{"_id":"6883cd3ea10bb374ec06000d","slug":"by-closing-the-path-of-the-enemies-the-path-to-victory-was-ensured-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1020-141314-2025-07-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: दुश्मनों का रास्ता बंद कर सुनिश्चित किया जीत का मार्ग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: दुश्मनों का रास्ता बंद कर सुनिश्चित किया जीत का मार्ग
Sat, 26 Jul 2025 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 26 Jul 2025 12:00 AM IST
विज्ञापन
अभय सिंह
जगाधरी। कारगिल की सबसे दुर्गम चोटी टाइगर हिल पर गोलियों व बम फटने की आवाजें आ रही थीं। पाकिस्तानी सैनिक टाइगर हिल की चोटी पर थे और हमारी टुकड़ी नीचे थी। दुश्मन लगातार गोलियां दाग रहे थे। भारतीय सैनिक अपनी जगह पर डटे रहे। सुबह गोलियां व बमों की आवाज से क्षेत्र गूंजता रहा। पाकिस्तानी बम का सेल लगने से वह घायल भी हो गए थे। कारगिल की यह कहानी 1999 में टाइगर हिल पर लड़ाई करने वाले सिख रेजिमेंट के नायक रणजीत सिंह ने बताई।
जिले के साढौरा खंड के गांव नौशहरा निवासी रणजीत सिंह हालही में बिजली निगम में कार्यरत हैं। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हवलदार रणजीत सिंह 1999 में सिख रेजिमेंट में नायक हुआ करते थे। कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन टाइगर हिल पर कब्जा कर बैठ गए थे। उनकी रेजिमेंट को दुर्गम पर रिकैप्चर करने का टास्क मिला था। इसके बाद उनकी यूनिट टाइगर हिल पहुंची।
श्रीनगर से जाते हुए द्रास के पास उनकी यूनिट पर हमला हुआ था। उन्हें पता नहीं लग रहा था कि गोलियां कहां से चल रही हैं।
सभी ने अपनी पोजीशन ली और वहां से सुरक्षित निकले। वहां से टाइगर हिल पहुंचे तो पता चला कि ऊंचाई पर बैठे दुश्मन उन पर बमबारी कर रहे हैं। इसके बाद दूसरी यूनिट को अप्लाई किया। फिर तीसरी यूनिट को अप्लाई किया गया।
विज्ञापन
इसके बाद जेके राइफल, 18 ग्रेनेडियर भी आ गई। बाद में बोफोर्स तोप भी पहुंच गई थी, जिससे हमारी स्थिति और मजबूत हो गई। इसके बाद प्लानिंग हुई। उनकी 8 सिख यूनिट को टास्क मिला कि दुश्मनों का वह रास्ता कटअप किया जाए, जहां से उन्हें राशन, पानी व कम्युनिकेशन हो रहा है। रणजीत सिंह ने बताया कि उनकी यूनिट को रेडियो इत्यादि कट करने की पार्टी का बैकअप में रखा गया था। उनके पास गन, रॉकेट लांचर इत्यादि हथियार थे। इस दौरान दुश्मनों की ओर से गोलियां चलाई और बम फेंके गए। उन्होंने दुश्मनों की मदद वाले रास्ते पर कब्जा कर लिया।
इसके बाद सात आठ पाकिस्तानी फौजी नीचे से आए और हमला कर रास्ता बहाल करने का प्रयास किया, लेकिन यूनिट ने सभी को मार गिरा। इसमें उन्होंने पाकिस्तानी आर्मी के कैप्टन शेरगिल को मार गिराया था। कैप्टन शेरगिल को पाकिस्तान ने मरणोपरांत हैदर अवार्ड दिया है। उन्होंने अपनी यूनिट के साथ शेरगिल व उसके साथियों को मार गिरा था। संवाद
आठ जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर लहराया तिरंगा
हवलदार रणजीत सिंह बताते हैं कि शेरगिल के मारे जाने के बाद पाकिस्तानियों की मदद बंद हो गई तो उनके हौसले पस्त हो गए। उनकी यूनिट ने अपने स्थान पर झंडा फहरा दिया। इसके बाद 18 ग्रेनेडियर को टाइगर हिल पर कब्जे के आदेश दिए। इसके बाद एक दिन लगा और आठ जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर तिरंगा लहरा दिया गया। कारगिल युद्ध के दौरान दिखाए गए शौर्य के लिए रणजीत सिंह को सेना ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। उन्हें 2001 में यूएन की ओर से लेबनान में चलाए गए मिशन में भेजा गया था। 2004 में सेना से बतौर हवलदार सेवानिवृत्त होने के बाद से रणजीत सिंह बिजली निगम में कार्यरत हैं।
