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Yamuna Nagar News: दो प्रदेशों के सीमा विवाद में उलझा बाढ़ राहत बचाव कार्य
Thu, 17 Sep 2026 02:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 17 Sep 2026 02:53 AM IST
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जगाधरी। यमुना नदी के पार बसे जिले के गांव पोबारी में चल रहा बाढ़ राहत बचाव कार्य दो प्रदेशों की सीमा विवाद के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहा है। एक महीने से बाढ़ राहत बचाव कार्य बंद पड़ा है और यह शुरू होने की अभी कोई उम्मीद नजर नहीं आता है। यह काम पूरा करने का निर्धारित समय भी समाप्त हो गया है। जिले का गांव पोबारी में उत्तर प्रदेश के मंधौर गांव के किसानों ने अपनी जमीन बताई है और उन्होंने अपनी जमीन पर काम करने सिंचाई विभाग को रोक दिया। यही नहीं किसानों ने जमीन पर खाइयां खोद दी हैं, ताकि सरकारी वाहन उनकी भूमि पर प्रवेश न कर सके। विवाद सुलझाने के लिए जिला सिंचाई विभाग ने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों को निशानदेही के लिए बुलाया है, लेकिन वे आ नहीं रहे हैं।इस सीमा विवाद को सुलझाने के लिए दोनों प्रदेशों के संबंधित अधिकारियों की बातचीत हुई, जिसमें संयुक्त निशानदेही लेने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को निशानदेही के लिए कई बार बुलाया गया है, लेकिन वे पहुंच नहीं रहे हैं। सिंचाई विभाग ने इसके लिए तहसीलदार के माध्यम से भी निशानदेही करवाने का संदेशा भेजा, लेकिन उस पर उत्तर प्रदेश प्रशासन राजी नहीं हुआ। उत्तर प्रदेश प्रशासन के अधिकारियों के कारण करोड़ों रुपये का काम बीच में रुका हुआ है। करीब डेढ़ वर्ष पहले अवैध खनन से यहां पर सीमा विवाद उपजा था। इसके बाद यूपी प्रशासन ने निशानदेही करवाई। निशानदेही में पोबारी की आबादी का काफी हिस्सा यूपी का निकला। यूपी प्रशासन ने इस संबंध में पोबारी के ग्रामीणों को नोटिस दिए थे।
यह है अभी भौगोलिक स्थिति
पोबारी गांव नदी के पार उत्तर प्रदेश है। गांव के तीन ओर उत्तर प्रदेश की भूमि है व गांव के सामने यमुना के बीच हरियाणा की भूमि है। गांव में प्रवेश यूपी के रास्तों से होता है। उत्तर प्रदेश प्रशासन ने अपनी ओर नदी किनारे पक्की पटरी बनाई है। इससे पानी यूपी की ओर रुख नहीं कर पाता, पोबारी गांव के दोनों किनारे कच्चे हैं। अब जहां सीमा पर विवाद गहराया है, वहां हिस्सा कच्चा है। यहां सीमा विवाद कई बार उपज चुका है। जिस जगह विवाद सामने आया है, वहां यूपी की साइड से आने वाली पक्की पटरी खत्म होते ही कच्चा रास्ता शुरू होता है। यह नदी के साथ कच्चा रास्ता पोबारी गांव की ओर आता है।
उच्चाधिकारियों को करवाया सूचित
सिंचाई विभाग के एक्सईएन राहिल सैनी ने बताया कि पोबारी गांव की भूमि पर विवाद के कारण विकास कार्य नहीं हो पा रहा है। करीब एक महीने से काम बंद है। उत्तर प्रदेश प्रशासन को कई बार निशानदेही के लिए बुलाया गया है, लेकिन अधिकारी नहीं आए। अब आला अधिकारियों को इसके बारे जानकारी दी गई है। संवाद
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यह है अभी भौगोलिक स्थिति
पोबारी गांव नदी के पार उत्तर प्रदेश है। गांव के तीन ओर उत्तर प्रदेश की भूमि है व गांव के सामने यमुना के बीच हरियाणा की भूमि है। गांव में प्रवेश यूपी के रास्तों से होता है। उत्तर प्रदेश प्रशासन ने अपनी ओर नदी किनारे पक्की पटरी बनाई है। इससे पानी यूपी की ओर रुख नहीं कर पाता, पोबारी गांव के दोनों किनारे कच्चे हैं। अब जहां सीमा पर विवाद गहराया है, वहां हिस्सा कच्चा है। यहां सीमा विवाद कई बार उपज चुका है। जिस जगह विवाद सामने आया है, वहां यूपी की साइड से आने वाली पक्की पटरी खत्म होते ही कच्चा रास्ता शुरू होता है। यह नदी के साथ कच्चा रास्ता पोबारी गांव की ओर आता है।
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उच्चाधिकारियों को करवाया सूचित
सिंचाई विभाग के एक्सईएन राहिल सैनी ने बताया कि पोबारी गांव की भूमि पर विवाद के कारण विकास कार्य नहीं हो पा रहा है। करीब एक महीने से काम बंद है। उत्तर प्रदेश प्रशासन को कई बार निशानदेही के लिए बुलाया गया है, लेकिन अधिकारी नहीं आए। अब आला अधिकारियों को इसके बारे जानकारी दी गई है। संवाद
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