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शहनाइयों की गूंज के नीचे दबा सेंपलिंग अभियान
यमुनानगर
Updated Wed, 04 Dec 2013 04:21 PM IST
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शादियों का सीजन जोरों पर है। ऐसे में दूध, पनीर, मावा और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग आम दिनों की बजाए कई गुणा बढ़ गई है। मांग पूरा करने के लिए दुकानदार मिलावट करने से नहीं चुकते हैं।
लेकिन इन पर काबू पाने और लोगों को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की बजाय प्रशासनिक अधिकारी गहरी नींद में सोए हैं। फेस्टिवल सीजन में दो चार मिठाई की दुकानों पर खाद्य पदार्थों के सेंपल लेकर खानापूर्ति करने के बाद शादियों के सीजन में सेंपलिंग अभियान शहनाइयों और ढोल की धमक के नीचे दब गया है।
वहीं, दूसरी ओर अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी से बचते दिखाई दे रहे हैं। जिन अधिकारियों के कंधों पर सेंपलिंग की जिम्मेदारी है, वे उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सेंपलिंग करने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। इससे साफ है कि अधिकारी मिलावटखोरी पर काबू पाने के लिए कितने गंभीर है।
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फूड सेफ्टी अधिकारी तो सीएमओ की निर्देशों के बाद ही कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।
बड़ी मात्रा में होती है खपत
बात अगर इन दिनों दूध से बनने वाले पदार्थों की कि जाए तो शादियों के दिनों में इनकी खपत कई गुणा तक बढ़ जाती है। त्योहारों के सीजन में तो मिठाइयों और दूध से बने पदार्थों को दरकिनार भी किया जा सकता है, लेकिन शादियों और सर्दियों में तो वैसे ही दूध और मावा की मांग बढ़ जाती है।
इसलिए इन्हें वर्तमान पूरी तरह से दरकिनार नहीं किया जा सकता। जिससे आम दिनों की बजाय दूध, मावा, पनीर और दही की मांग काफी बढ़ जाती है और इनकी पूर्ति का अन्य कोई साधन न होने से फायदा मिलावटखोर उठाते हैं।
कई बार पकड़ा भी गया नकली मावा
यह बात को किसी से छिपी नहीं है कि यूपी और अन्य राज्यों से यमुनानगर में नकली मावा आता है। यूपी से लाए गए नकली मावा की बड़ी खेप कई बार यहां पकड़ी जा चुकी है।
लेकिन इसके बाद भी प्रशासन इस पर पूरी तरह से अंकुश लगाने में नाकामयाब है। शादियों के सीजन को शुरू हुए करीब एक महीना होने को आया है, अभी तक संबंधित विभाग के अधिकारियों की ओर से कहीं पर भी सेंपलिंग नहीं की गई है।
‘जिले में 65 प्रतिशत नकली दूध की सप्लाई’
दूग्ध उत्पादन किसान सोसाइटी के अध्यक्ष रविंद्र शर्मा ने बताया कि सिंथेटिक दूध को हल्की से मिलावट से बनाया जा सकता है। जो बिल्कुल शुद्ध दूध की तरह की दिखता है, ऐसे दूध को सेंपलिंग से ही पकड़ा जा सकता है। लेकिन संबंधित विभाग के सुस्त रवैये के चलते फायदा मिलावटखोर उठा रहे हैं।
उनका कहना है कि दूध बनाने में मिल्क पाउडर का भी यूज किया जाता है। इसके साथ ही मिलावटखोर नकली पनीर को भी बाजार में सप्लाई करते हैं। उनका कहना है कि हमारी ओर से गत वर्ष सर्वे किया गया था, जिसमें सामने आया था कि जिले में 65 प्रतिशत दूध नकली सप्लाई होता है।
लेकिन उसके बाद भी प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है। लोगों को मिलावटी दूध और दूध से बने पदार्थों को ही परोसा जा रहा है।
निर्देश देने की कोई बात नहीं : सिविल सर्जन
