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Yamuna Nagar News: मंडियों में नहीं हो रहा उठान, बारिश से भीगा 33 हजार एमटी धान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 01:01 AM IST
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No lifting of stocks from mandis; 33,000 MT of paddy soaked by rain.
जगाधरी अनाज मंडी में उठान न होने से डिवाइडर पर लगी धान से भरी बोरियां। संवाद - फोटो : 1
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। जिले की मंडियों में धान खरीद की धीमी रफ्तार के बीच मंगलवार रात हुई बारिश ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है। उठान नहीं होने के कारण मंडियों में खुले में पड़ा हजारों मीट्रिक टन धान बारिश की चपेट में आ गया। व्यासपुर, साढौरा और सरस्वतीनगर क्षेत्र की मंडियों में करीब 33 हजार मीट्रिक टन धान के भीगने की बात सामने आई है। जगाधरी मंडी में भी बूंदाबांदी से धान भीगा।
मंडियों में फड़ और सड़कों पर पहले से ही धान की बोरियां पड़ी होने के कारण किसानों को नई फसल उतारने के लिए जगह नहीं मिल रही है। किसानों को मजबूरी में खुले में धान डालना पड़ा। मंडियों में फसल को ढकने के लिए पर्याप्त तिरपाल और अन्य इंतजाम न होने से बारिश का पानी धान तक पहुंच गया। इस दौरान जिले में औसतन छह एमएम बारिश दर्ज की। किसानों का कहना है कि खेत से मंडी तक फसल पहुंचाने के बाद भी अगर खुले में रखे धान को बारिश से बचाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं तो उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिरने का खतरा बना रहता है।
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जिले की 13 मंडियों में अब तक 80,325 मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है, जबकि 45,532 मीट्रिक टन की खरीद की गई है। इसके मुकाबले अब तक महज 308 मीट्रिक टन धान का उठान हुआ है। यानी आवक और खरीद के मुकाबले उठान का प्रतिशत सिर्फ 0.49 है। उठान की धीमी रफ्तार के कारण मंडियों में धान लगातार जमा हो रहा है। फड़ पर जगह नहीं बचने के कारण कई जगह धान की बोरियां डिवाइडर और सड़कों के किनारे रखी जा रही हैं। किसानों को मंडी की सड़क पर ही धान की ट्रॉली खाली करनी पड़ रही है।
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तीन दिन बारिश का अलर्ट, बढ़ सकती है परेशानी
बुधवार सुबह बारिश के बाद कुछ समय के लिए मौसम साफ हुआ और हल्की धूप भी निकली, लेकिन मौसम विभाग ने जिले में शुक्रवार तक तेज बारिश और हवा चलने का पूर्वानुमान दिया है। ऐसे में मंडियों में खुले में पड़े धान के दोबारा भीगने का खतरा बना हुआ है। लगातार बारिश हुई तो मंडियों में पहले से जमा फसल के साथ-साथ धान की आवक और खरीद व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
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खेतों में भी रुकी धान की कटाई
बारिश का असर मंडियों तक सीमित नहीं रहा। जिले के कई क्षेत्रों में खेतों में खड़ी धान की फसल की कटाई भी प्रभावित हुई है। बारिश के बाद खेतों में नमी बढ़ने और मिट्टी गीली होने के कारण कंबाइन मशीनों का संचालन मुश्किल हो गया है। अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में किसान खेत सूखने का इंतजार कर रहे हैं। कटाई में देरी का असर आने वाले दिनों में मंडियों में धान की आवक पर भी पड़ सकता है। वहीं, खेत में खड़ी फसल में अधिक नमी रहने से दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने और मंडी में नमी के निर्धारित मानकों को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।

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मंडियों में उठान शुरू करवाया दिया गया है। इसमें अब तेजी लाई जा रही है। मंडियों में बारिश से फसल बचाने के लिए आढ़तियों को तिरपाल उपलब्ध करवाई गई है। सभी मंडियों में नहीं कुछ मंडियों में ही धान भीगा है। दोबारा ऐसा न हो इसकी व्यवस्था की जा रही है। - नीतिश सिंघला, जिला खाद्य आपूर्ति एवं नियंत्रक।

जगाधरी अनाज मंडी में उठान न होने से डिवाइडर पर लगी धान से भरी बोरियां। संवाद

जगाधरी अनाज मंडी में उठान न होने से डिवाइडर पर लगी धान से भरी बोरियां। संवाद- फोटो : 1

जगाधरी अनाज मंडी में उठान न होने से डिवाइडर पर लगी धान से भरी बोरियां। संवाद

जगाधरी अनाज मंडी में उठान न होने से डिवाइडर पर लगी धान से भरी बोरियां। संवाद- फोटो : 1

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