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आरसी फर्जीवाड़ा:ं अमित का भी पांच दिन का रिमांड, दोनों को आमने सामने करेगी पुलिस
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वाहनों की आरसी बनाने के फर्जीवाड़े के आरोपी अमित को एक बार फिर से रिमांड पर लिया गया है। इससे पहले एसआईटी ने गुरुवार को एमआरसी राजेंद्र को भी पांच दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस रिमांड के दौरान दोनों को आमने-सामने बैठाकर आरसी में फर्जीवाड़े की गुत्थी सुलझाने का प्रयास करेगी। वहीं पूछताछ में अमित ने कुछ अफसरों के नाम लिए हैं, हालांकि पुलिस अभी नामों का खुलासा नहीं कर रही है।
रिमांड के दौरान पुलिस अमित से दो बार में 22 लाख और 3 लाख यानी कुल 25 लाख रुपये बरामद कर चुकी है, जबकि एमआरसी राजेंद्र डांगी से पुलिस ने अभी तक एक लाख रुपये बरामद किए हैं। पुलिस के हाथ अब तक वे फाइलें नहीं लगी हैं, जिसमें हेराफेरी की गई है। ऐसे में एसआईटी ने फिर से अमित को रिमांड पर लिया है। बताया जा रहा है कि अमित ने इस फर्जीवाड़े में कुछ बड़े अधिकारियों के नाम बताए हैं। इनमें राजपत्रित अधिकारियों के नाम भी हैं, लेकिन पुलिस अभी इन दोनों आरोपियों से ही पूछताछ कर रही है। इसके अलावा अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि रजिस्ट्रेशन उस प्रक्रिया से किया गया है, जिसमें एनओसी की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है। सबसे अधिक धांधली अप्रैल माह में लॉकडाउन के दौरान की गई है। यमुनानगर में इन माह में सैकड़ों वाहनों के रजिस्ट्रेशन किए गए हैं। इन्हीं वाहनों की फाइलें पुलिस आरोपियों से बरामद करने की कोशिश कर रही है। इस पूरे प्रकरण में सिरसा और यमुनानगर की दोनों एसआईटी को कोई बड़ी सफलता नहीं मिल पाई है। आरोपी अमित का कहना है कि यह खेल बड़े अधिकारियों का है। अपना दामन बचाने के लिए उसे फंसाया गया है।
एमवीआई की पासिंग रिपोर्ट लगाई जाती थी
- मास्टरमाइंड सुनील चिटकारा ऑनलाइन नीलामी में वाहन खरीदता और फिर इनकी कम कीमत दिखाने के लिए बैंक के फर्जी कागजात तैयार करता था। बताया जा रहा है कि मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर की फर्जी पासिंग रिपोर्ट भी लगाई जाती थी। सैकड़ों गाड़ियां जगाधरी में पंजीकृत बताई गईं, जिनमें पते भी पूरे नहीं हैं और संबंधित नंबरों के आगे हैश व स्टार लगे मिले हैं। सुनील चिटकारा के बाद सरल केंद्र के कंप्यूटर आपरेटर अमित कुमार पुलिस हिरासत में है। उन्होंने सिरसा की कोर्ट में सरेंडर किया था और पुलिस ने दूसरी बार उसे रिमांड पर लिया है।
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-रिमांड पर लिए गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम भी सामने आ रहे हैं। जिनसे पूछताछ की जा सकती है।-सुखबीर सिंह, एसएचओ
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रिमांड के दौरान पुलिस अमित से दो बार में 22 लाख और 3 लाख यानी कुल 25 लाख रुपये बरामद कर चुकी है, जबकि एमआरसी राजेंद्र डांगी से पुलिस ने अभी तक एक लाख रुपये बरामद किए हैं। पुलिस के हाथ अब तक वे फाइलें नहीं लगी हैं, जिसमें हेराफेरी की गई है। ऐसे में एसआईटी ने फिर से अमित को रिमांड पर लिया है। बताया जा रहा है कि अमित ने इस फर्जीवाड़े में कुछ बड़े अधिकारियों के नाम बताए हैं। इनमें राजपत्रित अधिकारियों के नाम भी हैं, लेकिन पुलिस अभी इन दोनों आरोपियों से ही पूछताछ कर रही है। इसके अलावा अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि रजिस्ट्रेशन उस प्रक्रिया से किया गया है, जिसमें एनओसी की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है। सबसे अधिक धांधली अप्रैल माह में लॉकडाउन के दौरान की गई है। यमुनानगर में इन माह में सैकड़ों वाहनों के रजिस्ट्रेशन किए गए हैं। इन्हीं वाहनों की फाइलें पुलिस आरोपियों से बरामद करने की कोशिश कर रही है। इस पूरे प्रकरण में सिरसा और यमुनानगर की दोनों एसआईटी को कोई बड़ी सफलता नहीं मिल पाई है। आरोपी अमित का कहना है कि यह खेल बड़े अधिकारियों का है। अपना दामन बचाने के लिए उसे फंसाया गया है।
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एमवीआई की पासिंग रिपोर्ट लगाई जाती थी
- मास्टरमाइंड सुनील चिटकारा ऑनलाइन नीलामी में वाहन खरीदता और फिर इनकी कम कीमत दिखाने के लिए बैंक के फर्जी कागजात तैयार करता था। बताया जा रहा है कि मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर की फर्जी पासिंग रिपोर्ट भी लगाई जाती थी। सैकड़ों गाड़ियां जगाधरी में पंजीकृत बताई गईं, जिनमें पते भी पूरे नहीं हैं और संबंधित नंबरों के आगे हैश व स्टार लगे मिले हैं। सुनील चिटकारा के बाद सरल केंद्र के कंप्यूटर आपरेटर अमित कुमार पुलिस हिरासत में है। उन्होंने सिरसा की कोर्ट में सरेंडर किया था और पुलिस ने दूसरी बार उसे रिमांड पर लिया है।
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-रिमांड पर लिए गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम भी सामने आ रहे हैं। जिनसे पूछताछ की जा सकती है।-सुखबीर सिंह, एसएचओ