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शैलपुत्री की पूजा को मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु

Sat, 09 Apr 2016 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 09 Apr 2016 12:51 AM IST
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Mata Rani, Navratre, Hindu, Yamunanagar, Haryana
नवरात्र उत्सव - फोटो : यमुना नगर

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यमुनानगर/जगाधरी। नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने घरों में विधिवत घट स्थापना की और मंदिरों में मां भगवती के पहले रूप शैलपुत्री की पूजा कर मन्नतें मांगी। ट्विनसिटी में जगाधरी के प्राचीन देवी भवन मंदिर, छोटी लाइन स्थित जंगलावाली माता मंदिर, रेलवे रोड स्थित गीता भवन मंदिर, रेलवे स्टेशन स्थित प्राचीन देवी मंदिर, मॉडल टाउन स्थित सनातन धर्म मंदिर व रामजी की कुटिया में दिनभर श्रद्धालु उमड़े दिखे।

सुबह शुरू हुआ पूजा-अर्चना का सिलसिला दोपहर बाद तक जारी रहा और देर शाम को मंदिरों में आरती हुई।
देवी भवन मंदिर के पुजारी पंडित अतुल शास्त्री ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन सुबह तीन मां भगवती को स्नान के उपरांत वस्त्र धारण कराए गए और मां भगवती को श्रृंगार कराया गया। कलश स्थापना के बाद मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। सुबह चार बजे से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। सुबह 9 से 10 बजे के बीच मंदिर परिसर में सबसे ज्यादा भीड़ देखी गई।
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घरों में भी मां भगवती की अराधना
श्रद्धालुओं ने अपने घरों में मां भगवती के प्रथम रूप शैलपुत्री की पूजा से पहले कलश की स्थापना की। जगाधरी के राजेश कुमार, प्रवेश कुमारी, मॉडल टाउन निवासी श्रुति शर्मा, स्नेहा व नेहा का कहना है कि उन्होंने मुहूर्त के समय 12:04 के बाद घट स्थापना की।
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ऐसे पड़ा शैलपुत्री नाम
पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि सती राजा दक्ष प्रजापति की पुत्री थी। एक बार जब राजा दक्ष ने यज्ञ किया तो अपने दामाद शंकर जी को आमंत्रित नहीं किया। पिता के आमंत्रण के बिना जब सती यज्ञ में शामिल हुई तो उसे अपमान सहना पड़ा। सती ने यज्ञाग्नि में आत्मोत्सर्ग कर लिया। इसके बाद भगवान शंकर ने तांडव किया। भगवान के इस रूप को काल कालेश्वर कहा गया। सती का ही दूसरा रूप पार्वती या शैलपुत्री है। पर्वतराज की पुत्री होने की वजह से मां दुर्गा के प्रथम रूप का नाम शैलपुत्री पड़ा। कठोर तप के बाद भगवान शंकर से इनका विवाह हुआ।
 
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