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डाक्टरों ने छह घंटे बंद रखी ओपीडी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 01:21 AM IST
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Doctors kept OPD closed for six hours, Yamunanagar
ज्ञापन सौंपते आईएमए चिकित्सक। संवाद - फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर चिकित्सकों ने शुक्रवार को राष्ट्रीय विरोध दिवस मनाया। आईएमए चिकित्सकों ने सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी बंद रखी। ऐसे में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि इमरजेंसी ओपीडी सुचारू रही। चिकित्सकों ने कहा कि हाल ही में असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, यूपी, कर्नाटक और कई अन्य स्थानों पर पिछले दो हफ्तों में कोविड ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों पर हिंसा की श्रृंखला को देखकर वह दुखी हैं। चिकित्सकों ने सेव द सेवियर्स का नारा दिया।
चिकित्सकों ने छह घंटे तक ओपीडी बंद रखकर कोरोना ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों पर हो रहे हमले का विरोध किया। हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए केंद्रीय सुरक्षा कानून की मांग उठाई गई। हालांकि इस दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रही। आईएमए की जिला प्रधान डॉ. सुनीला सोनी ने कहा कि सवा साल से दुनिया कोविड से जूझ रही है। चिकित्सक फ्रंटलाइन वर्कर बनकर कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद डाक्टरों पर हमले हो रहे हैं। यह गलत है। स्टेट के अपने कानून है। ऐसी हिंसा करने वालों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हो पाती। इसके लिए पीएनडीटी एक्ट की तरह केंद्रीय कानून होना चाहिए। जिसमें अस्पतालों की सुरक्षा व जल्द से जल्द हिंसा करने वाले आरोपियों पर कार्रवाई करने की मांग की।
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पूर्व आईएमए प्रधान डॉ. योगेश जिंदल का कहना है कि कोरोना को सरकार ने राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया। इस दौरान किसी भी डाक्टर के साथ मारपीट को राजद्रोह माना जाना चाहिए। इसके बावजूद डाक्टरों के साथ मारपीट हो रही है। जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। हालात यह है कि अब चिकित्सक मरीज को देखने से घबरा रहे हैं। यदि मरीज के स्वजन ऊंची आवाज में बात करते हैं, तो डॉक्टर उसे रेफर कर देता है। जबकि हम हर मरीज की जान बचाने चाहते हैं। चिकित्सकों ने कहा कि ऐसे दुखद कृत्यों को प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के ध्यान में लाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन बहुत राहत नहीं मिली है।
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