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भाकियू प्रदेशाध्यक्ष समेत 40 किसान गिरफ्तार, नहीं रूकने दिया बाईपास निर्माण का काम
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
Updated Sat, 19 Mar 2016 01:02 AM IST
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किसान
- फोटो : yamunanagar
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जगाधरी वर्कशाप। रूलाखेड़ी गांव के पास चल रहे बाईपास निर्माण कार्य को रुकवाने पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी समेत 40 से अधिक किसानों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ये किसान बाईपास के लिए अधिग्रहित जमीन के अधिक मुआवजे की मांग पूरी न होने काम रुकवाने पहुंचे थे। इसे लेकर शुक्रवार को सुढ़ल गांव में महापंचायत के बाद किसान डीसी से मिलने उनके कार्यालय गए थे। लेकिन डीसी व नेशनल हाईवे अथारिटी के अधिकारी के आश्वासन से किसान संतुष्ट नहीं हुए थे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत सुढ़ल गांव में सुबह 11 बजे शुरू हुई। जिसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। जिला प्रशासन की ओर से महापंचायत में किसानों को बातचीत का न्यौता दिया गया। महापंचायत से किसानों का प्रतिनिधिमंडल प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने पहुंचा। जिसमें प्रदेशाध्यक्ष, किसान नेता हरपाल सिंह, बाबू राम गुंदियाना, संजू गुंदियाना, एडवोकेट साहब सिंह व रिखी राम शामिल रहे। लघु सचिवालय में डीसी डा. एसएस फुलिया, एसपी सुमेर प्रताप व एसडीएम प्रेम चंद से किसानों ने बातचीत की।
करीब एक घंटे तक किसान नेताओं की प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत चली। जिसमें अधिकारियों ने किसानों को मांगों को पूरा करवाने व विधानसभा सत्र के बाद मुख्यमंत्री से मिलवाने का भरोसा दिलाया। किसान नेता अधिकारियों के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए और महापंचायत में वापस लौट आए। महापंचायत में किसान नेताओं ने सारी चर्चा का ब्यौरा रखा और किसानों से सलाह मशवरा किया। करीब सवा तीन बजे भाकियू प्रदेशाध्यक्ष चढूनी ने महापंचायत में रूलाखेडी गांव के पास काम रोकने की घोषणा की। महापंचायत से किसानों को सीधे रूलाखेडी गांव में पहुंचने का आह्वान किया गया। इसकी भनक लगते ही जिला प्रशासन अलर्ट हो गया। किसानों से पहले ही रूलाखेड़ी गांव में एसडीएम प्रेमचंद के नेतृत्व में अन्य अधिकारी पहुंच गए। डीएसपी मदन लाल व अजय राणा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर तैनात कर दिया गया।
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रूलाखेड़ी गांव के पास से प्रशासन की ओर से भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी समेत अन्य पदाधिकारियों व किसानों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अधिकारियों ने किसानों के वाहनों को भी जब्त कर लिया। किसानों को यहां से गिरफ्तार कर सदर जगाधरी पुलिस थाना में भेज दिया गया। इसके अलावा हाइवे पर कैल गांव के पास किसानों द्वारा जाम की आशंका को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल कैल गांव में तैनात कर दिया गया।
एक सप्ताह पहले ही दिया था अल्टीमेटम:
भारतीय किसान यूनियन की ओर से एक सप्ताह पहले ही प्रशासन को अल्टीमेटम दिया जा चुका था। बीती 11 मार्च को भी भाकियू ने महापंचायत की थी और किसान प्रतिनिधिमंडल एडीसी से मिला था। एडीसी ने आश्वासन दिया था कि मंगलवार तक एनएच के अधिकारियों से मुलाकात करवा कर किसानों की मांगों को पूरा करवाया जाएगा। तब भाकियू नेताओं ने प्रशासन को मंगलवार की बजाए शुक्रवार तक का समय दिया था। साथ ही अल्टीमेटम दिया था कि शुक्रवार तक उनकी मांग पूरी न हुई तो काम रूकवा दिया जाएगा। इस दौरान प्रशासन ने न तो किसानों से मुलाकात की और न ही उन्हें एनएच के अधिकारियों से मिलवाया।
