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किसान मायूस, नहीं हुई सरकारी खरीद
यमुनानगर
Updated Wed, 02 Oct 2013 05:01 PM IST
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खरीद एजेंसियों और राइस मिलर्स में एग्रीमेंट न होने के कारण क्षेत्र की अनाज मंडी में मंगलवार को धान की खरीद नहीं हो पाई।
गौरतलब है कि एक अक्तूबर को सरकारी खरीद का पहला दिन था। मंगलवार को पूरे दिन राइस मिलर्स और खरीद एजेंसी के अधिकारियों में बैठक चलती रही, लेकिन शाम तक कोई नतीजा नहीं निकला और किसानों को मायूसी हाथ लगी। मजबूरी में किसान को फसल औने पौने दाम पर बेचना पड़ा।
अब बुधवार को गांधी जयंती की छुट्टी होने पर बैंक बंद रहेंगे, जिससे एग्रीमेंट में यूज होने वाली एफडीआर नहीं बन पाएगी। इससे साफ है कि बुधवार को भी खरीद नहीं हो पाएगी।
राइस मिलर्स ने पैदा की दिक्कत
मंडी में धान की खरीद के बारे में मांगें पूरी न होने पर राइस मिलर्स पहले ही साफ कर चुके थे कि इस बार धान खरीद में उनका सहयोग खरीद एजेंसियों को नहीं मिलेगा।
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हालांकि समय रहते सरकार की ओर से राइस मिलर्स की मांगे मान ली गई हैं, लेकिन खरीद एजेंसियों के अधिकारी समय की नजाकत को नहीं समझ पाए और समय रहते उनसे तालमेल नहीं बैठा पाए और नतीजा किसान को भुगतना पड़ा।
इस तरह से होती है खरीद
यह सच है कि अगर राइस मिलर्स एजेंसियों का साथ देने से मना कर दे तो एजेंसियों के लिए बड़ी दिक्कत खड़ी हो जाती है। क्योंकि जहां खरीद एजेंसियों को करनी होती है, वहीं उठान का काम राइस मिलर्स का है। इसके लिए खरीद एजेंसी और मिलर्स की पॉलिसी बनती है।
जिसमें पहले मिलर्स को रजिस्ट्रेशन कराना होता है, और बाद में खरीद एजेंसी और मिलर्स के बीच एग्रीमेंट होता है। एग्रीमेंट होने तक एजेंसी की ओर से खरीद नहीं की जाती। हर मंडी में अलग-अगल मिलर्स की ओर से सीजन में एजेंसियों की खरीदी फसल को उठाया जाता है।
नहीं होगा उठान
राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान आरएस गर्ग ने बताया कि जब तक सभी मांगें नहीं मानी जाती हैं राइस मिलर्स खरीद एजेंसियों के साथ एग्रीमेंट नहीं करेंगे।
उनका कहना है कि पहले उन्हें पिछला बकाया और बोनस दिया जाए, तब ही उनकी ओर से एग्रीमेंट किया जाएगा। जिले में 90 राइस मिलर्स हैं। जोकि एकजुट हैं।
उन्होंने किसी भी हालत में एग्रीमेंट न करने के लिए बुधवार को मिलर्स एसोसिएशन की बैठक भी बुलाई गई है। गौरतलब कि सरकार की ओर से मिलर्स की कस्टम मिलिंग सिक्योरिटी 20 लाख से घटाकर पांच लाख रुपये की मंाग पहले ही मान ली गई है।
‘प्रयास जारी हैं’
हैफेड डीएम रजेश कुमार का कहना है कि एग्रीमेंट के लिए राइस मिलर्स मालिकों से बात चल रही है। जब तक एग्रीमेंट नहीं होता तब तक उनकी ओर से भी खरीद नहीं की जा सकती। उम्मीद है कि जल्द ही एग्रीमेंट हो जाएगा और मंडियों में धान की खरीद शुरू हो जाएगी।
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गौरतलब है कि एक अक्तूबर को सरकारी खरीद का पहला दिन था। मंगलवार को पूरे दिन राइस मिलर्स और खरीद एजेंसी के अधिकारियों में बैठक चलती रही, लेकिन शाम तक कोई नतीजा नहीं निकला और किसानों को मायूसी हाथ लगी। मजबूरी में किसान को फसल औने पौने दाम पर बेचना पड़ा।
अब बुधवार को गांधी जयंती की छुट्टी होने पर बैंक बंद रहेंगे, जिससे एग्रीमेंट में यूज होने वाली एफडीआर नहीं बन पाएगी। इससे साफ है कि बुधवार को भी खरीद नहीं हो पाएगी।
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राइस मिलर्स ने पैदा की दिक्कत
मंडी में धान की खरीद के बारे में मांगें पूरी न होने पर राइस मिलर्स पहले ही साफ कर चुके थे कि इस बार धान खरीद में उनका सहयोग खरीद एजेंसियों को नहीं मिलेगा।
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हालांकि समय रहते सरकार की ओर से राइस मिलर्स की मांगे मान ली गई हैं, लेकिन खरीद एजेंसियों के अधिकारी समय की नजाकत को नहीं समझ पाए और समय रहते उनसे तालमेल नहीं बैठा पाए और नतीजा किसान को भुगतना पड़ा।
इस तरह से होती है खरीद
यह सच है कि अगर राइस मिलर्स एजेंसियों का साथ देने से मना कर दे तो एजेंसियों के लिए बड़ी दिक्कत खड़ी हो जाती है। क्योंकि जहां खरीद एजेंसियों को करनी होती है, वहीं उठान का काम राइस मिलर्स का है। इसके लिए खरीद एजेंसी और मिलर्स की पॉलिसी बनती है।
जिसमें पहले मिलर्स को रजिस्ट्रेशन कराना होता है, और बाद में खरीद एजेंसी और मिलर्स के बीच एग्रीमेंट होता है। एग्रीमेंट होने तक एजेंसी की ओर से खरीद नहीं की जाती। हर मंडी में अलग-अगल मिलर्स की ओर से सीजन में एजेंसियों की खरीदी फसल को उठाया जाता है।
नहीं होगा उठान
राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान आरएस गर्ग ने बताया कि जब तक सभी मांगें नहीं मानी जाती हैं राइस मिलर्स खरीद एजेंसियों के साथ एग्रीमेंट नहीं करेंगे।
उनका कहना है कि पहले उन्हें पिछला बकाया और बोनस दिया जाए, तब ही उनकी ओर से एग्रीमेंट किया जाएगा। जिले में 90 राइस मिलर्स हैं। जोकि एकजुट हैं।
उन्होंने किसी भी हालत में एग्रीमेंट न करने के लिए बुधवार को मिलर्स एसोसिएशन की बैठक भी बुलाई गई है। गौरतलब कि सरकार की ओर से मिलर्स की कस्टम मिलिंग सिक्योरिटी 20 लाख से घटाकर पांच लाख रुपये की मंाग पहले ही मान ली गई है।
‘प्रयास जारी हैं’
हैफेड डीएम रजेश कुमार का कहना है कि एग्रीमेंट के लिए राइस मिलर्स मालिकों से बात चल रही है। जब तक एग्रीमेंट नहीं होता तब तक उनकी ओर से भी खरीद नहीं की जा सकती। उम्मीद है कि जल्द ही एग्रीमेंट हो जाएगा और मंडियों में धान की खरीद शुरू हो जाएगी।