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Yamuna Nagar News: हिमाचल की मंजूरी न मिलने से लटकी डैम परियोजना

Sat, 05 Jul 2025 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sat, 05 Jul 2025 01:09 AM IST
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Dam project stuck due to lack of approval from Himachal
संवाद न्यूज एजेंसी
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प्रतापनगर (यमुनानगर)। हरियाणा व हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे हरियाणा के अंतिम गांव कलेसर के नजदीक 6,900 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बांध का काम ठंडे बस्ते में जाता दिखाई दे रहा है। इसका मुख्य कारण हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से मंजूरी न देना बताया जा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड की तरफ से मंजूरी मिल चुकी है। सिंचाई विभाग हिमाचल प्रदेश से मंजूरी मिलने की इंतजार कर रहा है।



यहां बनने वाले डैम के लिए 5,400 एकड़ भूमि चिन्हित की जा चुकी है। इसके लिए हरियाणा के चार व हिमाचल प्रदेश के पांच गांवों को विस्थापित करने की योजना हैं। केंद्रीय मंत्री एवं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने कार्यकाल में इस डैम परियोजना के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। उनके बदलते ही डैम प्रक्रिया की गतिविधि भी रुक गई। इतना ही नहीं अभी पांच राज्यों- हरियाणा, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान को एमओयू साइन करना है।
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इसके अलावा हरियाणा और हिमाचल को कई अन्य कदम भी उठाने हैं। इनमें प्रभावित गांवों के लोगों को अन्य स्थानों पर बसाया जाना शामिल है। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को तीन वर्ष पूर्व हथिनी कुंड बैराज से करीब पांच किलोमीटर पर हरियाणा-हिमाचल प्रदेश सीमा पर डैम बनाने की संभावना का पता लगाने के निर्देश दिए थे। डैम निर्माण पर दो वर्ष पहले 6,134 से 6,900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। वर्तमान में खर्च करीब 7,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
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विस्थापित किए जाएंगे गांव







यहां बनने वाले बांध में जाने वाली जमीन से कलेसर के साथ लगते चार व हिमाचल प्रदेश के पांच गांव शामिल हैं। जिन्हें विस्थापित करना पड़ेगा। विस्थापित होने वाले गांवों के लोग मुआवजे और विस्थापन से होने वाली समस्याओं से चिंतित हैं। वहीं, कलेसर नेशनल पार्क और वन्य जीव अभ्यारण के जलमग्न होने का खतरा भी बढ़ेगा। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने परियोजना पर फिलहाल रोक लगा दी है। डैम के लिए कलेसर नेशनल पार्क में चार बांधों के निर्माण पर भी रोक लग गई है। केंद्र और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि चिक्कन, कांसली, खिलांवाला और आमवाली नामक बांध अपने इच्छित उद्देश्यों को प्राप्त नहीं कर पाएंगे और राष्ट्रीय उद्यान के वन्य जीवों जैव विविधता और पारिस्थितिक तंत्र के लिए हानिकारक साबित होंगे। इसके अलावा इस अभ्यारण क्षेत्र में आठ और बांधों के निर्माण का प्रस्ताव है, जो अभी वन और वन्य प्राणी जीव मंजूरी के चरण में है। रिपोर्ट में यमुना नदी के पास अवैध खनन, वन्य जीव और पर्यावरण को खतरा बताया गया है।









हिमाचल प्रदेश सरकार को एनओसी के लिए लिखा है। एनओसी के बाद एमओयू साइन होगा, जिसके बाद काम में तेजी आएगी। डैम बनने से सिंचाई विभाग को भी काफी लाभ होगा। आरएस मित्तल, अधीक्षक अभियंता सिंचाई विभाग यमुनानगर।
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