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Yamuna Nagar News: कुत्तों से निजात दिलाने के बजाय हिंसक होने की जांच करा रहे अधिकारी

Sun, 15 Dec 2024 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sun, 15 Dec 2024 12:32 AM IST
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Instead of getting rid of the dogs, the officers are investigating them for being violent
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। शहर व ग्रामीण क्षेत्र में घूम रहे बेसहारा कुत्तों को पकड़ने को लेकर जिला प्रशासन बेबस दिख रहा है। कुत्तों को न तो पकड़ा जा रहा है और न ही उनकी नसबंदी कराई जा रही है।
जो लोग कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर निगम में पत्र लिख रहे हैं या फिर शिकायत कर रहे हैं उन्हें आश्वासन अथवा जांच कराने की बात कह कर टरकाया जा रहा है। इसका खामियाजा लोगों को भुगत रहे हैं। कुत्तों ने लोगों को परेशान कर दिया है।
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यहां तक की गली में यदि कुत्ते खड़े हैं तो उन्हें देख कर डरे लोग वापस हो जाते हैं या फिर दूसरे रास्ते से निकलना पड़ता है। परंतु अधिकारी लोगों की इस परेशानी को बिल्कुल भी नहीं समझ रहे। सरोजिनी कॉलोनी निवासी संदीप गांधी ने आठ सितंबर 2021 में अपनी गली में घूम रहे बेसहारा कुत्तों को पकड़ने को लेकर सीएम विंडो लगाई थी। उन्होंने शिकायत में कहा था कि गली में घूम रहे कुत्ते आक्रामक हैं जो किसी के भी पीछे काटने को दौड़ पड़ते हैं।
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यह पत्र भी उन्होंने तब लिखा था क्योंकि गली में एक कुत्ते ने उनकी बेटी मनिका की टांग पर काट लिया था। तब साढ़े तीन हजार रुपये के इंजेक्शन निजी डॉक्टर से लगवाए थे। तीन साल तक नगर निगम के अधिकारियों ने शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की।
संदीप गांधी के अनुसार शिकायत वापस लेने के लिए नगर निगम के अधिकारी उन पर आरोप लगाते रहे। इसके लिए निगम के कर्मचारी कई बार उनके घर पर भी आए।
दरअसल लंबित सीएम विंडो पर पर अधिकारियों को जवाब देना पड़ता है, इसलिए शिकायत को वापस लेने का दबाव बनाया गया।
इसी साल 30 जुलाई 2024 को नगर निगम ने शहरी स्थानीय निकाय को पत्र लिखा गया कि एनिमल एक्ट 1960 के विभिन्न सेक्शन के तहत आवारा कुत्तों को उनके स्थान से हटाया नहीं जा सकता। वहीं कुत्ते आक्रामक हैं या नहीं इसकी जांच के लिए पशुपालन विभाग के उपनिदेशक को पत्र क्रमांक- 975 लिखा गया है।

यह पत्र भी उसी दिन लिखा गया था जब निदेशक को पत्र लिखा गया था। पशुपालन विभाग की तरफ से क्या जवाब आया इसकी जानकारी तक नगर निगम के अधिकारियों को नहीं है। गौरतलब है कि 11 माह 5391 लोगों को कुत्ते काट चुके हैं।
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