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Yamuna Nagar News: ईएसआई अस्पताल में छह माह में नहीं हुआ एक भी प्रसव
Sat, 20 Jun 2026 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 20 Jun 2026 01:45 AM IST
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ईएसआई अस्पताल में बना प्रसूति कक्ष। संवाद
राजेश कुमार
यमुनानगर। ईएसआई अस्पताल जगाधरी की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल में पिछले वर्ष केवल 10 डिलीवरी हो सकीं। वर्ष 2026 के छह माह बीत में एक भी प्रसव नहीं हुआ है। गायनी विशेषज्ञ का न होने से गर्भवतियों को नागरिक अस्पताल रेफर किया जा रहा है या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
ईएसआई अस्पताल जगाधरी औद्योगिक क्षेत्र के हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए एकमात्र प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। विभिन्न उद्योगों और कारखानों में कार्यरत कर्मचारी हर माह अपने वेतन से ईएसआई अंशदान जमा करते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें और उनके परिजनों को निशुल्क एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
अस्पताल में नियमित गायनी विशेषज्ञ नहीं होने के कारण मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप पड़ी हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में पूरे साल के दौरान अस्पताल में केवल 10 डिलीवरी हुई थीं। यानि एक महीने में एक डिलीवरी भी नहीं हो रही। वहीं वर्ष 2026 के पहले छह माह में एक भी डिलीवरी नहीं हो सकी।
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फिलहाल अस्पताल में अनुबंध के आधार पर एक महिला डॉक्टर कार्यरत हैं। वह भी केवल दोपहर दो बजे तक ही महिलाओं की जांच कर पाती हैं। ऐसे में प्रसव जैसी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल से अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पाती। चिंता की बात यह भी है कि इसी वर्ष उनका अनुबंध भी समाप्त होने वाला है। संवाद
निजी अस्पताल में खर्च 15 से 30 हजार रुपये
गायनी विशेषज्ञ की अनुपलब्धता का सीधा असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। अस्पताल में प्रसव की सुविधा न मिलने के कारण अधिकांश गर्भवतियों को जिला नागरिक अस्पताल यमुनानगर या फिर उप जिला अस्पताल जगाधरी में भेजा जा रहा है। निजी अस्पतालों में सामान्य प्रसव पर औसतन 15 से 18 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ता है। सिजेरियन डिलीवरी की स्थिति में यह खर्च 25 से 30 हजार रुपये या उससे अधिक पहुंच जाता है। ऐसे में कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
फिर किस बात का ले रहे अंशदान : आशीष धीमान
भारतीय मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष आशीष धीमान का कहना है कि कर्मचारी वर्षों से नियमित रूप से ईएसआई अंशदान जमा कर रहे हैं। कई कर्मचारी अब तक हजारों रुपये का योगदान दे चुके हैं। जरूरत के समय उन्हें पूरी स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही। जब वे अग्रिम रूप से चिकित्सा सुरक्षा के लिए भुगतान कर रहे हैं तो अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। अस्पताल में प्रसव जैसी बुनियादी सुविधा ही उपलब्ध नहीं है तो इसका असर लाभार्थियों पर पड़ता है।
ईएसआई अस्पताल में गायनी डॉक्टर नहीं हैं। इससे इस साल एक भी डिलीवरी अस्पताल में नहीं हुई है। मजबूरी में महिलाओं को जिला अस्पताल में रेफर करते हैं। डॉक्टरों की कमी के बारे में मुख्यालय लिखा है। - डॉ. सुमन चौहान, एमएस, ईएसआई अस्पताल।
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यमुनानगर। ईएसआई अस्पताल जगाधरी की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल में पिछले वर्ष केवल 10 डिलीवरी हो सकीं। वर्ष 2026 के छह माह बीत में एक भी प्रसव नहीं हुआ है। गायनी विशेषज्ञ का न होने से गर्भवतियों को नागरिक अस्पताल रेफर किया जा रहा है या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
ईएसआई अस्पताल जगाधरी औद्योगिक क्षेत्र के हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए एकमात्र प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। विभिन्न उद्योगों और कारखानों में कार्यरत कर्मचारी हर माह अपने वेतन से ईएसआई अंशदान जमा करते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें और उनके परिजनों को निशुल्क एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
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अस्पताल में नियमित गायनी विशेषज्ञ नहीं होने के कारण मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप पड़ी हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में पूरे साल के दौरान अस्पताल में केवल 10 डिलीवरी हुई थीं। यानि एक महीने में एक डिलीवरी भी नहीं हो रही। वहीं वर्ष 2026 के पहले छह माह में एक भी डिलीवरी नहीं हो सकी।
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फिलहाल अस्पताल में अनुबंध के आधार पर एक महिला डॉक्टर कार्यरत हैं। वह भी केवल दोपहर दो बजे तक ही महिलाओं की जांच कर पाती हैं। ऐसे में प्रसव जैसी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल से अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पाती। चिंता की बात यह भी है कि इसी वर्ष उनका अनुबंध भी समाप्त होने वाला है। संवाद
निजी अस्पताल में खर्च 15 से 30 हजार रुपये
गायनी विशेषज्ञ की अनुपलब्धता का सीधा असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। अस्पताल में प्रसव की सुविधा न मिलने के कारण अधिकांश गर्भवतियों को जिला नागरिक अस्पताल यमुनानगर या फिर उप जिला अस्पताल जगाधरी में भेजा जा रहा है। निजी अस्पतालों में सामान्य प्रसव पर औसतन 15 से 18 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ता है। सिजेरियन डिलीवरी की स्थिति में यह खर्च 25 से 30 हजार रुपये या उससे अधिक पहुंच जाता है। ऐसे में कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
फिर किस बात का ले रहे अंशदान : आशीष धीमान
भारतीय मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष आशीष धीमान का कहना है कि कर्मचारी वर्षों से नियमित रूप से ईएसआई अंशदान जमा कर रहे हैं। कई कर्मचारी अब तक हजारों रुपये का योगदान दे चुके हैं। जरूरत के समय उन्हें पूरी स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही। जब वे अग्रिम रूप से चिकित्सा सुरक्षा के लिए भुगतान कर रहे हैं तो अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। अस्पताल में प्रसव जैसी बुनियादी सुविधा ही उपलब्ध नहीं है तो इसका असर लाभार्थियों पर पड़ता है।
ईएसआई अस्पताल में गायनी डॉक्टर नहीं हैं। इससे इस साल एक भी डिलीवरी अस्पताल में नहीं हुई है। मजबूरी में महिलाओं को जिला अस्पताल में रेफर करते हैं। डॉक्टरों की कमी के बारे में मुख्यालय लिखा है। - डॉ. सुमन चौहान, एमएस, ईएसआई अस्पताल।