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Yamuna Nagar News: कांग्रेस विधायक रेनू बाला ने की शिकायत, मुझे एजेंडा नहीं भेजते अधिकारी
Sat, 21 Jun 2025 02:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 21 Jun 2025 02:31 AM IST
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यमुनानगर। जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक शुक्रवार को जिला सचिवालय में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में रखे गए कुल 21 मामलों में से मंत्री ने 15 का समाधान कर दिया, वहीं छह मामलों को जांच के चलते आगामी बैठक तक लंबित रखा गया। वहीं बैठक में देरी से पहुंची साढौरा से कांग्रेस विधायक रेनू बाला ने बैठक में मंत्री से जिला प्रशासन की शिकायत की। रेनू बाला ने आरोप लगाया कि उन्हें जिला प्रशासन की तरफ से न तो बैठक का एजेंडा भेजा जाता है और न ही सूचना दी जा रही है। उन्हें जनता ने चुन कर भेजा है। वह विपक्ष की विधायक हैं, शायद प्रशासन इसलिए उन्हें बैठक में नहीं बुला रहा। जिस पर मंत्री ने कहा कि विपक्ष वाली कोई बात नहीं है। वह जब भी यमुनानगर आते हैं तो खुद आपको फोन करते हैं। उन्होंने डीसी पार्थ गुप्ता से कहा कि वह विधायक को एजेंडा जरूर भेजें और फोन भी करें।
बैठक में इस्माइलपुर गांव के पिछली बैठक से लंबित मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने पर मंत्री ने एतराज जताया। गांव के सरपंच रिशिपाल ने शिकायत देकर सड़क से अवैध कब्जा हटाकर नाला बनाने की मांग की थी। इस पर बीडीपीओ कार्तिक चौहान ने अपनी रिपोर्ट देते हुए कहा कि नौ लोगों को कब्जा हटाने के नोटिस दिए गए थे। इसके बाद 29 मई को कब्जे हटाने थे, लेकिन ड्यूटी मजिस्ट्रेट के उपलब्ध न होने से कब्जे नहीं हटाए जा सके। जिस पर मंत्री ने चेताया कि हर हाल में कब्जा हटना चाहिए। ड्यूटी मजिस्ट्रेट को बुखार है या पेट में दर्द हो गया था, ऐसे बहाने नहीं चलेंगे।
21 साल बाद बताया दुकान पर कब्जा कर लिया
संतपुरा रोड निवासी गुरचरण सिंह ने मंत्री को शिकायत दी थी कि साल 1977 में उसे इंदिरा मार्केट में रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक नगर निगम से खुली बोली में दुकान नंबर 22 अलॉट की गई थी। कुछ साल बाद उसका स्वास्थ्य खराब होने लगा। उसे पता चला कि उसके छोटे भाई की पत्नी ने अपने भाई के साथ मिलकर दुकान अपने नाम करवा ली। इसलिए उसे दुकान वापस दी जाए। इस पर नगर निगम अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में मंत्री को बताया कि मई 2003 में गुरचरण सिंह द्वारा नोटरी से सत्यापित शपथ पत्र दिया गया था कि यह दुकान भगवान सिंह के नाम ट्रांसफर कर दी जाए। 2010 में यह दुकान मनमोहन सिंह से सुरेंद्र कौर के नाम ट्रांसफर कर दी गई। 14 साल से सुरेंद्र कौर ही दुकान का किराया दे रही है। 2024 में सुरेंद्र कौर ने मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना के तहत दुकान खरीदने के लिए आवेदन किया था। ऐसे में जांच से लग रहा है कि गुरचरण सिंह दुकान खरीदने की नीयत से अब ऐसे आरोप लगा रहे हैं। गुरचरण सिंह के बेटे ने आरोप लगाया कि शपथ पत्र पर उन्होंने साइन नहीं किए, यह फर्जी साइन हैं। इस पर मंत्री कृष्ण बेदी ने गुरचरण सिंह व बेटे से कहा कि वह इस मामले की इंक्वायरी करवा देंगे। लेकिन बात बहुत दूर तक जाएगी। इसलिए वह अच्छी तरह से विचार विमर्श कर लें कि उन्हें जांच करवानी है या फिर शिकायत वापस लेनी है। यदि वह झूठ बोल रहे हैं तो कार्रवाई शिकायत करने वालों पर भी होगी। संवाद
