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प्रेम और सद्भाव से ही शांति संभव : राजेंद्र दास
Tue, 06 Oct 2026 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 06 Oct 2026 12:49 AM IST
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व्यासपुर के काली माता मंदिर में में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। प्राचीन एवं प्रसिद्ध काली माता मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत के अंतिम दिन कथा व्यास राजेंद्र दास महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रेम, करुणा, भाईचारे और सद्भाव का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जो कार्य प्रेम के माध्यम से संभव है, वह हिंसा के माध्यम से कभी संभव नहीं हो सकता। मनुष्य को अपने जीवन में प्रेम और सद्भाव को प्राथमिकता देनी चाहिए।
कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता को सच्चे प्रेम, समानता और निस्वार्थ संबंधों की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता में धन-दौलत, ऊंच-नीच और सामाजिक भेदभाव का कोई स्थान नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा का जिस आत्मीयता से स्वागत किया, वह समाज को समानता और निस्वार्थ प्रेम की प्रेरणा देता है। श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन का मार्मिक प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर मनुष्य अपने आचरण को श्रेष्ठ बना सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से निष्काम भाव से कर्म करने का आह्वान किया और कहा कि यही एक अच्छे भक्त का लक्षण है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और सच्चे मन से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मन की व्यथा दूर होती है और हृदय को शांति मिलती है।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार कथा के आयोजन और श्रवण से पितरों की शांति व तृप्ति का भी महत्व है। भागवत कथा मनुष्य को सदाचार, भक्ति, त्याग, प्रेम और सेवा का मार्ग दिखाती है। कथा समापन पर मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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व्यासपुर। प्राचीन एवं प्रसिद्ध काली माता मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत के अंतिम दिन कथा व्यास राजेंद्र दास महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रेम, करुणा, भाईचारे और सद्भाव का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जो कार्य प्रेम के माध्यम से संभव है, वह हिंसा के माध्यम से कभी संभव नहीं हो सकता। मनुष्य को अपने जीवन में प्रेम और सद्भाव को प्राथमिकता देनी चाहिए।
कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता को सच्चे प्रेम, समानता और निस्वार्थ संबंधों की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता में धन-दौलत, ऊंच-नीच और सामाजिक भेदभाव का कोई स्थान नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा का जिस आत्मीयता से स्वागत किया, वह समाज को समानता और निस्वार्थ प्रेम की प्रेरणा देता है। श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन का मार्मिक प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
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उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर मनुष्य अपने आचरण को श्रेष्ठ बना सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से निष्काम भाव से कर्म करने का आह्वान किया और कहा कि यही एक अच्छे भक्त का लक्षण है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और सच्चे मन से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मन की व्यथा दूर होती है और हृदय को शांति मिलती है।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार कथा के आयोजन और श्रवण से पितरों की शांति व तृप्ति का भी महत्व है। भागवत कथा मनुष्य को सदाचार, भक्ति, त्याग, प्रेम और सेवा का मार्ग दिखाती है। कथा समापन पर मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।