रास्ते में रोक रोक कर किया गिरफ्तार:
सुढल गांव से किसान रूलाखेडी पहुंचे। जहां पुलिस ने उनके काम रोकने से पहले ही उन्हें गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। स्थिति ये थे कि भाकियू के वाहनों को कैल व रूलाखेडी के बीच में ही रोक लिया गया और वाहनों में सवार किसानों को गिरफ्तार किया। प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूने के चालक को भी गिरफ्तार किया गया। जिस वाहन पर भी भाकियू लिखा हुआ मिला, पुलिस ने उसे जब्त कर लिया। पुलिस कर्मी किसानों के जब्त वाहनों को खुद चला कर ले गए। कई किसानों ने इधर उधर से निकलने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें भी गिरफ्तार किया। वहां से किसी को जाने नहीं दिया गया।
चार सौ एकड़ जमीन हुई थी अधिग्रहित:
नेशनल हाइवे पर बाई पास निर्माण के लिए जिले की चार सौ एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। करीब तीन साल पहले प्रदेश सरकार की ओर से जमीन का अवार्ड घोषित किया जा चुका है, जिसे किसान ले भी चुके हैं। अधिक मुआवजे की मांग को लेकर किसानों के 250 से अधिक केस आर्बिटेटर के पास भी विचाराधीन है।
कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं: प्रेमचंद
एसडीएम प्रेमचंद ने कहा कि जिले में धारा 144 लगी हुई है। ऐसे में किसान एकत्रित नहीं हो सकते हैं। साथ ही किसान हाइवे निर्माण का काम रोकना चाह रहे थे, जोकि गलत हैं। कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। जिला प्रशासन की ओर से गिरफ्तार किसानों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने व अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। किसान अपनी जमीन का अवार्ड ले चुके हैं।
107/51 के तहत कार्रवाई की: राणा
डीएसपी अजय राणा का कहना है कि कार्रवाई चल रही है। 40 से अधिक किसानों को 107/51 के तहत गिरफ्तार किया गया है। ये जमानती अपराध है। जो किसान जमानत लेंगे, उन्हें देर रात तक प्रक्रिया पूरी कर छोड़ दिया जाएगा। जो जमानत नहीं लेंगे, उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।
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निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत सुढ़ल गांव में सुबह 11 बजे शुरू हुई। जिसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। जिला प्रशासन की ओर से महापंचायत में किसानों को बातचीत का न्यौता दिया गया। महापंचायत से किसानों का प्रतिनिधिमंडल प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने पहुंचा। जिसमें प्रदेशाध्यक्ष, किसान नेता हरपाल सिंह, बाबू राम गुंदियाना, संजू गुंदियाना, एडवोकेट साहब सिंह व रिखी राम शामिल रहे। लघु सचिवालय में डीसी डा. एसएस फुलिया, एसपी सुमेर प्रताप व एसडीएम प्रेम चंद से किसानों ने बातचीत की।
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करीब एक घंटे तक किसान नेताओं की प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत चली। जिसमें अधिकारियों ने किसानों को मांगों को पूरा करवाने व विधानसभा सत्र के बाद मुख्यमंत्री से मिलवाने का भरोसा दिलाया। किसान नेता अधिकारियों के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए और महापंचायत में वापस लौट आए। महापंचायत में किसान नेताओं ने सारी चर्चा का ब्यौरा रखा और किसानों से सलाह मशवरा किया। करीब सवा तीन बजे भाकियू प्रदेशाध्यक्ष चढूनी ने महापंचायत में रूलाखेडी गांव के पास काम रोकने की घोषणा की। महापंचायत से किसानों को सीधे रूलाखेडी गांव में पहुंचने का आह्वान किया गया। इसकी भनक लगते ही जिला प्रशासन अलर्ट हो गया। किसानों से पहले ही रूलाखेड़ी गांव में एसडीएम प्रेमचंद के नेतृत्व में अन्य अधिकारी पहुंच गए। डीएसपी मदन लाल व अजय राणा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर तैनात कर दिया गया।
