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जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ा खतरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। राष्ट्रीय कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन व मानव स्वास्थ्य के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया की अध्यक्षता में पर्यावरण पर आधारित कार्यशाला और पोस्टर विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को प्रदूषित हवा से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के प्रति जागरूक करना है।
मुख्यातिथि यमुनानगर के विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने कहा कि आज के समय में सबसे बड़ा खतरा जलवायु परिवर्तन का है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के परिणाम जो सामने आ रहे हैं, वो हमारे वर्तमान और आने वाली पीढ़ी के लिए भयंकर है। आजकल जनसख्या अधिक बढ़ने के कारण पेड़ ज्यादा काटे जा रहे हैं। जिसके चलते ऑक्सीजन की कमी के कारण जलवायु पहले की तरह शुद्ध नहीं है। जिससे हमें अनेक तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया ने कहा कि कोविड महामारी के बाद सबसे ज्यादा खतरा प्रदूषित जलवायु है, जिसके कारण संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। जैसे कि सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, गले में इंफेक्शन आदि का खतरा बहुत अधिक हो जाता है। आजकल के समय में सबसे बड़ा खतरा जलवायु परिवर्तन का है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन के परिणाम जो सामने आ रहे हैं, वो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक है।
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उन्होंने कहा कि इससे बचाव के लिए हमें चाहिए कि जरूरत पड़ने पर ही घर से निकले। आंखों में जलन व सांस लेने मे तकलीफ होने पर डाक्टर से मिले, धुआं रहित ईंधन का प्रयोग व विभिन्न बीमारियों का ध्यान रखें। सिविल सर्जन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर आधारित यह पोस्टर जिले की सभी सीएचसी, पीएचसी व उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर लगवाए जाएंगे। इस अवसर पर डॉ. दीपिका गुप्ता, डॉ. राजेश परमार, डॉ. विजय परमार, डॉ. विजय विवेक, डॉ. वागीश गुटेन, डॉ. पुनित कालरा, डॉ. विपिन, सुशीला, नीतू, पूजा, बोबेश पंजेटा आदि उपस्थित थे।
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यमुनानगर। राष्ट्रीय कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन व मानव स्वास्थ्य के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया की अध्यक्षता में पर्यावरण पर आधारित कार्यशाला और पोस्टर विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को प्रदूषित हवा से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के प्रति जागरूक करना है।
मुख्यातिथि यमुनानगर के विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने कहा कि आज के समय में सबसे बड़ा खतरा जलवायु परिवर्तन का है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के परिणाम जो सामने आ रहे हैं, वो हमारे वर्तमान और आने वाली पीढ़ी के लिए भयंकर है। आजकल जनसख्या अधिक बढ़ने के कारण पेड़ ज्यादा काटे जा रहे हैं। जिसके चलते ऑक्सीजन की कमी के कारण जलवायु पहले की तरह शुद्ध नहीं है। जिससे हमें अनेक तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
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सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया ने कहा कि कोविड महामारी के बाद सबसे ज्यादा खतरा प्रदूषित जलवायु है, जिसके कारण संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। जैसे कि सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, गले में इंफेक्शन आदि का खतरा बहुत अधिक हो जाता है। आजकल के समय में सबसे बड़ा खतरा जलवायु परिवर्तन का है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन के परिणाम जो सामने आ रहे हैं, वो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक है।
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उन्होंने कहा कि इससे बचाव के लिए हमें चाहिए कि जरूरत पड़ने पर ही घर से निकले। आंखों में जलन व सांस लेने मे तकलीफ होने पर डाक्टर से मिले, धुआं रहित ईंधन का प्रयोग व विभिन्न बीमारियों का ध्यान रखें। सिविल सर्जन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर आधारित यह पोस्टर जिले की सभी सीएचसी, पीएचसी व उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर लगवाए जाएंगे। इस अवसर पर डॉ. दीपिका गुप्ता, डॉ. राजेश परमार, डॉ. विजय परमार, डॉ. विजय विवेक, डॉ. वागीश गुटेन, डॉ. पुनित कालरा, डॉ. विपिन, सुशीला, नीतू, पूजा, बोबेश पंजेटा आदि उपस्थित थे।