विज्ञापन
जगाधरी। कारगिल की सबसे दुर्गम चोटी टाइगर हिल पर गोलियों व बम फटने की आवाजें आ रही थीं। पाकिस्तानी सैनिक टाइगर हिल की चोटी पर थे और हमारी टुकड़ी नीचे थी। दुश्मन लगातार गोलियां दाग रहे थे। भारतीय सैनिक अपनी जगह पर डटे रहे। सुबह गोलियां व बमों की आवाज से क्षेत्र गूंजता रहा। पाकिस्तानी बम का सेल लगने से वह घायल भी हो गए थे। कारगिल की यह कहानी 1999 में टाइगर हिल पर लड़ाई करने वाले सिख रेजिमेंट के नायक रणजीत सिंह ने बताई।
जिले के साढौरा खंड के गांव नौशहरा निवासी रणजीत सिंह हालही में बिजली निगम में कार्यरत हैं। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हवलदार रणजीत सिंह 1999 में सिख रेजिमेंट में नायक हुआ करते थे। कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन टाइगर हिल पर कब्जा कर बैठ गए थे। उनकी रेजिमेंट को दुर्गम पर रिकैप्चर करने का टास्क मिला था। इसके बाद उनकी यूनिट टाइगर हिल पहुंची।
विज्ञापन
श्रीनगर से जाते हुए द्रास के पास उनकी यूनिट पर हमला हुआ था। उन्हें पता नहीं लग रहा था कि गोलियां कहां से चल रही हैं।
सभी ने अपनी पोजीशन ली और वहां से सुरक्षित निकले। वहां से टाइगर हिल पहुंचे तो पता चला कि ऊंचाई पर बैठे दुश्मन उन पर बमबारी कर रहे हैं। इसके बाद दूसरी यूनिट को अप्लाई किया। फिर तीसरी यूनिट को अप्लाई किया गया।
विज्ञापन
इसके बाद जेके राइफल, 18 ग्रेनेडियर भी आ गई। बाद में बोफोर्स तोप भी पहुंच गई थी, जिससे हमारी स्थिति और मजबूत हो गई। इसके बाद प्लानिंग हुई। उनकी 8 सिख यूनिट को टास्क मिला कि दुश्मनों का वह रास्ता कटअप किया जाए, जहां से उन्हें राशन, पानी व कम्युनिकेशन हो रहा है। रणजीत सिंह ने बताया कि उनकी यूनिट को रेडियो इत्यादि कट करने की पार्टी का बैकअप में रखा गया था। उनके पास गन, रॉकेट लांचर इत्यादि हथियार थे। इस दौरान दुश्मनों की ओर से गोलियां चलाई और बम फेंके गए। उन्होंने दुश्मनों की मदद वाले रास्ते पर कब्जा कर लिया।
इसके बाद सात आठ पाकिस्तानी फौजी नीचे से आए और हमला कर रास्ता बहाल करने का प्रयास किया, लेकिन यूनिट ने सभी को मार गिरा। इसमें उन्होंने पाकिस्तानी आर्मी के कैप्टन शेरगिल को मार गिराया था। कैप्टन शेरगिल को पाकिस्तान ने मरणोपरांत हैदर अवार्ड दिया है। उन्होंने अपनी यूनिट के साथ शेरगिल व उसके साथियों को मार गिरा था। संवाद
आठ जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर लहराया तिरंगा
हवलदार रणजीत सिंह बताते हैं कि शेरगिल के मारे जाने के बाद पाकिस्तानियों की मदद बंद हो गई तो उनके हौसले पस्त हो गए। उनकी यूनिट ने अपने स्थान पर झंडा फहरा दिया। इसके बाद 18 ग्रेनेडियर को टाइगर हिल पर कब्जे के आदेश दिए। इसके बाद एक दिन लगा और आठ जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर तिरंगा लहरा दिया गया। कारगिल युद्ध के दौरान दिखाए गए शौर्य के लिए रणजीत सिंह को सेना ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। उन्हें 2001 में यूएन की ओर से लेबनान में चलाए गए मिशन में भेजा गया था। 2004 में सेना से बतौर हवलदार सेवानिवृत्त होने के बाद से रणजीत सिंह बिजली निगम में कार्यरत हैं।