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पैरालिसिस के मरीज से ऐसी हरकत, सुनकर कांप जाए दिल
अमर उजाला, यमुनानगर
Updated Wed, 18 Sep 2013 01:25 AM IST
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हरियाणा के यमुनानगर में जगाधरी के सिविल अस्पताल में भर्ती एक पैरालिसिस के मरीज को अटेंडेंट न होने के चलते सरकारी एंबुलेंस में डालकर बिलासपुर में एक सुनसान स्थान पर फेंक दिया। पिछले तीन दिन से इस बुजुर्ग व्यक्ति को आसपास के लोग ही पानी और खाना दे रहे हैं।
वहीं, जब इस बारे में सीएमओ से बात की तो उन्होंने तुरंत आनन-फानन में एंबुलेंस भेजकर बुजुर्ग को वहां से उठवाकर बिलासपुर के अस्पताल में भर्ती कराया। साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कर आरोपी अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की भी बात कही।
कुछ लोगों ने बुजुर्ग सुखबीर को पैरालिसिस बीमारी और बेसहारा होने के कारण जगाधरी के सिविल अस्पताल में भर्ती करा गया था। बुजुर्ग को अस्पताल में भर्ती कराकर जहां उस व्यक्ति ने इंसानियत का धर्म अदा किया।
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वहीं, सिविल अस्पताल के स्टाफ और कर्मचारियों को बिना अटेंडेंट के भर्ती यह मरीज परेशानी का सबब बनता दिखाई देने लगा। इसी के चलते अस्पताल के कर्मचारी ने बिना किसी अटेंडेंट के अस्पताल में भर्ती सुखबीर को 15 सितंबर को डिस्चार्ज कर एंबुलेंस में बिलासपुर भेज दिया।
आरोप है कि एंबुलेंस के कर्मचारी ने भी बिलासपुर में एक सुनसान स्थान पर जाकर इस मरीज को उसके सामान के साथ सड़क किनारे उतार दिया। लोगों ने जब सड़क किनारे बुजुर्ग को पड़ा देखा तो मानवता के नाते उन्होंने उसे खाने-पीने का सामान दिया, जिससे वह जीवित रह सके।
आज खुद चलने-फिरने में लाचार और सही प्रकार बोल भी न पाने वाला सुखबीर सिंह कभी खादी आश्रम में काम करता था। इसके बाद दिल्ली में कुछ समय रहा, लेकिन फिर वह वापस आ गया। सुखबीर केवल इशारों में ही यह कह पाता है कि उसका इलाज नहीं किया गया।
बेहतर सुविधाएं देने का दावा फेल
लोगों को बेहतर व अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा स्वास्थ्य विभाग करता है, लेकिन जगाधरी सिविल अस्पताल के स्टाफ ने जो कुछ किया वह स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं पर सवाल उठा रहा है। यह घटना बताती है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी एक मरीज को लेकर कितने संवेदनशील हैं।
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वहीं, जब इस बारे में सीएमओ से बात की तो उन्होंने तुरंत आनन-फानन में एंबुलेंस भेजकर बुजुर्ग को वहां से उठवाकर बिलासपुर के अस्पताल में भर्ती कराया। साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कर आरोपी अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की भी बात कही।
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कुछ लोगों ने बुजुर्ग सुखबीर को पैरालिसिस बीमारी और बेसहारा होने के कारण जगाधरी के सिविल अस्पताल में भर्ती करा गया था। बुजुर्ग को अस्पताल में भर्ती कराकर जहां उस व्यक्ति ने इंसानियत का धर्म अदा किया।
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वहीं, सिविल अस्पताल के स्टाफ और कर्मचारियों को बिना अटेंडेंट के भर्ती यह मरीज परेशानी का सबब बनता दिखाई देने लगा। इसी के चलते अस्पताल के कर्मचारी ने बिना किसी अटेंडेंट के अस्पताल में भर्ती सुखबीर को 15 सितंबर को डिस्चार्ज कर एंबुलेंस में बिलासपुर भेज दिया।
आरोप है कि एंबुलेंस के कर्मचारी ने भी बिलासपुर में एक सुनसान स्थान पर जाकर इस मरीज को उसके सामान के साथ सड़क किनारे उतार दिया। लोगों ने जब सड़क किनारे बुजुर्ग को पड़ा देखा तो मानवता के नाते उन्होंने उसे खाने-पीने का सामान दिया, जिससे वह जीवित रह सके।
आज खुद चलने-फिरने में लाचार और सही प्रकार बोल भी न पाने वाला सुखबीर सिंह कभी खादी आश्रम में काम करता था। इसके बाद दिल्ली में कुछ समय रहा, लेकिन फिर वह वापस आ गया। सुखबीर केवल इशारों में ही यह कह पाता है कि उसका इलाज नहीं किया गया।
बेहतर सुविधाएं देने का दावा फेल
लोगों को बेहतर व अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा स्वास्थ्य विभाग करता है, लेकिन जगाधरी सिविल अस्पताल के स्टाफ ने जो कुछ किया वह स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं पर सवाल उठा रहा है। यह घटना बताती है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी एक मरीज को लेकर कितने संवेदनशील हैं।