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Yamuna Nagar News: टीबी दवा घोटाले में एक और शिकायत

Fri, 27 Jun 2025 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Fri, 27 Jun 2025 11:59 PM IST
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Another complaint in TB drug scam
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। टीबी मरीजों के लिए दवा खरीद घोटाले के आरोपों में सिविल सर्जन व नोडल अधिकारी को क्लीन चिट देने का मामला एक बार फिर सीएम विंडो पर पहुंच गया है। शिकायतकर्ता चौधरी कॉलोनी निवासी बलविंद्र सिंह ने मामले की जांच पर सवाल उठाए हैं। इसलिए उन्होंने सीएम विंडो पर दोबारा शिकायत दी। इस बार सीएम विंडो से शिकायत को जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग के डीजी को भेजा गया है।
ऐसे में सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह व टीबी मुक्त अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. अनूप गोयल की मुश्किलें बढ़ सकती है। क्योंकि इससे पहले सिविल सर्जन ने अपने खिलाफ आई शिकायत की अपने से नीचे काम करने वाले तीन डिप्टी सिविल सर्जन की कमेटी बना कर जांच करवा ली थी। कमेटी ने क्लीन चिट दे दी थी। वहीं इस मामले की जांच विजिलेंस भी कर रही है।
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शिकायतकर्ता बलविंद्र सिंह का कहना है कि जांच के लिए सिविल सर्जन ने तीन डिप्टी सिविल सर्जन की कमेटी बनाकर जांच करवाई थी। पहली बात तो यह है कि सिविल सर्जन अपने अधीन काम करने वाले जूनियर स्टाफ से अपनी जांच कैसे करवा सकता है। दूसरा तीन में से केवल दो डॉक्टरों ने ही जांच की है।
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कमेटी की सदस्य डॉ. सुशीला सैनी जांच के दौरान छुट्टी पर रही। ऐसे में केवल दो डिप्टी ने ही जांच करके सिविल सर्जन को क्लीन चिट दे दी। तीन सदस्यों की कमेटी इसलिए बनाई जाती है, ताकि दो की जांच में जो सामने आए उसे बहुमत मिलता है। परंतु यहां दो डॉक्टरों ने अपने हस्ताक्षर करके एटीआर को सीएम विंडो पर अपलोड करवा दिया।
बलविंद्र सिंह ने सीएम विंडो की अपलोड की गई एटीआर को भी बदलने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जिस एटीआर पर डॉ. सुशीला के जबरन हस्ताक्षर कराए गए थे वह फाड़ कर केवल डॉ. दिव्या मंगला व डॉ. संजय राठी के साइन वाली एटीआर को तैयार किया गया। इससे पता चलता है कि दोनों डॉक्टरों ने सिविल सर्जन को बचाया। इसलिए उन्होंने दोबारा सीएम विंडो पर शिकायत दी है।


18.50 लाख के घोटाले का आरोप
शिकायतकर्ता बलविंद्र सिंह ने इससे पहले सीएम विंडो पर शिकायत दी थी कि जिले के टीबी मरीजों के लिए सरकारी दवाइयां होने के बावजूद बिना अनुमति बाहर से करीब 18.50 लाख रुपये की दवाएं खरीदी गईं। अगले दिन स्टेट की ओर से भी टीबी की दवाइयां भेज दी गई्। इसमें घोटाला करते हुए सरकारी रिकॉर्ड में सारी दवाइयों की खपत दिखा दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि जिले में इतने टीबी के मरीज नहीं हैं, जितने की दवाइयों की खपत दिखाई गई। शिकायत में इसका आरोप सिविल सर्जन मनजीत सिंह व डॉ. अनूप गोयल पर लगाया था। सिविल सर्जन ने डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. दिव्या मंगला, डॉ. सुशीला सैनी व डॉ. संजय राठी की कमेटी बना कर जांच करवाई थी।
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