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दलित युवती से दुष्कर्म करने वाले दोषी युवक को दस साल की सजा, तीस हजार जुर्माना
Updated Thu, 14 Dec 2017 01:02 AM IST
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दलित युवती से दुष्कर्म पर युवक को दस साल की सजा, तीस हजार जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। थाना सदर यमुनानगर क्षेत्र में जुलाई 2015 में दलित युवती को अगवा कर दुष्कर्म करने के मामले में अतिरिक्त सेशन जज नरेश कात्याल की अदालत ने आरोपी को दोषी पाया है। इस पर कोर्ट ने युवक को दस साल की सजा सुनाई है और 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। मामले में सबूतों के अभाव में अन्य दो आरोपियों को बरी कर दिया गया है।
थाना सदर यमुनानगर के एक गांव के दलित व्यक्ति ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि सात जुलाई 2015 को उसकी 24 वर्षीय बेटी को रादौर के गांव सागड़ी निवासी अमरदीप अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर अगवा करके कहीं ले गया। जब उसकी बेटी वापस आई तो वह घायल अवस्था में थी। उन्होंने लड़की को अस्पताल में भर्ती कराया और इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने सिविल अस्पताल यमुनानगर में आकर लड़की के बयान लिए। लड़की ने अपने बयान में बताया कि उसके साथ आरोपी अमरदीप ने दुष्कर्म किया। विरोध करने पर उससे मारपीट की और जातिसूचक शब्द कहे। युवती का मेडिकल कराने पर उससे दुष्कर्म की पुष्टि हुई। पुलिस ने मामले में उस समय तीनों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 365, 376 व एससीएसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। इसके बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, तब से मामला कोर्ट में विचाराधीन था। करीब ढाई साल तक कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद अतिरिक्त सेशन जज नरेश कात्याल की अदालत ने रादौर के गांव सागड़ी निवासी अमरदीप को दोषी पाया और आईपीसी की धारा 376 के तहत दस वर्ष कारावास व 25 हजार रुपये जुर्माना, धारा 365 के तहत तीन वर्ष कैद व तीन हजार रुपये जुर्माना और एससीएसटी एक्ट 1989 के तहत दोषी को दो वर्ष कैद और दो हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। सभी सजाएं साथ साथ चलेंगी। इसके अलावा जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान रखा गया। मामले में अन्य दो आरोपियों के खिलाफ परिजन पुख्ता सबूत नहीं दे पाए। सबूतों के अभाव में कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। थाना सदर यमुनानगर क्षेत्र में जुलाई 2015 में दलित युवती को अगवा कर दुष्कर्म करने के मामले में अतिरिक्त सेशन जज नरेश कात्याल की अदालत ने आरोपी को दोषी पाया है। इस पर कोर्ट ने युवक को दस साल की सजा सुनाई है और 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। मामले में सबूतों के अभाव में अन्य दो आरोपियों को बरी कर दिया गया है।
थाना सदर यमुनानगर के एक गांव के दलित व्यक्ति ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि सात जुलाई 2015 को उसकी 24 वर्षीय बेटी को रादौर के गांव सागड़ी निवासी अमरदीप अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर अगवा करके कहीं ले गया। जब उसकी बेटी वापस आई तो वह घायल अवस्था में थी। उन्होंने लड़की को अस्पताल में भर्ती कराया और इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने सिविल अस्पताल यमुनानगर में आकर लड़की के बयान लिए। लड़की ने अपने बयान में बताया कि उसके साथ आरोपी अमरदीप ने दुष्कर्म किया। विरोध करने पर उससे मारपीट की और जातिसूचक शब्द कहे। युवती का मेडिकल कराने पर उससे दुष्कर्म की पुष्टि हुई। पुलिस ने मामले में उस समय तीनों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 365, 376 व एससीएसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। इसके बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, तब से मामला कोर्ट में विचाराधीन था। करीब ढाई साल तक कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद अतिरिक्त सेशन जज नरेश कात्याल की अदालत ने रादौर के गांव सागड़ी निवासी अमरदीप को दोषी पाया और आईपीसी की धारा 376 के तहत दस वर्ष कारावास व 25 हजार रुपये जुर्माना, धारा 365 के तहत तीन वर्ष कैद व तीन हजार रुपये जुर्माना और एससीएसटी एक्ट 1989 के तहत दोषी को दो वर्ष कैद और दो हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। सभी सजाएं साथ साथ चलेंगी। इसके अलावा जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान रखा गया। मामले में अन्य दो आरोपियों के खिलाफ परिजन पुख्ता सबूत नहीं दे पाए। सबूतों के अभाव में कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
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