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बिना बताए महिला को बना लिया फर्म में 50 फीसदी का हिस्सेदार
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माइनिंग के खेल में फर्जी कागजातों के आधार पर बनाई कंपनियों के प्रमोटर मिलीभगत करके सरकार के राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे हैं। साल 2018 में जिस बालाजी इंफ्रा को जयरामपुर जागीर का माइनिंग ब्लॉक अलॉट किया था, उस ब्लॉक से सरकार को दस साल में साढ़े चालीस करोड़ रुपये का राजस्व रॉयल्टी के रूप में प्राप्त होना था। ब्लॉक अलॉट होने के बाद दो साल में भी कांट्रेक्टर इंवायरमेंट क्लियरेंस नहीं करवा पाएं। जिसके चलते पहले दो साल में सरकार को छह करोड़ 20 लाख रुपये का राजस्व नहीं मिल पाया।
उत्तराखंड में देहरादून के डालनवाला निवासी महिला आसमां प्रवीण खां ने बुडिया थाने में दर्ज कराई एफआईआर में साफ तौर पर कहा है कि बिना बताएं किसी फर्म में 50 फीसदी की हिस्सेदार बनाकर माइनिंग कांट्रेक्ट हासिल करना एक षड़यंत्र, धोखाधड़ी के तहत राज्य सरकार को गुमराह करने और वित्तीय हानि पहुंचाने की मंशा प्रतीत होती है। आरोपी राधिका गुप्ता, राधेश्याम वाधवा, विवेक बंसल व मनोज कुमार ने उसके नाम के फर्जी दस्तावेज सरकार के सामने प्रस्तुत कर खुद को फायदा और सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाने का अपराध किया है।
सरकार को इस तरह मिलनी है सालाना रॉयल्टी
पहले साल-3.10 करोड़
दूसरे साल-3.10 करोड़
तीसरे साल-3.10 करोड़
चौथे साल-3 करोड़ 88 लाख 12500
पांचवें साल-3 करोड़ 88 लाख 12500
छठें साल-3 करोड़ 88 लाख 12500
सातवें साल-4 करोड़ 85 लाख 15625
आठवें साल-4 करोड़ 85 लाख 15625
नौवें साल-4 करोड़ 85 लाख 15625
दसवें साल-6 करोड़ 6 लाख 44535
बॉक्स
फिजिकल और पुलिस वेरिफिकेशन की जाएं
-हरियाणा एंटी करप्शन सोसायटी के अध्यक्ष वरयाम सिंह का कहना है कि यमुनानगर में माइनिंग का बहुत बड़ा घोटाला है। इस तरह के कई अन्य ठेके भी फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर मिल सकते हैं। इसका मकसद ये होता है कि बड़े लोग अपने किसी कारिंदे को अपनी फर्म में 50 फीसदी या इससे ज्यादा का हिस्सेदार बना लेते हैं और घोटाला करके खुद बच जाते हैं और मामूली व्यक्ति को उनके किए की सजा भुगतनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि जिले के माइनिंग ब्लॉक के ठेकेदार, कारिंदे और कर्मचारियों की फिजिकल और पुलिस वेरिफिकेशन की जानी चाहिए। इस बाबत उन्होंने पुलिस में शिकायत भी की थी, लेकिन पुलिस और माइनिंग विभाग के अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते। माइनिंग को लेकर मैंने हाई कोर्ट में जनहित याचिका भी लगा रखी है। समय समय पर कोर्ट व एनजीटी की तरफ से आदेश जारी किए जाते हैं। जिस पर कुछ दिन तो अधिकारी सख्ती बरतते हैं, लेकिन उसके बाद फिर से खनन ठेकेदार हावी हो जाते हैं।
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उत्तराखंड में देहरादून के डालनवाला निवासी महिला आसमां प्रवीण खां ने बुडिया थाने में दर्ज कराई एफआईआर में साफ तौर पर कहा है कि बिना बताएं किसी फर्म में 50 फीसदी की हिस्सेदार बनाकर माइनिंग कांट्रेक्ट हासिल करना एक षड़यंत्र, धोखाधड़ी के तहत राज्य सरकार को गुमराह करने और वित्तीय हानि पहुंचाने की मंशा प्रतीत होती है। आरोपी राधिका गुप्ता, राधेश्याम वाधवा, विवेक बंसल व मनोज कुमार ने उसके नाम के फर्जी दस्तावेज सरकार के सामने प्रस्तुत कर खुद को फायदा और सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाने का अपराध किया है।
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सरकार को इस तरह मिलनी है सालाना रॉयल्टी
पहले साल-3.10 करोड़
दूसरे साल-3.10 करोड़
तीसरे साल-3.10 करोड़
चौथे साल-3 करोड़ 88 लाख 12500
पांचवें साल-3 करोड़ 88 लाख 12500
छठें साल-3 करोड़ 88 लाख 12500
सातवें साल-4 करोड़ 85 लाख 15625
आठवें साल-4 करोड़ 85 लाख 15625
नौवें साल-4 करोड़ 85 लाख 15625
दसवें साल-6 करोड़ 6 लाख 44535
बॉक्स
फिजिकल और पुलिस वेरिफिकेशन की जाएं
-हरियाणा एंटी करप्शन सोसायटी के अध्यक्ष वरयाम सिंह का कहना है कि यमुनानगर में माइनिंग का बहुत बड़ा घोटाला है। इस तरह के कई अन्य ठेके भी फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर मिल सकते हैं। इसका मकसद ये होता है कि बड़े लोग अपने किसी कारिंदे को अपनी फर्म में 50 फीसदी या इससे ज्यादा का हिस्सेदार बना लेते हैं और घोटाला करके खुद बच जाते हैं और मामूली व्यक्ति को उनके किए की सजा भुगतनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि जिले के माइनिंग ब्लॉक के ठेकेदार, कारिंदे और कर्मचारियों की फिजिकल और पुलिस वेरिफिकेशन की जानी चाहिए। इस बाबत उन्होंने पुलिस में शिकायत भी की थी, लेकिन पुलिस और माइनिंग विभाग के अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते। माइनिंग को लेकर मैंने हाई कोर्ट में जनहित याचिका भी लगा रखी है। समय समय पर कोर्ट व एनजीटी की तरफ से आदेश जारी किए जाते हैं। जिस पर कुछ दिन तो अधिकारी सख्ती बरतते हैं, लेकिन उसके बाद फिर से खनन ठेकेदार हावी हो जाते हैं।
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