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रावी से लेकर यमुना तक सिख राज की स्थापना बाबा बंदा सिंह बहादुर की बदौलत : दुष्यंत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Mar 2020 12:18 AM IST
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deputy cm gave the message of brotherhood
deputy cm gave the message of brotherhood - फोटो : Yamuna Nagar
लोहगढ़ की ऐतिहासिक धरा का इतिहास बहुत गौरवशाली है। एसजीपीसी ने किले को गुरुद्वारा साहिब में तबदील कर इतिहास को आगे ले जाने का काम किया है। बाबा बंदा सिंह बहादुर की जब भी बात की जाती है तो गुरु के प्रति श्रद्धा व अटूट विश्वास याद आता है। याद आता है जिन्होंने मुगलों के साथ लड़कर सिखी को जिंदा किया और औरंगजेब की सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। उनकी शहादत को कभी भूलाया नहीं जा सकता। यह बात प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह चौटाला ने सिख पंथ के महान बाबा बंदा सिंह बहादुर की पहली सिख राजधानी किला लोहगढ़ साहिब में सालाना गुरमत समागम में कही। डिप्टी सीएम ने अपना संबोधन पंजाबी में दे भाईचारे का संदेश दिया। समागम में क्षेत्र की संगत ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। एसजीपीसी प्रधान गोबिंद सिंह लौगेंवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। एसजीपीसी के पूर्व मीत प्रधान सरदार बलदेव सिंह कायमपुर, एसजीपीसी सदस्य बीबी मंजीर कौर गधौला व अन्य सदस्यों ने मुख्यातिथि को सिरोपा व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि रावी से लेकर यमुना तक सिख राज की स्थापना बाबा बंदा सिंह बहादुर की बदौलत से हुई। एसजीपीसी ने बाबा बंदा सिंह बहादुर की यादगार व इतिहास को संजोकर महान कार्य किया है। उन्होंने मुगलों से लड़कर सिखी बचाई। आज के समय में जरूरत है युवा पीढ़ी को इतिहास के बारे में अवगत करवाने की। उस समय कठिन मुश्किल परिस्थितियों में लड़ाई लड़ी। युवा पीढ़ी को ऐसे महान योद्धा के जीवन से प्ररेणा लेकर कार्य करना चाहिए।
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एसजीपीसी प्रधान लौंगेवाल ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर की याद में लोहगढ़ साहिब में किलानुमा गुरूद्वारा व यूजियम बनाया जाएगा। यह स्थान बहुत महान है जिसे सिख कौम की पहली राजधानी के बारे में स्थापित किया है जिससे पूरे विश्व के सिखों की गहरी आस्था जुड़ी है। सिख कौम का लंबा व महान इतिहास है कौम के शहीदों के बारे में युवा वर्ग को समय समय पर अवगत करवाना जरूरी है। एसजीपीसी की ओर से निर्माण के लिए बजट की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। जिसको पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़ा दिया जाएगा। उन्होंने बाबा बंदा सिंह बहादुर की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए युवा पीढी को सिख इतिहास की जानकारी दी। एसजीपीसी के पूर्व मीत प्रधान बलदेव सिंह ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिस जगह पर गुरुद्वारा का निर्माण करवाया जा रहा है यहां बाबा बंदा सिंह बहादुर की कोट लगती थी। बाबा बंदा सिंह बहादुर युद्ध के दौरान पहले तीन दिन व बाद में 67 दिन रुके यही से सिख साम्राज्य की राजधानी का सिक्का जारी किया। इस मौके पर ढाडी जत्था बलबीर सिंह पारस, हजूरी रागी जत्था भाई गुरविन्द्र सिंह, कविसर जत्था भगत सिंह गुरदास पुर व कीर्तन मंडली ने गुरु की वाणी का प्रचार किया। इस मौके पर गुरू का अटूट लंगर बरताया गया। जजपा के प्रदेश अध्यक्ष निशान सिंह, उपाध्यक्ष बलिन्द्र सिंह लंडा, नरेन्द्र सिंह, नरेन्द्र कौर, जसवंत सिंह मंधार, हरमनजीत सिंह, बलजीत सिंह, सर्वजीत सिंह शाहपुर, बलदेव सिंह खालसा, गुरदीप सिंह भानोखेड़ी, जसपाल भट्टी, शिवचरण सिंह ,पूर्व विधायक अर्जुन सिंह, भूपेन्द्र सिंह असंध , बलदेव सिंह खालसा सहित सिख संगत मौजूद रहे।
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