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हमीदा हेड : बहाव इतना तेज कि तैराक भी नहीं लग पाते किनारे
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हमीदा हेड पर पश्चिमी यमुना नहर में पानी का बहाव। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
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माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। हरियाणा में खूनी नहर के नाम से मशहूर पश्चिमी यमुना नहर पर बनाया गया हमीदा हेड हादसों का केंद्र बिंदु बनता जा रहा है। हमीदा हेड पर लगातार हो रहे हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहां पानी का इतना तेज बहाव है कि अनुभवनी तैराक भी किनारे नहीं लग पाते।
पांच दिन पहले एक युवक को तलाश कर रही गोताखोरों की किश्ती पलट गई तो उसमें सवार सुरेंद्र नाम का अनुभवी गोताखोर भी डूब गया। पानी का बहाव उसे 50 किमी दूर ले गया और अगले दिन करनाल के नीलोखेड़ी के पास से उसका शव बरामद हुआ। इलाके से गुजर रही पश्चिमी नहर में होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यहां कभी नहाने के क्रम में डूबने से मौत होती है तो कभी धार्मिक क्रियाकर्म करते वक्त लोग पैर फिसलने से डूब जाते हैं। एक साल के अंदर अमूमन 45 से 55 लोगों की इसी तरह मौत होती है। हालांकि, इससे बचाव के लिए योजनाएं भी बनीं, लेकिन अफसरों की लापरवाही से अब तक जमीं पर नहीं उतर सकी, जिसका खामियाजा लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
प्रमुख घटनाएं
19 सितंबर 2021 को अपने मामा की अस्थियां विसर्जित करने गया गांधी नगर निवासी युवक सतेंद्र सिंह उर्फ टीनू का हमीदा हेड के पास पैर फिसल गया। नहर में पानी का बहाव इतना तेज था कि उसकी तलाश कर रहे खोताखोरों की नाव भी अनियंत्रित होकर पलट गई। नाव पलटने से चालक एवं गोताखोर सुरेंद्र सिंह, पटवारी धर्मेंद्र, कैंप निवासी विक्की, टोनी, अनिल व एक होमगार्ड का जवान बह गए। लोगों ने पटवारी धर्मेंद्र, टोनी, अनिल व होमगार्ड के जवान को तो बाहर निकाल लिया, लेकिन गोताखोर सुरेंद्र और विक्की को नहीं बचा सकें।
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छह फरवरी 2021 को हमीदा हेड पर नहर में नहाते समय वीणा नगर कैंप निवासी 15 वर्षीय सौरव, सुमित और अंकुश डूब गए थे। किसी तरह अंकुश तो किनारे लग गया था, लेकिन सौरव व सुमित बह गए थे।
छह फरवरी 2021 को हमीदा हेड पर सेल्फी लेते समय 20 वर्षीय अभिषेक व उसका दोस्त 20 वर्षीय गौरव आवर्धन नहर में गिर गए थे। उनके साथ दो दोस्त सागर व संदीप भी थे। उन्होंने दोनों को बचाने की कोशिश की, लेकिन बचा नहीं सकें।
पिछले साल जून महीने में हमीदा हेड पर खड्डा कॉलोनी निवासी 18 वर्षीय युवक आवर्धन नहर में डूब गया था। वह अपने मां-बाप का इकलौता बेटा और पॉलीटेक्निक का छात्र था। उसकी दो बहनें हैं। वह किसी काम से हमीदा हेड की तरफ गया था।
हेड से पहले झील की वजह से दोनों नहरों में पानी का काफी तेज बहाव हो जाता है। यहां भंवर भी बन जाता है, जिसमें फंसने के बाद निकलना मुश्किल होता है। गोताखोर को भी काफी मुश्किल हो जाती है। - अमर पहलवान, गोताखोर
