{"_id":"fd406212f31b3f6020fc5dee3e7deaab","slug":"hightension-stadium-felt-the-blow-of-wire","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्टेडियम को लगा हाईटेंशन तार का झटका ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्टेडियम को लगा हाईटेंशन तार का झटका
यमुनानगर।
Updated Fri, 20 Sep 2013 05:23 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गांव महंलावाली में राजीव गांधी स्टेडियम बनाने से हरियाणा स्टेट
विज्ञापन
एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड ने भी हाथ खींच लिए हैं। मंजूर पैसे को वापस
भेज दिया गया है। अब गांव में स्टेडियम बनने का सपना बस सपना ही रह जाएगा।
पहले ही स्टेडियम का मामला लंबे समय से फाइलों में उलझा था, लेकिन अब तो
स्टेडियम बनने की राह पर ही ब्रेक लगते दिख रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि पंचायत की ओर से स्टेडियम के लिए दी गई प्रस्तावित जमीन से बिजली की लाइन गुजर रही है। लाइन न हटने से ही स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा था। मार्केटिंग बोर्ड के बाद अब अंतिम आस पंचायती राज विभाग पर टिकी है।
सत्तर लाख हुए थे मंजूर
गांव में स्टेडियम बनाने के लिए सरकार की ओर से करीब 70 लाख रुपये का बजट मंजूर किया गया था। इस बजट में से जमीन पर नलकूप के लिए बोरिंग ही कराई गई थी, अन्य कोई भी काम नहीं लग पाया था। मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी बिजली की लाइन हटने के बाद काम लगाने के मुड़ में थे, लेकिन न तार हटी और न ही स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू हो पाया।
कई वर्षों से चल रहा था हेरफेर
लाइन हटाने के लिए बिजली निगम में 1.80 लाख रुपये जमा कराने थे। बोर्ड जहां लाइन हटवाने की जिम्मेदारी पंचायत पर डाल रहा था, वहीं पंचायत सदस्य लाइन हटवाने की जिम्मेदारी प्रशासन की बता रहे थे। पंचायत सदस्य अपनी जिम्मेदारी जमीन देने तक की बता रहे थे। यह हेरफेर कई वर्षों से चल रहा था। पंचायत सदस्यों का कहना है कि लाइन हटवाने को लेकर उनकी ओर से डीसी को प्रस्ताव भी दिया गया था, कि पंचायत लाइन हटवाने का बजट देने में असमर्थ है।
किसी की नहीं दिलचस्पी
स्टेडियम बनाने में न तो प्रशासन की दिलचस्पी दिख रही है और न ही पंचायत की। क्योंकि लाइन हटवाने के प्रयास किसी की ओर से नहीं किए जा रहे बस एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोपी जा रही है। क्योंकि बिजली की लाइन हटवाने बहुत ज्यादा खर्च नहीं आने वाला। बिजली की लाइन हटवाने के लिए प्रशासन मंजूर बजट में से खर्च कर सकता था, लेकिन इच्छा शक्ति के अभाव में ऐसा नहीं हुआ। इसके साथ ही पंचायत भी अगर चाहे कहीं न कहीं से लाइन हटवाने का बजट निकाली सकती थी, लेकिन यहां भी किसी न कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
उल्लेखनीय है कि पंचायत की ओर से स्टेडियम के लिए दी गई प्रस्तावित जमीन से बिजली की लाइन गुजर रही है। लाइन न हटने से ही स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा था। मार्केटिंग बोर्ड के बाद अब अंतिम आस पंचायती राज विभाग पर टिकी है।
सत्तर लाख हुए थे मंजूर
गांव में स्टेडियम बनाने के लिए सरकार की ओर से करीब 70 लाख रुपये का बजट मंजूर किया गया था। इस बजट में से जमीन पर नलकूप के लिए बोरिंग ही कराई गई थी, अन्य कोई भी काम नहीं लग पाया था। मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी बिजली की लाइन हटने के बाद काम लगाने के मुड़ में थे, लेकिन न तार हटी और न ही स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू हो पाया।
कई वर्षों से चल रहा था हेरफेर
लाइन हटाने के लिए बिजली निगम में 1.80 लाख रुपये जमा कराने थे। बोर्ड जहां लाइन हटवाने की जिम्मेदारी पंचायत पर डाल रहा था, वहीं पंचायत सदस्य लाइन हटवाने की जिम्मेदारी प्रशासन की बता रहे थे। पंचायत सदस्य अपनी जिम्मेदारी जमीन देने तक की बता रहे थे। यह हेरफेर कई वर्षों से चल रहा था। पंचायत सदस्यों का कहना है कि लाइन हटवाने को लेकर उनकी ओर से डीसी को प्रस्ताव भी दिया गया था, कि पंचायत लाइन हटवाने का बजट देने में असमर्थ है।
किसी की नहीं दिलचस्पी
स्टेडियम बनाने में न तो प्रशासन की दिलचस्पी दिख रही है और न ही पंचायत की। क्योंकि लाइन हटवाने के प्रयास किसी की ओर से नहीं किए जा रहे बस एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोपी जा रही है। क्योंकि बिजली की लाइन हटवाने बहुत ज्यादा खर्च नहीं आने वाला। बिजली की लाइन हटवाने के लिए प्रशासन मंजूर बजट में से खर्च कर सकता था, लेकिन इच्छा शक्ति के अभाव में ऐसा नहीं हुआ। इसके साथ ही पंचायत भी अगर चाहे कहीं न कहीं से लाइन हटवाने का बजट निकाली सकती थी, लेकिन यहां भी किसी न कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।