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गांवों में जाने से परहेज करें भाजपा नेता : नरेश टिकैत
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पत्रकारों से बातचीत करते नरेश टिकैत। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत शुक्रवार को गांव हड़तोल में एक निजी समारोह में शिरकत करने पहुंचे। यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जब तक कृषि कानून वापस नहीं हो जाते, तब तक भाजपा नेता गांवों में जाने से परहेज करें।
किसान नेता टिकैत ने कहा कि आंदोलन पहले भी हुए, लेकिन इस सरकार को बहुत ज्यादा विरोध हो रहा है। शहर से लेकर गांवों तक विरोध किया जा रहा है। जब लोग भाजपा नेताओं को रोक रहे हैं, लेकिन ये गांवों में जाने की जिद पर अड़े हैं। लखीमपुर खीरी कांड भी इसी का नतीजा है। जब तक कृषि कानून वापस नहीं हो जाते और लखीमपुर खीरी का मामला शांत नहीं हो जाता, तब तक भाजपा नेता गांवों में जाने से परहेज करें।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा नेता सत्ता के नशे में किसानों को रौंदकर आंदोलन को कुचलना चाहते हैं, लेकिन किसान हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल के बयान का विरोध हो रहा है। उन्हें बोलचाल का ढंग ठीक रखना चाहिए। जो अच्छी बात कहेगा, उससे बातचीत करने का रास्ता निकलेगा। इस तरह की भाषा से हुड़दंग बढ़ेगा।
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नरेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों को वापस लेने का काम करें। जब तक कृषि कानून वापस नहीं होंगे, तब तक यह आंदोलन चला रहेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन को दस महीने हो चुके हैं। आंदोलन बिल्कुल भी ढीला नहीं है। किसानों में जोश है। अब किसानों के साथ-साथ आम लोग भी आंदोलन से जुड़ गए हैं।
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यमुनानगर। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत शुक्रवार को गांव हड़तोल में एक निजी समारोह में शिरकत करने पहुंचे। यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जब तक कृषि कानून वापस नहीं हो जाते, तब तक भाजपा नेता गांवों में जाने से परहेज करें।
किसान नेता टिकैत ने कहा कि आंदोलन पहले भी हुए, लेकिन इस सरकार को बहुत ज्यादा विरोध हो रहा है। शहर से लेकर गांवों तक विरोध किया जा रहा है। जब लोग भाजपा नेताओं को रोक रहे हैं, लेकिन ये गांवों में जाने की जिद पर अड़े हैं। लखीमपुर खीरी कांड भी इसी का नतीजा है। जब तक कृषि कानून वापस नहीं हो जाते और लखीमपुर खीरी का मामला शांत नहीं हो जाता, तब तक भाजपा नेता गांवों में जाने से परहेज करें।
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उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा नेता सत्ता के नशे में किसानों को रौंदकर आंदोलन को कुचलना चाहते हैं, लेकिन किसान हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल के बयान का विरोध हो रहा है। उन्हें बोलचाल का ढंग ठीक रखना चाहिए। जो अच्छी बात कहेगा, उससे बातचीत करने का रास्ता निकलेगा। इस तरह की भाषा से हुड़दंग बढ़ेगा।
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नरेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों को वापस लेने का काम करें। जब तक कृषि कानून वापस नहीं होंगे, तब तक यह आंदोलन चला रहेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन को दस महीने हो चुके हैं। आंदोलन बिल्कुल भी ढीला नहीं है। किसानों में जोश है। अब किसानों के साथ-साथ आम लोग भी आंदोलन से जुड़ गए हैं।