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सालभर बेपरवाह रहे रखवाले, अब ठेके पर साफ हो रहे नाले
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Careless caretakers throughout the year, now drains are being cleaned on contract
- फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। ट्विनसिटी (यमुनानगर-जगाधरी) के 39 नालों की नगर निगम अफसर पूरे साल सुध लेते नहीं दिखे और अब इनकी सफाई 1.15 करोड़ के ठेके में करवा रहे हैं। ऐसा भी मानसून के नजदीक आने पर किया जा रहा है। यह देख विपक्ष सहित सत्ता पक्ष के भी वार्ड पार्षद निगम अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
पार्षदों की मानें तो पूरे साल निगम कर्मियों से नाले साफ कराए होते तो अब इनकी सफाई कराने में खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये बचते। उनका आरोप है कि अब ठेके पर 1.15 करोड़ खर्च के बाद भी नालों की सफाई में खानापूर्ति होगी, क्योंकि अब मानसून में बहुत कम समय है। बता दें कि नगर निगम ने नालों की सफाई के लिए दो जोन बांट टेंडर किए थे। इनमें जोन-एक में जगाधरी के वार्ड-एक से सात के 28.5 किमी. के 12 नाले हैं। इनकी सफाई 45 लाख के दिए ठेके में दस दिन पहले शुरू हुई। जोन-दो में यमुनानगर के वार्ड-8 से 22 के 63.5 किमी. के 27 नालों की सफाई का भी करीब 70 लाख में ठेका अलॉट हो गया है।
टेंडर में दी संख्या से कम कर्मियों और वाहनों से हो रहा काम
पहले बार कॉल किए टेंडर अनुसार जोन-2 में नालों की सफाई के लिए 100 कर्मी, तीन सुपरवाइजर, छह ट्रैक्टर - ट्रॉली, 18 ट्रैक्टर - ट्रॉली हेल्पर, दो जेसीबी मशीन, एक लोडर और कस्सी, बेलचा, गंबूट, गलब्ज , पंजी, जैकेट, तसले आदि होने चाहिए। लेकिन जोन-2 में नालों की सफाई शुरू होने पर अतिरिक्त निगम आयुक्त (एएमसी) धीरज कुमार ने निरीक्षण में पाया कि नालों की सफाई में सिर्फ 59 कर्मी लगे हैं। साथ ही चार ट्रैक्टर ट्रॉली व एक जेसीबी ही मिली। यही नहीं, नालों की सफाई की तस्वीरों में सफाई कर्मी बिना बूट, गलब्ज के दिख रहे हैं। धीरज कुमार ने सीएसआई सुरेंद्र चोपड़ा व ठेकेदार को कर्मियों व वाहनों की संख्या बढ़ाकर जल्द नालों की सफाई का कार्य नियमानुसार पूरा करने के निर्देश दिए।
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डीसी के आदेश के बावजूद 15 जून तक साफ नहीं हो सकेंगे नाले
डीसी पार्थ गुप्ता ने निगम अफसरों को बैठक में नालों की सफाई का कार्य 15 जून तक पूरा करने के आदेश दिए थे। इस तिथि को पूरा होने अब दो ही दिन बाकी हैं। डीसी के निर्देशानुसार नाले तीन बार साफ किए जाने थे, पर जोन- एक में नालों की सफाई 50 प्रतिशत पूरी होने का अफसर दावा कर रहे हैं, वहीं जोन-1 से दो गुना अधिक वार्ड व नालों वाले जोन-2 में अभी काम शुरू ही हुआ है। ऐसे में डीसी के आदेशों के अनुसार 15 जून तक काम पूरा होना मुमकिन नहीं है। ये हालात तब हैं, जब बीते वर्षों में मानसून में शहर में जलभराव के लिए नाले बड़ी वजह रहे।
विपक्षी पार्षद बोले सफाई के नाम पर होगी खानापूर्ति
विपक्षी पार्षदों में वार्ड-तीन के हरमीन कोहली, चार के देवेंद्र सिंह, वार्ड-आठ के विनोद मरवाह, वार्ड-13 के निर्मल चौहान, वार्ड-16 की पार्षद रिया ने कहा कि मानसून आने में बहुत कम समय बचा है। ऐसे में 1.15 करोड़ खर्च के बाद भी नालों की सफाई के नाम पर खानापूर्ति ही होगी। हर साल तीन चरणों में नालों की सफाई होती है, पर इस बार बरसात से पहले एक बार भी नालों की सही तरीके से सफाई नहीं हो पाएगी। उधर, सत्तापक्ष के पार्षदों में वार्ड-सात के राम आसरा भारद्वाज व वार्ड-21 के पार्षद प्रतिनिधि नीरज राणा ने कहा कि अगर पूरे साल नाले निगम कर्मियों से साफ कराए जाएं तो मानसून में नाले समय से साफ होने पर जलभराव की वजह नहीं बनेंगे और इनकी ठेके पर सफाई कराने में करोड़ों रुपये भी बचेंगे।
