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Yamuna Nagar News: प्रताड़ित महिलाओं के लिए सहारा बना वन स्टॉप सेंटर, सात वर्षों में पहुंचे 2812 मामले
Thu, 04 Jun 2026 03:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 04 Jun 2026 03:50 AM IST
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यमुनानगर में बना वन स्टॉप सेंटर। संवाद
अशोक कुमार
यमुनानगर। घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, यौन उत्पीड़न और मानसिक शोषण जैसी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर प्रभावी सहायता केंद्र के रूप में उभर रहा है। वर्ष 2019 से मई 2026 तक केंद्र में कुल 2812 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार की प्रताड़ना से जुड़ी शिकायतों का समाधान किया गया। महिला सुरक्षा और सहायता के लिए जिले में 12 सहायता केंद्र भी कार्यरत हैं।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में घरेलू हिंसा के 130 मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 89 रह गई। वर्ष 2026 में जून तक घरेलू हिंसा के 24 मामले दर्ज हुए हैं। वहीं जनवरी से मई 2026 के दौरान अन्य श्रेणियों को मिलाकर कुल 161 मामले केंद्र में पहुंचे हैं। अधिकारियों का मानना है कि जागरूकता, परामर्श और त्वरित सहायता के कारण महिलाओं को समय रहते मदद मिल रही है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी मिक्षा रंगा ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराना है। यहां पीड़ित महिलाओं को कानूनी परामर्श, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, पुलिस सहायता और चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाती है। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को अस्थायी आश्रय भी उपलब्ध कराया जाता है। घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, यौन शोषण या किसी अन्य प्रकार की प्रताड़ना का शिकार महिलाएं निःशुल्क सहायता प्राप्त कर सकती हैं। केंद्र महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ आत्मनिर्भर बनने के लिए भी प्रेरित करता है।
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वन स्टॉप सेंटर की कार्यवाहक केंद्रीय प्रबंधक बिंदू ऋषि ने बताया कि केंद्र में आने वाली महिलाओं को सामान्यतः पांच दिन तक सुरक्षित आश्रय दिया जाता है। इस दौरान उनकी काउंसलिंग कर समस्या के समाधान का प्रयास किया जाता है तथा आवश्यक होने पर कानूनी और प्रशासनिक सहायता भी उपलब्ध करवाई जाती है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने महिलाओं से अपील की है कि किसी भी प्रकार की प्रताड़ना की स्थिति में वे बिना झिझक वन स्टॉप सेंटर से संपर्क करें। केंद्र का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान, न्याय और आत्मविश्वास के साथ नई शुरुआत का अवसर प्रदान करना है। संवाद
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यमुनानगर। घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, यौन उत्पीड़न और मानसिक शोषण जैसी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर प्रभावी सहायता केंद्र के रूप में उभर रहा है। वर्ष 2019 से मई 2026 तक केंद्र में कुल 2812 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार की प्रताड़ना से जुड़ी शिकायतों का समाधान किया गया। महिला सुरक्षा और सहायता के लिए जिले में 12 सहायता केंद्र भी कार्यरत हैं।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में घरेलू हिंसा के 130 मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 89 रह गई। वर्ष 2026 में जून तक घरेलू हिंसा के 24 मामले दर्ज हुए हैं। वहीं जनवरी से मई 2026 के दौरान अन्य श्रेणियों को मिलाकर कुल 161 मामले केंद्र में पहुंचे हैं। अधिकारियों का मानना है कि जागरूकता, परामर्श और त्वरित सहायता के कारण महिलाओं को समय रहते मदद मिल रही है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी मिक्षा रंगा ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराना है। यहां पीड़ित महिलाओं को कानूनी परामर्श, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, पुलिस सहायता और चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाती है। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को अस्थायी आश्रय भी उपलब्ध कराया जाता है। घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, यौन शोषण या किसी अन्य प्रकार की प्रताड़ना का शिकार महिलाएं निःशुल्क सहायता प्राप्त कर सकती हैं। केंद्र महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ आत्मनिर्भर बनने के लिए भी प्रेरित करता है।
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वन स्टॉप सेंटर की कार्यवाहक केंद्रीय प्रबंधक बिंदू ऋषि ने बताया कि केंद्र में आने वाली महिलाओं को सामान्यतः पांच दिन तक सुरक्षित आश्रय दिया जाता है। इस दौरान उनकी काउंसलिंग कर समस्या के समाधान का प्रयास किया जाता है तथा आवश्यक होने पर कानूनी और प्रशासनिक सहायता भी उपलब्ध करवाई जाती है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने महिलाओं से अपील की है कि किसी भी प्रकार की प्रताड़ना की स्थिति में वे बिना झिझक वन स्टॉप सेंटर से संपर्क करें। केंद्र का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान, न्याय और आत्मविश्वास के साथ नई शुरुआत का अवसर प्रदान करना है। संवाद

यमुनानगर में बना वन स्टॉप सेंटर। संवाद

यमुनानगर में बना वन स्टॉप सेंटर। संवाद