उनके होश उड़ गए और उन्होंने खाना तुरंत फेंक दिया। इसको लेकर वह स्कूल में शिकायत करने गए, लेकिन छुट्टी होने के कारण उन्हें स्कूल में कोई नहीं मिला। उन्होंने इस बारे में ग्रामीणों व स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के घर पर उनके परिजनों को बताया।
काफी विद्यार्थियों ने खाना खाया
गांव की पलक द्वारा स्कूल से घर लाए गए मिड-डे मील के दाल-चावल में चूहे की बीट मिलने की खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई। इस पर स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों की चिंता बढ गई क्योंकि पलक खाना घर ले आई, किंतु काफी विद्यार्थियों ने स्कूल में खाना खाया है। उन्हें डर सताने लगा है कि छात्र-छात्राओं द्वारा खाए गए दोपहर के भोजन में चूहे की बीट न हों, जिससे उनकी सेहत पर असर पड़े। अभिभावकों में स्कूल स्टाफ और मिड-डे मील बनाने वालों के प्रति रोष है।
ग्रामीण राजिंद्र कुमार, राजबीर, सागर, गुरदास ने कहा कि स्कूल में खाना बनाते समय सावधानी बरतनी चाहिए। जबकि इसके विपरीत स्कूलों में बनने वाले मिड-डे मील को बनाने में लापरवाही बरती जा रही है। राजकीय स्कूल में चूहे की बीट मिले दाल चावल बच्चों को परोस दिए गए। इससे साफ है कि खाना बनाने वाले और देखरेख करने वाले बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति कितने चिंतित हैं। यह मामला बच्ची के खाना घर ले आने पर उजागर हो गया। न जाने ऐसे ही कितनी बार इसी लापरवाही में स्कूली बच्चों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। विभागीय अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
स्वास्थ्य के लिए खतरनाक
एक निजी चिकित्सक ने बताया कि छोटे बच्चों के खानपान का ध्यान रखना चाहिए। लोग घर में चूहे को मारने के लिए तरह-तरह के कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं, तो चूहा उनको खाता है। वहीं कीटनाशक या जहर चूहा अपने मल से बाहर निकाल देता है और यदि वही मल खाने में मिल जाए तो इससे स्वास्थ्य खासकर छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है, तो गलत है, जांच करने के निर्देश देंगे। सभी स्कूलों को बच्चों को स्वच्छ मिड-डे मील परोसे जाने के निर्देश दिए हैं। कहीं कोई लापरवाही बरती जा रही है, तो जांच कर कार्रवाई करेंगे।
अशोक धीमान, खंड शिक्षा अधिकारी, खिजराबाद।
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मामले का खुलासा तब हुआ, जब तीसरी कक्षा की छात्रा दोपहर के खाने को घर ले आई। परिजनों ने जब दाल-चावल को देखा तो उसमें चूहे की बीट मिलीं। अभिभावकों ने स्कूल में खराब खाना परोसे जाने पर रोष जताया और इस शिक्षा विभाग से इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग की।
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अराईयांवाला के प्रेम ने बताया कि उनकी बेटी पलक गांव के राजकीय उच्च स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ती है। सोमवार को उनकी बेटी स्कूल गई थी, जहां दोपहर में मिले मिड-डे मील के दाल-चावल वह अपने साथ घर ले आई। वह स्वयं दाल-चावल खाने लगे तो उन्हें उसके बीच काले रंग का कुछ पदार्थ नजर आया।
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जांच की गई तो वह चूहे की बीट थी। यह देख उनके होश उड़ गए और उन्होंने खाना तुरंत फेंक दिया। इसको लेकर वह स्कूल में शिकायत करने गए, लेकिन छुट्टी होने के कारण उन्हें स्कूल में कोई नहीं मिला। उन्होंने इस बारे में ग्रामीणों व स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के घर पर उनके परिजनों को बताया।
काफी विद्यार्थियों ने खाना खाया
गांव की पलक द्वारा स्कूल से घर लाए गए मिड-डे मील के दाल-चावल में चूहे की बीट मिलने की खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई। इस पर स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों की चिंता बढ गई क्योंकि पलक खाना घर ले आई, किंतु काफी विद्यार्थियों ने स्कूल में खाना खाया है। उन्हें डर सताने लगा है कि छात्र-छात्राओं द्वारा खाए गए दोपहर के भोजन में चूहे की बीट न हों, जिससे उनकी सेहत पर असर पड़े। अभिभावकों में स्कूल स्टाफ और मिड-डे मील बनाने वालों के प्रति रोष है।
ग्रामीण राजिंद्र कुमार, राजबीर, सागर, गुरदास ने कहा कि स्कूल में खाना बनाते समय सावधानी बरतनी चाहिए। जबकि इसके विपरीत स्कूलों में बनने वाले मिड-डे मील को बनाने में लापरवाही बरती जा रही है। राजकीय स्कूल में चूहे की बीट मिले दाल चावल बच्चों को परोस दिए गए। इससे साफ है कि खाना बनाने वाले और देखरेख करने वाले बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति कितने चिंतित हैं। यह मामला बच्ची के खाना घर ले आने पर उजागर हो गया। न जाने ऐसे ही कितनी बार इसी लापरवाही में स्कूली बच्चों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। विभागीय अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
स्वास्थ्य के लिए खतरनाक
एक निजी चिकित्सक ने बताया कि छोटे बच्चों के खानपान का ध्यान रखना चाहिए। लोग घर में चूहे को मारने के लिए तरह-तरह के कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं, तो चूहा उनको खाता है। वहीं कीटनाशक या जहर चूहा अपने मल से बाहर निकाल देता है और यदि वही मल खाने में मिल जाए तो इससे स्वास्थ्य खासकर छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है, तो गलत है, जांच करने के निर्देश देंगे। सभी स्कूलों को बच्चों को स्वच्छ मिड-डे मील परोसे जाने के निर्देश दिए हैं। कहीं कोई लापरवाही बरती जा रही है, तो जांच कर कार्रवाई करेंगे।
अशोक धीमान, खंड शिक्षा अधिकारी, खिजराबाद।