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भक्ति से मोक्ष की प्राप्ति संभव : कृष्ण शास्त्री
Wed, 07 Jan 2026 12:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 07 Jan 2026 12:10 AM IST
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व्यासपुर में कथा सुनाते गौरव कृष्ण शास्त्री। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। कस्बा के श्री खेड़ा मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक गौरव कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को भरत और अजामिल की प्रेरणादायक कथाएं संगीतमय ढंग से सुनाईं। प्रवचन में उन्होंने कहा कि परमात्मा की भक्ति से मोक्ष पाना संभव है।
उनहोंनने बताया कि किस प्रकार महाराज भरत पूर्व जन्म में महान तपस्वी थे, किंतु मृग के प्रति आसक्ति के कारण उन्हें पुनर्जन्म लेना पड़ा। जड़ भरत ने सांसारिक दिखावे से दूर रहकर आत्मज्ञान और वैराग्य का मार्ग अपनाया। मनुष्य को अपने जीवन में मोह और आसक्ति से बचते हुए परमात्मा की भक्ति में लीन रहना चाहिए, तभी मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
कथा वाचक ने बताया कि अजामिल अपने जीवन में अनेक पाप कर्मों में लिप्त हो गया था, लेकिन अंत समय में नारायण नाम का स्मरण करने मात्र से उसके प्राणों की रक्षा हुई। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने नाम-स्मरण की महिमा को बताते हुए कहा कि भगवान का नाम अत्यंत शक्तिशाली है और सच्चे मन से लिया गया प्रभु का नाम जीवन की दिशा बदल सकता है।
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कथा में विष्णु दूतों और यमदूतों का संवाद प्रस्तुत किया गया, श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण करते रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। सेविका वंदना गर्ग एवं योगिता गर्ग ने कथा आयोजन में सहयोग करने वाले सभी भक्तों का आभार व्यक्त किया और बताया कि यह कथा मानव जीवन को सही मार्ग दिखाने का कार्य करती है। कथा के समापन पर आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
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व्यासपुर। कस्बा के श्री खेड़ा मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक गौरव कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को भरत और अजामिल की प्रेरणादायक कथाएं संगीतमय ढंग से सुनाईं। प्रवचन में उन्होंने कहा कि परमात्मा की भक्ति से मोक्ष पाना संभव है।
उनहोंनने बताया कि किस प्रकार महाराज भरत पूर्व जन्म में महान तपस्वी थे, किंतु मृग के प्रति आसक्ति के कारण उन्हें पुनर्जन्म लेना पड़ा। जड़ भरत ने सांसारिक दिखावे से दूर रहकर आत्मज्ञान और वैराग्य का मार्ग अपनाया। मनुष्य को अपने जीवन में मोह और आसक्ति से बचते हुए परमात्मा की भक्ति में लीन रहना चाहिए, तभी मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
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कथा वाचक ने बताया कि अजामिल अपने जीवन में अनेक पाप कर्मों में लिप्त हो गया था, लेकिन अंत समय में नारायण नाम का स्मरण करने मात्र से उसके प्राणों की रक्षा हुई। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने नाम-स्मरण की महिमा को बताते हुए कहा कि भगवान का नाम अत्यंत शक्तिशाली है और सच्चे मन से लिया गया प्रभु का नाम जीवन की दिशा बदल सकता है।
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कथा में विष्णु दूतों और यमदूतों का संवाद प्रस्तुत किया गया, श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण करते रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। सेविका वंदना गर्ग एवं योगिता गर्ग ने कथा आयोजन में सहयोग करने वाले सभी भक्तों का आभार व्यक्त किया और बताया कि यह कथा मानव जीवन को सही मार्ग दिखाने का कार्य करती है। कथा के समापन पर आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।