हादसों को रोकने के लिए हमीदा हेड पर गश्त की जाती है। पुलिस टीम के इधर-उधर जाने पर लोग पानी की तरफ चले जाते हैं। हादसे बढ़ने के कारण अस्थायी तौर पर पुलिस टीम तैनात की गई है। - सुखबीर सिंह, शहर थाना प्रभारी
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यमुनानगर। हरियाणा में खूनी नहर के नाम से मशहूर पश्चिमी यमुना नहर पर बनाया गया हमीदा हेड हादसों का केंद्र बिंदु बनता जा रहा है। हमीदा हेड पर लगातार हो रहे हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहां पानी का इतना तेज बहाव है कि अनुभवनी तैराक भी किनारे नहीं लग पाते।
पांच दिन पहले एक युवक को तलाश कर रही गोताखोरों की किश्ती पलट गई तो उसमें सवार सुरेंद्र नाम का अनुभवी गोताखोर भी डूब गया। पानी का बहाव उसे 50 किमी दूर ले गया और अगले दिन करनाल के नीलोखेड़ी के पास से उसका शव बरामद हुआ। इलाके से गुजर रही पश्चिमी नहर में होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यहां कभी नहाने के क्रम में डूबने से मौत होती है तो कभी धार्मिक क्रियाकर्म करते वक्त लोग पैर फिसलने से डूब जाते हैं। एक साल के अंदर अमूमन 45 से 55 लोगों की इसी तरह मौत होती है। हालांकि, इससे बचाव के लिए योजनाएं भी बनीं, लेकिन अफसरों की लापरवाही से अब तक जमीं पर नहीं उतर सकी, जिसका खामियाजा लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
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प्रमुख घटनाएं
19 सितंबर 2021 को अपने मामा की अस्थियां विसर्जित करने गया गांधी नगर निवासी युवक सतेंद्र सिंह उर्फ टीनू का हमीदा हेड के पास पैर फिसल गया। नहर में पानी का बहाव इतना तेज था कि उसकी तलाश कर रहे खोताखोरों की नाव भी अनियंत्रित होकर पलट गई। नाव पलटने से चालक एवं गोताखोर सुरेंद्र सिंह, पटवारी धर्मेंद्र, कैंप निवासी विक्की, टोनी, अनिल व एक होमगार्ड का जवान बह गए। लोगों ने पटवारी धर्मेंद्र, टोनी, अनिल व होमगार्ड के जवान को तो बाहर निकाल लिया, लेकिन गोताखोर सुरेंद्र और विक्की को नहीं बचा सकें।
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छह फरवरी 2021 को हमीदा हेड पर नहर में नहाते समय वीणा नगर कैंप निवासी 15 वर्षीय सौरव, सुमित और अंकुश डूब गए थे। किसी तरह अंकुश तो किनारे लग गया था, लेकिन सौरव व सुमित बह गए थे।
छह फरवरी 2021 को हमीदा हेड पर सेल्फी लेते समय 20 वर्षीय अभिषेक व उसका दोस्त 20 वर्षीय गौरव आवर्धन नहर में गिर गए थे। उनके साथ दो दोस्त सागर व संदीप भी थे। उन्होंने दोनों को बचाने की कोशिश की, लेकिन बचा नहीं सकें।
पिछले साल जून महीने में हमीदा हेड पर खड्डा कॉलोनी निवासी 18 वर्षीय युवक आवर्धन नहर में डूब गया था। वह अपने मां-बाप का इकलौता बेटा और पॉलीटेक्निक का छात्र था। उसकी दो बहनें हैं। वह किसी काम से हमीदा हेड की तरफ गया था।
हेड से पहले झील की वजह से दोनों नहरों में पानी का काफी तेज बहाव हो जाता है। यहां भंवर भी बन जाता है, जिसमें फंसने के बाद निकलना मुश्किल होता है। गोताखोर को भी काफी मुश्किल हो जाती है। - अमर पहलवान, गोताखोर
हादसों को रोकने के लिए हमीदा हेड पर गश्त की जाती है। पुलिस टीम के इधर-उधर जाने पर लोग पानी की तरफ चले जाते हैं। हादसे बढ़ने के कारण अस्थायी तौर पर पुलिस टीम तैनात की गई है। - सुखबीर सिंह, शहर थाना प्रभारी