सीएमओ डॉ. एमआर पासी का कहना है कि इसमें निर्देश की कोई बात ही नहीं है। सेंपलिंग करना उनकी जिम्मेदारी है। अगर, मेरे निर्देशों की बात है तो मैं उन्हें अभी सेंपलिंग के लिए कहता हूं। उनकी ओर से कल ही सेंपलिंग की जाएगी।
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लेकिन इन पर काबू पाने और लोगों को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की बजाय प्रशासनिक अधिकारी गहरी नींद में सोए हैं। फेस्टिवल सीजन में दो चार मिठाई की दुकानों पर खाद्य पदार्थों के सेंपल लेकर खानापूर्ति करने के बाद शादियों के सीजन में सेंपलिंग अभियान शहनाइयों और ढोल की धमक के नीचे दब गया है।
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वहीं, दूसरी ओर अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी से बचते दिखाई दे रहे हैं। जिन अधिकारियों के कंधों पर सेंपलिंग की जिम्मेदारी है, वे उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सेंपलिंग करने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। इससे साफ है कि अधिकारी मिलावटखोरी पर काबू पाने के लिए कितने गंभीर है।
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फूड सेफ्टी अधिकारी तो सीएमओ की निर्देशों के बाद ही कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।
बड़ी मात्रा में होती है खपत
बात अगर इन दिनों दूध से बनने वाले पदार्थों की कि जाए तो शादियों के दिनों में इनकी खपत कई गुणा तक बढ़ जाती है। त्योहारों के सीजन में तो मिठाइयों और दूध से बने पदार्थों को दरकिनार भी किया जा सकता है, लेकिन शादियों और सर्दियों में तो वैसे ही दूध और मावा की मांग बढ़ जाती है।
इसलिए इन्हें वर्तमान पूरी तरह से दरकिनार नहीं किया जा सकता। जिससे आम दिनों की बजाय दूध, मावा, पनीर और दही की मांग काफी बढ़ जाती है और इनकी पूर्ति का अन्य कोई साधन न होने से फायदा मिलावटखोर उठाते हैं।
कई बार पकड़ा भी गया नकली मावा
यह बात को किसी से छिपी नहीं है कि यूपी और अन्य राज्यों से यमुनानगर में नकली मावा आता है। यूपी से लाए गए नकली मावा की बड़ी खेप कई बार यहां पकड़ी जा चुकी है।
लेकिन इसके बाद भी प्रशासन इस पर पूरी तरह से अंकुश लगाने में नाकामयाब है। शादियों के सीजन को शुरू हुए करीब एक महीना होने को आया है, अभी तक संबंधित विभाग के अधिकारियों की ओर से कहीं पर भी सेंपलिंग नहीं की गई है।
‘जिले में 65 प्रतिशत नकली दूध की सप्लाई’
दूग्ध उत्पादन किसान सोसाइटी के अध्यक्ष रविंद्र शर्मा ने बताया कि सिंथेटिक दूध को हल्की से मिलावट से बनाया जा सकता है। जो बिल्कुल शुद्ध दूध की तरह की दिखता है, ऐसे दूध को सेंपलिंग से ही पकड़ा जा सकता है। लेकिन संबंधित विभाग के सुस्त रवैये के चलते फायदा मिलावटखोर उठा रहे हैं।
उनका कहना है कि दूध बनाने में मिल्क पाउडर का भी यूज किया जाता है। इसके साथ ही मिलावटखोर नकली पनीर को भी बाजार में सप्लाई करते हैं। उनका कहना है कि हमारी ओर से गत वर्ष सर्वे किया गया था, जिसमें सामने आया था कि जिले में 65 प्रतिशत दूध नकली सप्लाई होता है।
लेकिन उसके बाद भी प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है। लोगों को मिलावटी दूध और दूध से बने पदार्थों को ही परोसा जा रहा है।
निर्देश देने की कोई बात नहीं : सिविल सर्जन
सीएमओ डॉ. एमआर पासी का कहना है कि इसमें निर्देश की कोई बात ही नहीं है। सेंपलिंग करना उनकी जिम्मेदारी है। अगर, मेरे निर्देशों की बात है तो मैं उन्हें अभी सेंपलिंग के लिए कहता हूं। उनकी ओर से कल ही सेंपलिंग की जाएगी।