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पर्यावरण कोर्ट ने शिकार के दोषियों को सुनाई तीन साल की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका
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पर्यावरण कोर्ट ने शिकार के दोषियों को सुनाई तीन साल की सजा, 10 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका
खिजराबाद। पर्यावरण कोर्ट कुरुक्षेत्र ने आठ साल बाद शिकार के आरोपियों को सजा सुनाई है। दोषियों को तीन साल सजा साथ ही दस हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। मुख्य आरोपी नवीन निवासी करनाल कोर्ट से भगौड़ा घोषित किया जा चुका था जिसको कोर्ट ने सजा सुनाई है। शिकार के बाकी आरोपी पहले ही जेल में सजा काट चुके हैं। मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 में कलेसर रेंज के अंतर्गत आने वाली बीट और वन्य प्राणी विभाग की रेंज डारपुर में लगभग छह-सात लोगों ने सांभर का शिकार किया था। सांभर के शिकार के मामले में दोषियों पर पर्यावरण कोर्ट कुरुक्षेत्र में केस दायर किया गया और लगभग आठ साल केस चलने के बाद दोषियों को सजा सुनाई गई, जिनमें नवीन निवासी करनाल कोर्ट में पेश नहीं हुआ और न ही किसी तारीख पर हाजिर हुआ। तारीखों पर हाजिर न होने के कारण कोर्ट ने नवीन को भगौड़ा घोषित कर दिया था। वन्य प्राणी विभाग के जिला निरीक्षक राजेश चहल ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2011 में कुछ लोग रात के समय ट्रैक्टर लेकर जंगल से वापिस आ रहे थे। गश्त कर रहे कर्मचारियों ने जब उनको रोका तो उनके पास से मृत सांभर का शरीर प्राप्त हुआ। कर्मचारियों ने मौके से ट्रैक्टर की लिप्ट पर रखे मृत सांभर के शरीर को बरामद कर लिया और दोषियों से एक गन, ट्रैक्टर और ट्राली को भी जब्त कर लिया। वन्य प्राणी विभाग के कर्मचारियों ने मौके से चार-पांच लोगों को पकड़ लिया और दो अन्य लोग भागने में सफल हो गए। सभी के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया गया। लगभग पांच साल केस चलने के बाद सभी आरोपियों पर दोष सिद्ध हो गया और सबको जेल हो गई। सभी ने अपनी सजा काटी और अपने वाहन को भी सुपरदारी पर छुड़वा लिया। वन्य प्राणी विभाग के जिला निरीक्षक ने बताया कि नवीन निवासी करनाल कोर्ट में किसी भी तारीख पर पेश नहीं हुआ और कोर्ट ने उसे भगौड़ा घोषित कर दिया। भगौड़ा घोषित होने के बाद पर्यावरण कोर्ट ने नवीन निवासी करनाल को तीन साल की सजा और दस हजार रुपये का जुर्माना सुनाया है। राजेश चहल ने बताया कि निवर्तमान वन्य प्राणी निरीक्षक सतपाल धीमान द्वारा पर्यावरण कोर्ट में यह केस दायर किया गया था। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में वन्य प्राणियों के शिकार पर पूर्णत प्रतिबंध है और वन्य प्राणियों के शिकार पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है। क्षेत्र में शिकार की गतिविधियों पर विभाग की पैनी नजर है और किसी भी सूरत में वन्य प्राणियों का शिकार नहीं होने दिया जाएगा और क्षेत्र में वन्य प्राणियों के शिकार पर पूर्णत अंकुश है।
खिजराबाद। पर्यावरण कोर्ट कुरुक्षेत्र ने आठ साल बाद शिकार के आरोपियों को सजा सुनाई है। दोषियों को तीन साल सजा साथ ही दस हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। मुख्य आरोपी नवीन निवासी करनाल कोर्ट से भगौड़ा घोषित किया जा चुका था जिसको कोर्ट ने सजा सुनाई है। शिकार के बाकी आरोपी पहले ही जेल में सजा काट चुके हैं। मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 में कलेसर रेंज के अंतर्गत आने वाली बीट और वन्य प्राणी विभाग की रेंज डारपुर में लगभग छह-सात लोगों ने सांभर का शिकार किया था। सांभर के शिकार के मामले में दोषियों पर पर्यावरण कोर्ट कुरुक्षेत्र में केस दायर किया गया और लगभग आठ साल केस चलने के बाद दोषियों को सजा सुनाई गई, जिनमें नवीन निवासी करनाल कोर्ट में पेश नहीं हुआ और न ही किसी तारीख पर हाजिर हुआ। तारीखों पर हाजिर न होने के कारण कोर्ट ने नवीन को भगौड़ा घोषित कर दिया था। वन्य प्राणी विभाग के जिला निरीक्षक राजेश चहल ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2011 में कुछ लोग रात के समय ट्रैक्टर लेकर जंगल से वापिस आ रहे थे। गश्त कर रहे कर्मचारियों ने जब उनको रोका तो उनके पास से मृत सांभर का शरीर प्राप्त हुआ। कर्मचारियों ने मौके से ट्रैक्टर की लिप्ट पर रखे मृत सांभर के शरीर को बरामद कर लिया और दोषियों से एक गन, ट्रैक्टर और ट्राली को भी जब्त कर लिया। वन्य प्राणी विभाग के कर्मचारियों ने मौके से चार-पांच लोगों को पकड़ लिया और दो अन्य लोग भागने में सफल हो गए। सभी के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया गया। लगभग पांच साल केस चलने के बाद सभी आरोपियों पर दोष सिद्ध हो गया और सबको जेल हो गई। सभी ने अपनी सजा काटी और अपने वाहन को भी सुपरदारी पर छुड़वा लिया। वन्य प्राणी विभाग के जिला निरीक्षक ने बताया कि नवीन निवासी करनाल कोर्ट में किसी भी तारीख पर पेश नहीं हुआ और कोर्ट ने उसे भगौड़ा घोषित कर दिया। भगौड़ा घोषित होने के बाद पर्यावरण कोर्ट ने नवीन निवासी करनाल को तीन साल की सजा और दस हजार रुपये का जुर्माना सुनाया है। राजेश चहल ने बताया कि निवर्तमान वन्य प्राणी निरीक्षक सतपाल धीमान द्वारा पर्यावरण कोर्ट में यह केस दायर किया गया था। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में वन्य प्राणियों के शिकार पर पूर्णत प्रतिबंध है और वन्य प्राणियों के शिकार पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है। क्षेत्र में शिकार की गतिविधियों पर विभाग की पैनी नजर है और किसी भी सूरत में वन्य प्राणियों का शिकार नहीं होने दिया जाएगा और क्षेत्र में वन्य प्राणियों के शिकार पर पूर्णत अंकुश है।