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अंतिम क्षण में भी नाम लेने से प्रभु करते हैं उद्धार : प्रमोद
Mon, 24 Feb 2025 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 24 Feb 2025 12:11 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। कैंप की रणजीत कॉलोनी में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन प्रमोद कृष्णा महाराज ने अजामिल का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण कुल में पैदा होकर अजामिल बुरी संगत में पड़ गया। वह शराबी और जुआरी बन कर बदनाम हो गया। परंतु बेटे का नाम नारायण रखा और अपने अंतिम क्षण में बेटे का नाम लेने से उसका उद्धार हो गया।
उन्होंने कहा कि नारायण नाम ही मोक्ष है और नारायण लीला सुनने से परधाम की प्राप्ति होती है। उन्होंने समुद्र मंथन की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि समुद्र मंथन के दौरान 14 रत्न निकले। सभी रत्नों पर सुर-असुर अपना अधिकार बताने लगे। परंतु जब हलाहल विष निकला तो हाहाकार मच गया। फिर आदि देव महादेव ने विष पान कर और सृष्टि की रक्षा की।
उन्होंने गज व ग्रह का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने कहा कि केवल मनुष्यों का ही नहीं बल्कि परमात्मा सभी जीवों का उद्धार करते हैं। एक बार गज झुंड पानी पीने नदी में गया। एक गज का मगरमच्छ ने पांव पकड़ लिया। जिस पर गज के परिवार ने उसका साथ छोड़ दिया। जिस पर गज ने परमात्मा को आवाज लगाई और ईश्वर ने उसकी जान बचाई।
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अगले प्रसंग में प्रभु श्रीराम के जीवन के बारे में बताया। राजकुमार राम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बनने की कथा सुनाई। इसके अलावा श्रीकृष्ण का जन्म व उनकी लीलाओं के बारे बताया। कथा में भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। इस दौरान श्याम दास महाराज, भगत दास महाराज, जयप्रकाश कांबोज, नरेश, सतीश, उधम सिंह, नीतेश, कुणाल कांबोज आदि उपस्थित रहे।
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जगाधरी। कैंप की रणजीत कॉलोनी में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन प्रमोद कृष्णा महाराज ने अजामिल का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण कुल में पैदा होकर अजामिल बुरी संगत में पड़ गया। वह शराबी और जुआरी बन कर बदनाम हो गया। परंतु बेटे का नाम नारायण रखा और अपने अंतिम क्षण में बेटे का नाम लेने से उसका उद्धार हो गया।
उन्होंने कहा कि नारायण नाम ही मोक्ष है और नारायण लीला सुनने से परधाम की प्राप्ति होती है। उन्होंने समुद्र मंथन की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि समुद्र मंथन के दौरान 14 रत्न निकले। सभी रत्नों पर सुर-असुर अपना अधिकार बताने लगे। परंतु जब हलाहल विष निकला तो हाहाकार मच गया। फिर आदि देव महादेव ने विष पान कर और सृष्टि की रक्षा की।
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उन्होंने गज व ग्रह का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने कहा कि केवल मनुष्यों का ही नहीं बल्कि परमात्मा सभी जीवों का उद्धार करते हैं। एक बार गज झुंड पानी पीने नदी में गया। एक गज का मगरमच्छ ने पांव पकड़ लिया। जिस पर गज के परिवार ने उसका साथ छोड़ दिया। जिस पर गज ने परमात्मा को आवाज लगाई और ईश्वर ने उसकी जान बचाई।
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अगले प्रसंग में प्रभु श्रीराम के जीवन के बारे में बताया। राजकुमार राम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बनने की कथा सुनाई। इसके अलावा श्रीकृष्ण का जन्म व उनकी लीलाओं के बारे बताया। कथा में भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। इस दौरान श्याम दास महाराज, भगत दास महाराज, जयप्रकाश कांबोज, नरेश, सतीश, उधम सिंह, नीतेश, कुणाल कांबोज आदि उपस्थित रहे।