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एसआईटी से कराई जाएगी जांच
फाइब्रियम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमन सिंगला ने शिकायत दी कि वर्ष 2021 में उसके साथ चार लोगों ने उसके साथ करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने उसे चिकोरी से इनुलिन और एफओएस के निर्माण के लिए स्वदेशी तकनीकी विकसित करने की बात कही थी। एमओयू साइन होने के बाद भी उन्हें इसकी तकनीक नहीं दी गई। मंत्री ने इस मामले की जांच एसआईटी बनाकर कराने के आदेश दिए।
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बैठक में इस्माइलपुर गांव के पिछली बैठक से लंबित मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने पर मंत्री ने एतराज जताया। गांव के सरपंच रिशिपाल ने शिकायत देकर सड़क से अवैध कब्जा हटाकर नाला बनाने की मांग की थी। इस पर बीडीपीओ कार्तिक चौहान ने अपनी रिपोर्ट देते हुए कहा कि नौ लोगों को कब्जा हटाने के नोटिस दिए गए थे। इसके बाद 29 मई को कब्जे हटाने थे, लेकिन ड्यूटी मजिस्ट्रेट के उपलब्ध न होने से कब्जे नहीं हटाए जा सके। जिस पर मंत्री ने चेताया कि हर हाल में कब्जा हटना चाहिए। ड्यूटी मजिस्ट्रेट को बुखार है या पेट में दर्द हो गया था, ऐसे बहाने नहीं चलेंगे।
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21 साल बाद बताया दुकान पर कब्जा कर लिया
संतपुरा रोड निवासी गुरचरण सिंह ने मंत्री को शिकायत दी थी कि साल 1977 में उसे इंदिरा मार्केट में रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक नगर निगम से खुली बोली में दुकान नंबर 22 अलॉट की गई थी। कुछ साल बाद उसका स्वास्थ्य खराब होने लगा। उसे पता चला कि उसके छोटे भाई की पत्नी ने अपने भाई के साथ मिलकर दुकान अपने नाम करवा ली। इसलिए उसे दुकान वापस दी जाए। इस पर नगर निगम अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में मंत्री को बताया कि मई 2003 में गुरचरण सिंह द्वारा नोटरी से सत्यापित शपथ पत्र दिया गया था कि यह दुकान भगवान सिंह के नाम ट्रांसफर कर दी जाए। 2010 में यह दुकान मनमोहन सिंह से सुरेंद्र कौर के नाम ट्रांसफर कर दी गई। 14 साल से सुरेंद्र कौर ही दुकान का किराया दे रही है। 2024 में सुरेंद्र कौर ने मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना के तहत दुकान खरीदने के लिए आवेदन किया था। ऐसे में जांच से लग रहा है कि गुरचरण सिंह दुकान खरीदने की नीयत से अब ऐसे आरोप लगा रहे हैं। गुरचरण सिंह के बेटे ने आरोप लगाया कि शपथ पत्र पर उन्होंने साइन नहीं किए, यह फर्जी साइन हैं। इस पर मंत्री कृष्ण बेदी ने गुरचरण सिंह व बेटे से कहा कि वह इस मामले की इंक्वायरी करवा देंगे। लेकिन बात बहुत दूर तक जाएगी। इसलिए वह अच्छी तरह से विचार विमर्श कर लें कि उन्हें जांच करवानी है या फिर शिकायत वापस लेनी है। यदि वह झूठ बोल रहे हैं तो कार्रवाई शिकायत करने वालों पर भी होगी। संवाद
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एसआईटी से कराई जाएगी जांच
फाइब्रियम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमन सिंगला ने शिकायत दी कि वर्ष 2021 में उसके साथ चार लोगों ने उसके साथ करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने उसे चिकोरी से इनुलिन और एफओएस के निर्माण के लिए स्वदेशी तकनीकी विकसित करने की बात कही थी। एमओयू साइन होने के बाद भी उन्हें इसकी तकनीक नहीं दी गई। मंत्री ने इस मामले की जांच एसआईटी बनाकर कराने के आदेश दिए।