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Yamuna Nagar News: आशा वर्करों ने मांगों के समर्थन में रोष प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
Tue, 06 Oct 2026 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 06 Oct 2026 01:30 AM IST
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एसडीएम को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपती यूनियन की पदाधिकारी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा ने सीटू जिला कमेटी के नेतृत्व में सोमवार को अपनी मांगों के समर्थन में रोष प्रदर्शन किया। चिल्ड्रन पार्क में एकत्रित हुई आशा वर्करों सरकार के खिलाफ नारेबाजी करती हुईं उपायुक्त कार्यालय पहुंचीं। यहां उपमंडल अधिकारी नागरिक को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
सीटू नेता रोशन लाल, शर्बती देवी, सर्व कर्मचारी संघ के राज्य प्रेस सचिव गुलशन भारद्वाज, सुनीता करेहड़ा और पूनम रानी ने कहा कि सरकार लगातार आशा वर्करों समेत परियोजना कर्मियों की मांगों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान आशा वर्करों ने अपनी और परिवार की जान जोखिम में डालकर स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बावजूद उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
यूनियन ने मांग की कि आशा, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, क्रेच सहित विभिन्न योजनाओं में कार्यरत परियोजना कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। जब तक यह दर्जा नहीं मिलता, तब तक न्यूनतम 42 हजार रुपये मासिक वेतन और सेवानिवृत्ति के बाद 21 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाए। इसके अलावा चार लेबर कोड रद्द करने की मांग भी उठाई गई।
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यूनियन ने कहा कि केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ने वर्ष 2025 में आशा वर्करों के मानदेय में 1500 रुपये बढ़ोतरी की घोषणा की थी, जिसे अब तक लागू नहीं किया गया। इसे तुरंत लागू करने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2023 में हुई राज्यव्यापी हड़ताल के दौरान फिक्स मानदेय और इंसेंटिव में की गई कटौती का पूरा भुगतान भी लंबित है।
स्वास्थ्य मंत्री के साथ बातचीत में 12 मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन उनका समाधान नहीं हुआ। यूनियन ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर एक से तीन दिसंबर तक दिल्ली में संसद घेराव किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि जिले से बड़ी संख्या में आशा वर्कर दिल्ली कूच करेंगी। साथ ही हरियाणा सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
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यमुनानगर। आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा ने सीटू जिला कमेटी के नेतृत्व में सोमवार को अपनी मांगों के समर्थन में रोष प्रदर्शन किया। चिल्ड्रन पार्क में एकत्रित हुई आशा वर्करों सरकार के खिलाफ नारेबाजी करती हुईं उपायुक्त कार्यालय पहुंचीं। यहां उपमंडल अधिकारी नागरिक को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
सीटू नेता रोशन लाल, शर्बती देवी, सर्व कर्मचारी संघ के राज्य प्रेस सचिव गुलशन भारद्वाज, सुनीता करेहड़ा और पूनम रानी ने कहा कि सरकार लगातार आशा वर्करों समेत परियोजना कर्मियों की मांगों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान आशा वर्करों ने अपनी और परिवार की जान जोखिम में डालकर स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बावजूद उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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यूनियन ने मांग की कि आशा, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, क्रेच सहित विभिन्न योजनाओं में कार्यरत परियोजना कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। जब तक यह दर्जा नहीं मिलता, तब तक न्यूनतम 42 हजार रुपये मासिक वेतन और सेवानिवृत्ति के बाद 21 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाए। इसके अलावा चार लेबर कोड रद्द करने की मांग भी उठाई गई।
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यूनियन ने कहा कि केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ने वर्ष 2025 में आशा वर्करों के मानदेय में 1500 रुपये बढ़ोतरी की घोषणा की थी, जिसे अब तक लागू नहीं किया गया। इसे तुरंत लागू करने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2023 में हुई राज्यव्यापी हड़ताल के दौरान फिक्स मानदेय और इंसेंटिव में की गई कटौती का पूरा भुगतान भी लंबित है।
स्वास्थ्य मंत्री के साथ बातचीत में 12 मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन उनका समाधान नहीं हुआ। यूनियन ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर एक से तीन दिसंबर तक दिल्ली में संसद घेराव किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि जिले से बड़ी संख्या में आशा वर्कर दिल्ली कूच करेंगी। साथ ही हरियाणा सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।