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रूलाखेड़ी गांव के पास से प्रशासन की ओर से भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी समेत अन्य पदाधिकारियों व किसानों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अधिकारियों ने किसानों के वाहनों को भी जब्त कर लिया। किसानों को यहां से गिरफ्तार कर सदर जगाधरी पुलिस थाना में भेज दिया गया। इसके अलावा हाइवे पर कैल गांव के पास किसानों द्वारा जाम की आशंका को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल कैल गांव में तैनात कर दिया गया।
एक सप्ताह पहले ही दिया था अल्टीमेटम:
भारतीय किसान यूनियन की ओर से एक सप्ताह पहले ही प्रशासन को अल्टीमेटम दिया जा चुका था। बीती 11 मार्च को भी भाकियू ने महापंचायत की थी और किसान प्रतिनिधिमंडल एडीसी से मिला था। एडीसी ने आश्वासन दिया था कि मंगलवार तक एनएच के अधिकारियों से मुलाकात करवा कर किसानों की मांगों को पूरा करवाया जाएगा। तब भाकियू नेताओं ने प्रशासन को मंगलवार की बजाए शुक्रवार तक का समय दिया था। साथ ही अल्टीमेटम दिया था कि शुक्रवार तक उनकी मांग पूरी न हुई तो काम रूकवा दिया जाएगा। इस दौरान प्रशासन ने न तो किसानों से मुलाकात की और न ही उन्हें एनएच के अधिकारियों से मिलवाया।
रास्ते में रोक रोक कर किया गिरफ्तार:
सुढल गांव से किसान रूलाखेडी पहुंचे। जहां पुलिस ने उनके काम रोकने से पहले ही उन्हें गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। स्थिति ये थे कि भाकियू के वाहनों को कैल व रूलाखेडी के बीच में ही रोक लिया गया और वाहनों में सवार किसानों को गिरफ्तार किया। प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूने के चालक को भी गिरफ्तार किया गया। जिस वाहन पर भी भाकियू लिखा हुआ मिला, पुलिस ने उसे जब्त कर लिया। पुलिस कर्मी किसानों के जब्त वाहनों को खुद चला कर ले गए। कई किसानों ने इधर उधर से निकलने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें भी गिरफ्तार किया। वहां से किसी को जाने नहीं दिया गया।
चार सौ एकड़ जमीन हुई थी अधिग्रहित:
नेशनल हाइवे पर बाई पास निर्माण के लिए जिले की चार सौ एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। करीब तीन साल पहले प्रदेश सरकार की ओर से जमीन का अवार्ड घोषित किया जा चुका है, जिसे किसान ले भी चुके हैं। अधिक मुआवजे की मांग को लेकर किसानों के 250 से अधिक केस आर्बिटेटर के पास भी विचाराधीन है।
कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं: प्रेमचंद
एसडीएम प्रेमचंद ने कहा कि जिले में धारा 144 लगी हुई है। ऐसे में किसान एकत्रित नहीं हो सकते हैं। साथ ही किसान हाइवे निर्माण का काम रोकना चाह रहे थे, जोकि गलत हैं। कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। जिला प्रशासन की ओर से गिरफ्तार किसानों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने व अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। किसान अपनी जमीन का अवार्ड ले चुके हैं।
107/51 के तहत कार्रवाई की: राणा
डीएसपी अजय राणा का कहना है कि कार्रवाई चल रही है। 40 से अधिक किसानों को 107/51 के तहत गिरफ्तार किया गया है। ये जमानती अपराध है। जो किसान जमानत लेंगे, उन्हें देर रात तक प्रक्रिया पूरी कर छोड़ दिया जाएगा। जो जमानत नहीं लेंगे, उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।