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हाईवे जाम, सरकार को पंद्रह दिन का अल्टीमेटम
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Sun, 22 Nov 2015 12:13 AM IST
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पॉप्लर रेट को लेकर माह भर पहले हुआ समझौता लागू न होने पर किसान भड़क गए। भाकियू के बैनर तले नेशनल हाईवे 73 पर करीब सवा एक घंटे तक जाम लगाए रखा। मौके पर आए एसडीएम प्रेमचंद व डीएसपी जगाधरी ने किसानों की मांगों को पूरा करवाने के लिए 15 दिन का समय मांगा। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया तो वे 14 दिसंबर को जगाधरी अनाजमंडी में महापंचायत कर प्रशासन व सरकार के साथ आरपार की लड़ाई लड़ेंगे।
भारतीय किसान यूनियन और भारतीय किसान संघ की शनिवार सुबह 11 बजे किसान भवन में किसान पंचायत हुई। यूनियन ने समझौते को लागू नहीं करवाने में प्रशासन व सरकार पर ढील बरतने का आरोप लगाया। भारतीय किसान यूनियन के पक्ष के सभी किसान पंचायत से उठकर करीब साढ़े 12 बजे चंडीगढ़-रुड़की नेशनल हाईवे 73 पर आ गए।
दोपहर 12.35 बजे किसान नेशनल हाईवे के बीच बैठ गए और सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
किसानों ने विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल गुर्जर और यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
जाम की सूचना मिलने पर एसडीएम प्रेमचंद, तहसीलदार दर्शन सिंह, जगाधरी डीएसपी राजेंद्र कुमार, सिटी थाना यमुनानगर एसएचओ राजीव मिगलानी, सिटी थाना जगाधरी एसएचओ सुरेश पाल मौके पर पहुंचे। एसडीएम प्रेमचंद ने किसानों को 15 दिन में उनकी मांगों को पूरा करवाने का आश्वासन दिया। प्रदर्शन में भाकियू के प्रदेश संयोजक बाबूराम गुंदयाना, प्रदेश सचिव हरपाल सिंह, जिला प्रधान संजू गुंदयाना, मनमोहन सिंह, गुरमुख सिंह, राजकुमार के अलावा बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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आंदोलन छेड़ने वाले नहीं हुए जाम में शामिल
पॉप्लर रेट को लेकर भारतीय किसान संघ ने लगभग दो माह पूर्व आंदोलन छेड़ा था। संघ के पदाधिकारियों ने करीब डेढ़ माह पूर्व जिले की सीमाओं पर लकड़ी से भरी ट्रालियां रोकी थीं। इसके बाद भारतीय किसान यूनियन व अन्य किसान यूनियनों ने इनका समर्थन किया था लेकिन नेशनल हाईवे पर किसानों द्वारा लगाए गए जाम में केवल भाकियू के ही सदस्य दिखे, जबकि भाकिसं किसान भवन में बैठक करते रहे। भाकिसं के प्रधान रामबीर का कहना है कि बैठक में उन्होंने मांगे पूरी न होने पर 15 दिसंबर के बाद आंदोलन करने का निर्णय लिया था, जबकि किसान यूनियन ने नेशनल हाईवे पर जाम करने का निर्णय लिया, जिससे भाकिसं सहमत नहीं था।
यह था समझौता
पॉप्लर रेट को लेकर आठ अक्तूबर को पीडब्ल्यूडी रेस्टहाउस जगाधरी में विधानसभा स्पीकर और यमुनानगर विधायक ने किसानों, आढ़तियों व फैक्ट्री संचालकों के बीच त्रिपक्षीय बातचीत की। तीन मांगों पर सहमति बनी थी। समझौते के तहत अब आढ़ती किसान से कमीशन नहीं लेंगे। आढ़ती को कमीशन खरीददार देगा। इसी तरह किसान से माल पर कोई काट नहीं ली जाएगी। साथ ही खरीददार किसान को जे-फार्म या पक्का बिल देगा।
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भारतीय किसान यूनियन और भारतीय किसान संघ की शनिवार सुबह 11 बजे किसान भवन में किसान पंचायत हुई। यूनियन ने समझौते को लागू नहीं करवाने में प्रशासन व सरकार पर ढील बरतने का आरोप लगाया। भारतीय किसान यूनियन के पक्ष के सभी किसान पंचायत से उठकर करीब साढ़े 12 बजे चंडीगढ़-रुड़की नेशनल हाईवे 73 पर आ गए।
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दोपहर 12.35 बजे किसान नेशनल हाईवे के बीच बैठ गए और सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
किसानों ने विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल गुर्जर और यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
जाम की सूचना मिलने पर एसडीएम प्रेमचंद, तहसीलदार दर्शन सिंह, जगाधरी डीएसपी राजेंद्र कुमार, सिटी थाना यमुनानगर एसएचओ राजीव मिगलानी, सिटी थाना जगाधरी एसएचओ सुरेश पाल मौके पर पहुंचे। एसडीएम प्रेमचंद ने किसानों को 15 दिन में उनकी मांगों को पूरा करवाने का आश्वासन दिया। प्रदर्शन में भाकियू के प्रदेश संयोजक बाबूराम गुंदयाना, प्रदेश सचिव हरपाल सिंह, जिला प्रधान संजू गुंदयाना, मनमोहन सिंह, गुरमुख सिंह, राजकुमार के अलावा बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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आंदोलन छेड़ने वाले नहीं हुए जाम में शामिल
पॉप्लर रेट को लेकर भारतीय किसान संघ ने लगभग दो माह पूर्व आंदोलन छेड़ा था। संघ के पदाधिकारियों ने करीब डेढ़ माह पूर्व जिले की सीमाओं पर लकड़ी से भरी ट्रालियां रोकी थीं। इसके बाद भारतीय किसान यूनियन व अन्य किसान यूनियनों ने इनका समर्थन किया था लेकिन नेशनल हाईवे पर किसानों द्वारा लगाए गए जाम में केवल भाकियू के ही सदस्य दिखे, जबकि भाकिसं किसान भवन में बैठक करते रहे। भाकिसं के प्रधान रामबीर का कहना है कि बैठक में उन्होंने मांगे पूरी न होने पर 15 दिसंबर के बाद आंदोलन करने का निर्णय लिया था, जबकि किसान यूनियन ने नेशनल हाईवे पर जाम करने का निर्णय लिया, जिससे भाकिसं सहमत नहीं था।
यह था समझौता
पॉप्लर रेट को लेकर आठ अक्तूबर को पीडब्ल्यूडी रेस्टहाउस जगाधरी में विधानसभा स्पीकर और यमुनानगर विधायक ने किसानों, आढ़तियों व फैक्ट्री संचालकों के बीच त्रिपक्षीय बातचीत की। तीन मांगों पर सहमति बनी थी। समझौते के तहत अब आढ़ती किसान से कमीशन नहीं लेंगे। आढ़ती को कमीशन खरीददार देगा। इसी तरह किसान से माल पर कोई काट नहीं ली जाएगी। साथ ही खरीददार किसान को जे-फार्म या पक्का बिल देगा।