जल्द सफाई करा देंगे: सुरेंद्र चोपड़ा
सीएसआई सुरेंद्र चोपड़ा का कहना है कि नालों की सफाई का काम शुरू करवा दिया है। ठेकेदार को कहा है कि वह टेंडर के अनुसार ही मजदूरों को लगाएं। समय पर काम पूरा नहीं हुआ तो ठेकेदार पर कार्रवाई की जाएगी।
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पार्षदों की मानें तो पूरे साल निगम कर्मियों से नाले साफ कराए होते तो अब इनकी सफाई कराने में खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये बचते। उनका आरोप है कि अब ठेके पर 1.15 करोड़ खर्च के बाद भी नालों की सफाई में खानापूर्ति होगी, क्योंकि अब मानसून में बहुत कम समय है। बता दें कि नगर निगम ने नालों की सफाई के लिए दो जोन बांट टेंडर किए थे। इनमें जोन-एक में जगाधरी के वार्ड-एक से सात के 28.5 किमी. के 12 नाले हैं। इनकी सफाई 45 लाख के दिए ठेके में दस दिन पहले शुरू हुई। जोन-दो में यमुनानगर के वार्ड-8 से 22 के 63.5 किमी. के 27 नालों की सफाई का भी करीब 70 लाख में ठेका अलॉट हो गया है।
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टेंडर में दी संख्या से कम कर्मियों और वाहनों से हो रहा काम
पहले बार कॉल किए टेंडर अनुसार जोन-2 में नालों की सफाई के लिए 100 कर्मी, तीन सुपरवाइजर, छह ट्रैक्टर - ट्रॉली, 18 ट्रैक्टर - ट्रॉली हेल्पर, दो जेसीबी मशीन, एक लोडर और कस्सी, बेलचा, गंबूट, गलब्ज , पंजी, जैकेट, तसले आदि होने चाहिए। लेकिन जोन-2 में नालों की सफाई शुरू होने पर अतिरिक्त निगम आयुक्त (एएमसी) धीरज कुमार ने निरीक्षण में पाया कि नालों की सफाई में सिर्फ 59 कर्मी लगे हैं। साथ ही चार ट्रैक्टर ट्रॉली व एक जेसीबी ही मिली। यही नहीं, नालों की सफाई की तस्वीरों में सफाई कर्मी बिना बूट, गलब्ज के दिख रहे हैं। धीरज कुमार ने सीएसआई सुरेंद्र चोपड़ा व ठेकेदार को कर्मियों व वाहनों की संख्या बढ़ाकर जल्द नालों की सफाई का कार्य नियमानुसार पूरा करने के निर्देश दिए।
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डीसी के आदेश के बावजूद 15 जून तक साफ नहीं हो सकेंगे नाले
डीसी पार्थ गुप्ता ने निगम अफसरों को बैठक में नालों की सफाई का कार्य 15 जून तक पूरा करने के आदेश दिए थे। इस तिथि को पूरा होने अब दो ही दिन बाकी हैं। डीसी के निर्देशानुसार नाले तीन बार साफ किए जाने थे, पर जोन- एक में नालों की सफाई 50 प्रतिशत पूरी होने का अफसर दावा कर रहे हैं, वहीं जोन-1 से दो गुना अधिक वार्ड व नालों वाले जोन-2 में अभी काम शुरू ही हुआ है। ऐसे में डीसी के आदेशों के अनुसार 15 जून तक काम पूरा होना मुमकिन नहीं है। ये हालात तब हैं, जब बीते वर्षों में मानसून में शहर में जलभराव के लिए नाले बड़ी वजह रहे।
विपक्षी पार्षद बोले सफाई के नाम पर होगी खानापूर्ति
विपक्षी पार्षदों में वार्ड-तीन के हरमीन कोहली, चार के देवेंद्र सिंह, वार्ड-आठ के विनोद मरवाह, वार्ड-13 के निर्मल चौहान, वार्ड-16 की पार्षद रिया ने कहा कि मानसून आने में बहुत कम समय बचा है। ऐसे में 1.15 करोड़ खर्च के बाद भी नालों की सफाई के नाम पर खानापूर्ति ही होगी। हर साल तीन चरणों में नालों की सफाई होती है, पर इस बार बरसात से पहले एक बार भी नालों की सही तरीके से सफाई नहीं हो पाएगी। उधर, सत्तापक्ष के पार्षदों में वार्ड-सात के राम आसरा भारद्वाज व वार्ड-21 के पार्षद प्रतिनिधि नीरज राणा ने कहा कि अगर पूरे साल नाले निगम कर्मियों से साफ कराए जाएं तो मानसून में नाले समय से साफ होने पर जलभराव की वजह नहीं बनेंगे और इनकी ठेके पर सफाई कराने में करोड़ों रुपये भी बचेंगे।
जल्द सफाई करा देंगे: सुरेंद्र चोपड़ा
सीएसआई सुरेंद्र चोपड़ा का कहना है कि नालों की सफाई का काम शुरू करवा दिया है। ठेकेदार को कहा है कि वह टेंडर के अनुसार ही मजदूरों को लगाएं। समय पर काम पूरा नहीं हुआ तो ठेकेदार पर कार्रवाई की जाएगी।