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सैट परीक्षा सिर पर, नहीं मिली किताबें, अध्यापक भी हो रहे परेशान
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यमुनानगर। विद्यार्थियों का बौद्धिक स्तर जानने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से एक अगस्त से स्कूलों में सैट परीक्षाएं करवाई जा रही हैं। परीक्षा का शेड्यूल जारी हो गया है और अध्यापकों को इसकी तैयारी के लिए विभागीय आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। परीक्षा में मात्र एक सप्ताह का समय शेष है, लेकिन तैयारी करने के लिए विद्यार्थियों के पास पुस्तकें नहीं हैं। ऐसे में इस बार विद्यार्थियों को बिना तैयारी के ही परीक्षा देनी होगी।
उल्लेखनीय है कि निदेशालय की ओर से ग्रीष्मकालीन अवकाश तक किताबें पहुंचाने संबंधी पत्र जारी किया गया था, जिसमें अध्यापकों को शाम पांच बजे तक स्कूल खोलने के निर्देश दिए गए थे। प्रभारियों ने आदेशानुसार ग्रीष्मकालीन अवकाश में शाम पांच बजे तक स्कूल खोले, लेकिन पुस्तकें नहीं पहुंची। जुलाई माह में भी अब केवल नौ दिन बचे हैं। ऐसे में अध्यापकों को विद्यार्थियों के भविष्य की चिंता सता रही है। इसे लेकर शिक्षक राजकीय अध्यापक संघ के बैनर तले वीरवार को जिला शिक्षा अधिकारी से मिले। यहां उन्होंने विद्यार्थियों के भविष्य का हवाला देते हुए पुस्तकों की मांग की।
अध्यापकों का नेतृत्व जिला प्रधान महेंद्र सिंह कलेर ने किया। प्रतिनिधिमंडल में राज्य चेयरमैन यशपाल ढांडा, राकेश गुप्ता, पूर्व राज्य प्रधान प्रदीप सरीन, जिला महासचिव खेमलाल और राज्य कोषाध्यक्ष विनोद जिंदल शामिल रहे। यहां अध्यापकों ने कहा कि बिना पुस्तकें विद्यार्थियों का प्रदर्शन अच्छा नहीं होगा। वे अपने स्तर पर प्रयास कर चुके हैं और विद्यार्थियों को अभ्यास और पढ़ने के लिए किताबों की जरूरत है। जिला शिक्षा अधिकारी प्रेम सिंह पुनिया ने अध्यापकों की मांगें पूरी करवाने का आश्वासन दिया। यहां अध्यापकों व जिला शिक्षा अधिकारी ने कार्यालय में प्रांगण में रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस दौरान जगाधरी प्रधान दर्शनलाल बवेजा, छछरौली प्रधान सुदेश कुमार, बिलासपुर प्रधान संजीव कुमार, सरस्वती नगर प्रधान मनोज कुमार, सूरजभान सैनी, उपप्रधान राजेश कश्यप, प्रीतम पंवार, अनिल कांबोज, सुनील शास्त्री, रिंकू सहित अन्य उपस्थित रहे।
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इन समस्याओं पर भी अध्यापकों ने की चर्चा
जिला शिक्षा अधिकारी से मुलाकात के दौरान अध्यापकों ने अपनी समस्याओं के बारे में भी बताया। इनमें एसीपी केस के मामलों पर बार-बार ऑब्जेक्शन लगाना, एमआईएस पोर्टल संबंधी मामले, स्कूलों के जर्जर भवन से जुड़ी समस्या, मुख्यमंत्री स्कूल सुंदरीकरण प्रतियोगिताएं करवाना और उनके परिणाम समय पर जारी करना, मिड डे मील की कुकिंग कॉस्ट बढ़ाने के लिए विभाग को लिखना, एलटीसी, मेडिकल बिल, बिजली बिल इत्यादि मामले रखे। जिस पर डीईओ प्रेम सिंह पूनिया ने अपने स्तर की समस्याओं के समाधान और निदेशालय स्तर के मामलों में पत्राचार करने का आश्वासन दिया।
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उल्लेखनीय है कि निदेशालय की ओर से ग्रीष्मकालीन अवकाश तक किताबें पहुंचाने संबंधी पत्र जारी किया गया था, जिसमें अध्यापकों को शाम पांच बजे तक स्कूल खोलने के निर्देश दिए गए थे। प्रभारियों ने आदेशानुसार ग्रीष्मकालीन अवकाश में शाम पांच बजे तक स्कूल खोले, लेकिन पुस्तकें नहीं पहुंची। जुलाई माह में भी अब केवल नौ दिन बचे हैं। ऐसे में अध्यापकों को विद्यार्थियों के भविष्य की चिंता सता रही है। इसे लेकर शिक्षक राजकीय अध्यापक संघ के बैनर तले वीरवार को जिला शिक्षा अधिकारी से मिले। यहां उन्होंने विद्यार्थियों के भविष्य का हवाला देते हुए पुस्तकों की मांग की।
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अध्यापकों का नेतृत्व जिला प्रधान महेंद्र सिंह कलेर ने किया। प्रतिनिधिमंडल में राज्य चेयरमैन यशपाल ढांडा, राकेश गुप्ता, पूर्व राज्य प्रधान प्रदीप सरीन, जिला महासचिव खेमलाल और राज्य कोषाध्यक्ष विनोद जिंदल शामिल रहे। यहां अध्यापकों ने कहा कि बिना पुस्तकें विद्यार्थियों का प्रदर्शन अच्छा नहीं होगा। वे अपने स्तर पर प्रयास कर चुके हैं और विद्यार्थियों को अभ्यास और पढ़ने के लिए किताबों की जरूरत है। जिला शिक्षा अधिकारी प्रेम सिंह पुनिया ने अध्यापकों की मांगें पूरी करवाने का आश्वासन दिया। यहां अध्यापकों व जिला शिक्षा अधिकारी ने कार्यालय में प्रांगण में रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस दौरान जगाधरी प्रधान दर्शनलाल बवेजा, छछरौली प्रधान सुदेश कुमार, बिलासपुर प्रधान संजीव कुमार, सरस्वती नगर प्रधान मनोज कुमार, सूरजभान सैनी, उपप्रधान राजेश कश्यप, प्रीतम पंवार, अनिल कांबोज, सुनील शास्त्री, रिंकू सहित अन्य उपस्थित रहे।
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इन समस्याओं पर भी अध्यापकों ने की चर्चा
जिला शिक्षा अधिकारी से मुलाकात के दौरान अध्यापकों ने अपनी समस्याओं के बारे में भी बताया। इनमें एसीपी केस के मामलों पर बार-बार ऑब्जेक्शन लगाना, एमआईएस पोर्टल संबंधी मामले, स्कूलों के जर्जर भवन से जुड़ी समस्या, मुख्यमंत्री स्कूल सुंदरीकरण प्रतियोगिताएं करवाना और उनके परिणाम समय पर जारी करना, मिड डे मील की कुकिंग कॉस्ट बढ़ाने के लिए विभाग को लिखना, एलटीसी, मेडिकल बिल, बिजली बिल इत्यादि मामले रखे। जिस पर डीईओ प्रेम सिंह पूनिया ने अपने स्तर की समस्याओं के समाधान और निदेशालय स्तर के मामलों में पत्राचार करने का आश्वासन दिया।