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वेंटिलेटर पर जगाधरी का बर्तन उद्योग
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Wed, 18 Nov 2015 12:22 AM IST
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प्रदेश के खजाने में हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाला जगाधरी का बर्तन उद्योग इस मशीनी युग में भी पिछड़ रहा है। इस इंडस्ट्री की सबसे बड़ी जरूरत टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर पिछले डेढ़ दशक से धरातल पर नहीं उतर पाया है। इसके अभाव में उद्योगपतियों को मशीनरी व टूल्स की मरम्मत के लिए दिल्ली के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
बर्तन नगरी जगाधरी में बर्तन बनाने की 200 से अधिक फैक्ट्रियां हैं। इसके अलावा बर्तन निर्माण से जुड़ी छोटी-बड़ी 300 से अधिक फैक्ट्रियां हैं। इन फैक्ट्रियों में टूल्स व डाई की बड़े पैमाने पर जरूरत पड़ती है। अच्छी क्वालिटी के टूल्स व डाई के लिए फैक्ट्री मालिक दिल्ली पर निर्भर हैं।
कई बार एक डाई के लिए दिल्ली के कई चक्कर काटने पड़ते हैं। उद्योगपति लंबे समय से जगाधरी में ही उच्च क्वालिटी की डाई व टूल्स निर्माण के लिए सेंटर बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए जगाधरी में क्वालिटी मार्किंग सेंटर बना है, लेकिन इसकी मशीनरी कई दशक पुरानी है, जिसका अब इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। हालत यह है कि क्वालिटी मार्किंग सेंटर में रखी दशकों पुरानी मशीनरी को जंग लग चुका है।
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टूल रूम सेंटर से दूसरी इंडस्ट्री को भी होगा फायदा
टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर बनने से बर्तन उद्योग के अलावा जिले की उन सभी इंडस्ट्री को फायदा होगा, जहां टूल्स और डाई का काम होता है। जिले की लगभग हर औद्योगिक इकाई में टूल्स व डाई की जरूरत पड़ती है। जिले में उच्च क्वालिटी के टूल्स व डाई बनाने के लिए कोई भी सरकारी सेंटर नहीं है। ऐसे में इस सेंटर की जरूरत और भी बढ़ जाती है।
युवाओं को मिलेगा रोजगार
टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर में डाई व टूल्स निर्माण के अलावा जॉब वर्क पर उत्पादन व स्किल लेबर तैयार की जानी थी। इसका सबसे अधिक फायदा बेरोजगार युवाओं को मिलेगा। युवा सेंटर में ही ट्रेनिंग लेकर बर्तन उद्योग में रोजगार पा सकते हैं। हालांकि बर्तन इंडस्ट्री में मशीन के कारीगर तो हैं, लेकिन अधिकतर को आधुनिक मशीनों पर काम करने का अनुभव नहीं है। वहीं जॉब वर्क पर उत्पादन होने से युवाओं को सेंटर में भी रोजगार मिलेगा।
सेंटर के लिए नहीं मिल पाए साढे़ 13 करोड़
द जगाधरी मेटल मैन्युफैक्चर एंड स्पलायर्स एसोसिएशन व अन्य एसोसिएशन की ओर से लंबे समय से क्वालिटी मार्किंग सेंटर को अपग्रेड कर यहां मिनी टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर बनवाने की कवायद की जा रही है। कांग्रेस शासन में जगाधरी में क्वालिटी कंट्रोल सेंटर की जगह पर टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर बनाने की योजना पर काम शुरू हुआ था। एसोसिएशन की ओर से इस बारे में 7 दिसंबर, 2009 को डायरेक्टर आफ इंडस्ट्री एंड कामर्स को पत्र लिखा गया था। अगस्त, 2010 में क्वालिटी मार्किंग सेंटर को अपग्रेड कर यहां मिनी टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर बनाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया। यह प्रोजेक्ट 13 करोड़ 50 लाख रुपये का था लेकिन बाद में इंडस्ट्री एंड कामर्स डिपार्टमेंट की ओर से इस सेंटर के निर्माण के लिए बर्तन उद्योगपतियों से उनके शेयर की बात कही गई। एसोसिएशन की ओर से इस पर असमर्थता जताने पर यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। हालांकि इसके बाद भी एसोसिएशन ने अपना प्रयास जारी रखा और प्रदेश के उद्योग मंत्री को भी लेटर लिखा, लेकिन यह प्रोजेेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया।
