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Yamuna Nagar News: प्रधानमंत्री का अभियान लाया रंग, लिंगानुपात में पहले स्थान पर जिला
Wed, 22 Jan 2025 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 22 Jan 2025 01:17 AM IST
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राजेश कुमार
यमुनानगर। पानीपत की धरती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 22 जनवरी 2015 को शुरू किया गया बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान जिले में रंग लाया है। लिंगानुपात के मामले में यमुनानगर प्रदेश में टॉप पर है। जिले में 2024 में 1000 लड़कों के मुकाबले 939 लड़कियाें का जन्म हुआ। गत सात वर्षों में यह जिले का सबसे अधिक लिंगानुपात है।
वर्ष 2017 में जिले का लिंगानुपात 944 तक पहुंच गया था। ऐसे में वर्तमान में जो लिंगानुपात है उसमें और अधिक सुधार की जरूरत है। एक तरफ लिंगानुपात में सुधार हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ अभी भी ऐसे मामलों में की कमी नहीं है जहां मां खुद ही अपने नवजात बच्चों को मार रही है।
इस साल की शुरूआत में ही छह जनवरी को साढौरा की नकटी नदी में नवजात बच्चे को बोरी में बांध कर खुले में फेंक दिया था। बच्चा पहले से जिंदा था या फिर मरा हुआ इसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। जिस बोरी में बच्चा था उसके पास बेसहारा कुत्ते मंडरा रहे थे। वहां खेल रहे बच्चों ने मरे हुए बच्चे को नदी में दबा दिया था।
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बाद में पता चलने पर पुलिस ने बच्चे का शव नदी से निकलवाया था। लिंगानुपात में यमुनानगर को नंबर एक पर पहुंचाने में पलवल व पंचकूला भी बड़ा हाथ है। वर्ष 2023 में लिंगानुपात के मामले में यमुनानगर सातवें नंबर पर था। पलवल, पंचकूला, सिरसा, गुरुग्राम, फतेहाबाद, नूंह, जींद यमुनानगर से आगे थे।
तब पलवल लिंगानुपात 946 के साथ नंबर एक और पंचकूला 942 के साथ नंबर दो पर था। वर्ष 2024 जो आंकड़े सामने आए हैं, उसके अनुसार 13 जिलों के लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की गई है। इनमें पलवल का 946 से 909 व पंचकूला का 942 से 915 पर आ गया है। ऐसे में यदि इन दोनों के आंकड़ों में गिरावट नहीं आती तो जिला नंबर एक की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाता। संवाद
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यमुनानगर। पानीपत की धरती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 22 जनवरी 2015 को शुरू किया गया बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान जिले में रंग लाया है। लिंगानुपात के मामले में यमुनानगर प्रदेश में टॉप पर है। जिले में 2024 में 1000 लड़कों के मुकाबले 939 लड़कियाें का जन्म हुआ। गत सात वर्षों में यह जिले का सबसे अधिक लिंगानुपात है।
वर्ष 2017 में जिले का लिंगानुपात 944 तक पहुंच गया था। ऐसे में वर्तमान में जो लिंगानुपात है उसमें और अधिक सुधार की जरूरत है। एक तरफ लिंगानुपात में सुधार हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ अभी भी ऐसे मामलों में की कमी नहीं है जहां मां खुद ही अपने नवजात बच्चों को मार रही है।
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इस साल की शुरूआत में ही छह जनवरी को साढौरा की नकटी नदी में नवजात बच्चे को बोरी में बांध कर खुले में फेंक दिया था। बच्चा पहले से जिंदा था या फिर मरा हुआ इसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। जिस बोरी में बच्चा था उसके पास बेसहारा कुत्ते मंडरा रहे थे। वहां खेल रहे बच्चों ने मरे हुए बच्चे को नदी में दबा दिया था।
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बाद में पता चलने पर पुलिस ने बच्चे का शव नदी से निकलवाया था। लिंगानुपात में यमुनानगर को नंबर एक पर पहुंचाने में पलवल व पंचकूला भी बड़ा हाथ है। वर्ष 2023 में लिंगानुपात के मामले में यमुनानगर सातवें नंबर पर था। पलवल, पंचकूला, सिरसा, गुरुग्राम, फतेहाबाद, नूंह, जींद यमुनानगर से आगे थे।
तब पलवल लिंगानुपात 946 के साथ नंबर एक और पंचकूला 942 के साथ नंबर दो पर था। वर्ष 2024 जो आंकड़े सामने आए हैं, उसके अनुसार 13 जिलों के लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की गई है। इनमें पलवल का 946 से 909 व पंचकूला का 942 से 915 पर आ गया है। ऐसे में यदि इन दोनों के आंकड़ों में गिरावट नहीं आती तो जिला नंबर एक की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाता। संवाद