जगाधरी के उद्योगपति लंबे समय से यहां टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर बनाने की मांग कर रहे हैं। एसोसिएशन की ओर से इसके लिए पूर्व की सरकारों से कई बार पत्राचार भी किया गया। कांग्रेस शासन में सेंटर के निर्माण की कवायद शुरू की गई, लेकिन यह आज तक नहीं बन पाया है।
सुंदर लाल बतरा, जनरल सेक्रेटरी, द जगाधरी मैटल मैन्युफैक्चर एंड स्पलायर्स एसोसिएशन
टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर बनने से बर्तन फैक्ट्रियों के लिए यहां उच्च क्वालिटी की डाई व टूल्स बन सकेंगे। इससे उत्पादन की क्षमता और तैयार माल की गुणवत्ता बढे़गी। बर्तन इंडस्ट्री का दुर्भाग्य ही है कि अब तक यहां टेल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर नहीं बन पाया है।
राज सलूजा, प्रधान, मैटल मैन्युफैक्चर एंड स्पलायर्स एसोसिएशन
दिल्ली में टूल्स व डाई बनवाने में सबसे अधिक दिक्कत छोटे फैक्ट्री मालिकों को होती है। उन्हें बार-बार दिल्ली आना-जाना पड़ता है। इसके अलावा टूल्स व डाई में आए दिन कोई न कोई खराबी आती रहती है। ऐसे में जगाधरी में टूल रूम सेंटर जल्द बनना चाहिए।
अमरजीत सिंह कोहली, बर्तन निर्माता
जिले में बर्तन और प्लाई उद्योग होने के बावजूद यहां टूल्स व डाई बनवाने के लिए कोई भी सरकारी सेंटर नहीं है। इन उद्योगों से सरकार को करोड़ों रुपये टैक्स मिलता है। यदि सरकार यहां की इंडस्ट्री को सुविधाएं देगी तो उत्पादन बढ़ेगा, जिससे सरकार को और अधिक टैक्स मिलेगा।
दर्शन लाल खेड़ा, बर्तन निर्माता
जगाधरी में कोई सरकारी सेंटर न होने से फैक्टरी मालिकों को डाई टैंपर करवाने के लिए की भी चंडीगढ़ या दिल्ली जाना पड़ता है। जगाधरी का बर्तन उद्योग पहले ही कंपटीशन में पिछड़ रहा है। इसे बचाने के लिए सरकारी सुविधाएं जल्द से जल्द मिलनी चाहिए।
दीक्षांत खेड़ा, मैनेजर, मानकपुर इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन
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बर्तन नगरी जगाधरी में बर्तन बनाने की 200 से अधिक फैक्ट्रियां हैं। इसके अलावा बर्तन निर्माण से जुड़ी छोटी-बड़ी 300 से अधिक फैक्ट्रियां हैं। इन फैक्ट्रियों में टूल्स व डाई की बड़े पैमाने पर जरूरत पड़ती है। अच्छी क्वालिटी के टूल्स व डाई के लिए फैक्ट्री मालिक दिल्ली पर निर्भर हैं।
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कई बार एक डाई के लिए दिल्ली के कई चक्कर काटने पड़ते हैं। उद्योगपति लंबे समय से जगाधरी में ही उच्च क्वालिटी की डाई व टूल्स निर्माण के लिए सेंटर बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए जगाधरी में क्वालिटी मार्किंग सेंटर बना है, लेकिन इसकी मशीनरी कई दशक पुरानी है, जिसका अब इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। हालत यह है कि क्वालिटी मार्किंग सेंटर में रखी दशकों पुरानी मशीनरी को जंग लग चुका है।
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टूल रूम सेंटर से दूसरी इंडस्ट्री को भी होगा फायदा
टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर बनने से बर्तन उद्योग के अलावा जिले की उन सभी इंडस्ट्री को फायदा होगा, जहां टूल्स और डाई का काम होता है। जिले की लगभग हर औद्योगिक इकाई में टूल्स व डाई की जरूरत पड़ती है। जिले में उच्च क्वालिटी के टूल्स व डाई बनाने के लिए कोई भी सरकारी सेंटर नहीं है। ऐसे में इस सेंटर की जरूरत और भी बढ़ जाती है।
युवाओं को मिलेगा रोजगार
टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर में डाई व टूल्स निर्माण के अलावा जॉब वर्क पर उत्पादन व स्किल लेबर तैयार की जानी थी। इसका सबसे अधिक फायदा बेरोजगार युवाओं को मिलेगा। युवा सेंटर में ही ट्रेनिंग लेकर बर्तन उद्योग में रोजगार पा सकते हैं। हालांकि बर्तन इंडस्ट्री में मशीन के कारीगर तो हैं, लेकिन अधिकतर को आधुनिक मशीनों पर काम करने का अनुभव नहीं है। वहीं जॉब वर्क पर उत्पादन होने से युवाओं को सेंटर में भी रोजगार मिलेगा।
सेंटर के लिए नहीं मिल पाए साढे़ 13 करोड़
द जगाधरी मेटल मैन्युफैक्चर एंड स्पलायर्स एसोसिएशन व अन्य एसोसिएशन की ओर से लंबे समय से क्वालिटी मार्किंग सेंटर को अपग्रेड कर यहां मिनी टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर बनवाने की कवायद की जा रही है। कांग्रेस शासन में जगाधरी में क्वालिटी कंट्रोल सेंटर की जगह पर टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर बनाने की योजना पर काम शुरू हुआ था। एसोसिएशन की ओर से इस बारे में 7 दिसंबर, 2009 को डायरेक्टर आफ इंडस्ट्री एंड कामर्स को पत्र लिखा गया था। अगस्त, 2010 में क्वालिटी मार्किंग सेंटर को अपग्रेड कर यहां मिनी टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर बनाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया। यह प्रोजेक्ट 13 करोड़ 50 लाख रुपये का था लेकिन बाद में इंडस्ट्री एंड कामर्स डिपार्टमेंट की ओर से इस सेंटर के निर्माण के लिए बर्तन उद्योगपतियों से उनके शेयर की बात कही गई। एसोसिएशन की ओर से इस पर असमर्थता जताने पर यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। हालांकि इसके बाद भी एसोसिएशन ने अपना प्रयास जारी रखा और प्रदेश के उद्योग मंत्री को भी लेटर लिखा, लेकिन यह प्रोजेेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया।
जगाधरी के उद्योगपति लंबे समय से यहां टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर बनाने की मांग कर रहे हैं। एसोसिएशन की ओर से इसके लिए पूर्व की सरकारों से कई बार पत्राचार भी किया गया। कांग्रेस शासन में सेंटर के निर्माण की कवायद शुरू की गई, लेकिन यह आज तक नहीं बन पाया है।
सुंदर लाल बतरा, जनरल सेक्रेटरी, द जगाधरी मैटल मैन्युफैक्चर एंड स्पलायर्स एसोसिएशन
टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर बनने से बर्तन फैक्ट्रियों के लिए यहां उच्च क्वालिटी की डाई व टूल्स बन सकेंगे। इससे उत्पादन की क्षमता और तैयार माल की गुणवत्ता बढे़गी। बर्तन इंडस्ट्री का दुर्भाग्य ही है कि अब तक यहां टेल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर नहीं बन पाया है।
राज सलूजा, प्रधान, मैटल मैन्युफैक्चर एंड स्पलायर्स एसोसिएशन
दिल्ली में टूल्स व डाई बनवाने में सबसे अधिक दिक्कत छोटे फैक्ट्री मालिकों को होती है। उन्हें बार-बार दिल्ली आना-जाना पड़ता है। इसके अलावा टूल्स व डाई में आए दिन कोई न कोई खराबी आती रहती है। ऐसे में जगाधरी में टूल रूम सेंटर जल्द बनना चाहिए।
अमरजीत सिंह कोहली, बर्तन निर्माता
जिले में बर्तन और प्लाई उद्योग होने के बावजूद यहां टूल्स व डाई बनवाने के लिए कोई भी सरकारी सेंटर नहीं है। इन उद्योगों से सरकार को करोड़ों रुपये टैक्स मिलता है। यदि सरकार यहां की इंडस्ट्री को सुविधाएं देगी तो उत्पादन बढ़ेगा, जिससे सरकार को और अधिक टैक्स मिलेगा।
दर्शन लाल खेड़ा, बर्तन निर्माता
जगाधरी में कोई सरकारी सेंटर न होने से फैक्टरी मालिकों को डाई टैंपर करवाने के लिए की भी चंडीगढ़ या दिल्ली जाना पड़ता है। जगाधरी का बर्तन उद्योग पहले ही कंपटीशन में पिछड़ रहा है। इसे बचाने के लिए सरकारी सुविधाएं जल्द से जल्द मिलनी चाहिए।
दीक्षांत खेड़ा, मैनेजर, मानकपुर इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन