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Yamuna Nagar News: दो दिन रहेगी अमावस्या, बन रहा विशेष संयोग
Mon, 02 Sep 2024 02:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 02 Sep 2024 02:33 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। भाद्रपद अमावस्या सोमवार व मंगलवार दो दिन है। भाद्रपद अमावस्या एक दुर्लभ योग बना रही है। इस साल भाद्रपद अमावस्या दो दिन रहेगी। भाद्रपद अमावस्या तिथि दो सितंबर व तीन सितंबर दोनों दिन पड़ रही है। ऐसे में इस बार सोमवती अमावस्या और भौमवती अमावस्या दोनों का ही लाभ भक्तों को प्राप्त होगा।
गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र संचालक पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि भाद्रपद अमावस्या तिथि दो सितंबर को सुबह पांच बजकर 21 मिनट पर प्रारंभ होकर तीन सितंबर सुबह सात बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी। दो सितंबर को सूर्योदय सुबह छह बजे हो रहा है, ऐसे में उदयातिथि के आधार पर भाद्रपद अमावस्या दो सितंबर सोमवार को है। सोमवार को पड़ने के चलते यह सोमवती अमावस्या कही जाएगी। वहीं तीन सितंबर को भी उदय तिथि में अमावस्या है। इस पर भौमावती अमावस्या मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस साल सोमवती अमावस्या पर शिव योग और सिद्धि योग का विशेष संयोग बना रहा है। सनातन मान्यताओं में अमावस्या तिथि को स्नान-दान करना बेहद शुभ माना गया है। इसे भाद्रपद अमावस्या और पिठोरी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। सनातन मान्यताओं में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान-दान करना शुभ होता है। पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि दो सितंबर को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पड़ रही है।
अमावस्या का शुभ मुहूर्त
पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि दृक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर शिव योग और सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। दो सितंबर शाम छह बजकर 20 मिनट पर तक शिव योग का निर्माण होगा। वहीं, तीन सितंबर सुबह सात बजकर पांच मिनट पर सिद्धि योग रहेगा। ज्योतिर्विद के अनुसार, स्नान-दान की सोमवती अमावस्या दो सितंबर को होगा। इस दिन गंगा, यमुना सहित अन्य नदियों, तीर्थं सरोवरों में स्नान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। व्यक्ति से अनजाने हुए पाप से मुक्ति मिलती है। इस दिन पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितृ दोष शांत होते हैं।
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साढौरा। भाद्रपद अमावस्या सोमवार व मंगलवार दो दिन है। भाद्रपद अमावस्या एक दुर्लभ योग बना रही है। इस साल भाद्रपद अमावस्या दो दिन रहेगी। भाद्रपद अमावस्या तिथि दो सितंबर व तीन सितंबर दोनों दिन पड़ रही है। ऐसे में इस बार सोमवती अमावस्या और भौमवती अमावस्या दोनों का ही लाभ भक्तों को प्राप्त होगा।
गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र संचालक पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि भाद्रपद अमावस्या तिथि दो सितंबर को सुबह पांच बजकर 21 मिनट पर प्रारंभ होकर तीन सितंबर सुबह सात बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी। दो सितंबर को सूर्योदय सुबह छह बजे हो रहा है, ऐसे में उदयातिथि के आधार पर भाद्रपद अमावस्या दो सितंबर सोमवार को है। सोमवार को पड़ने के चलते यह सोमवती अमावस्या कही जाएगी। वहीं तीन सितंबर को भी उदय तिथि में अमावस्या है। इस पर भौमावती अमावस्या मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस साल सोमवती अमावस्या पर शिव योग और सिद्धि योग का विशेष संयोग बना रहा है। सनातन मान्यताओं में अमावस्या तिथि को स्नान-दान करना बेहद शुभ माना गया है। इसे भाद्रपद अमावस्या और पिठोरी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। सनातन मान्यताओं में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान-दान करना शुभ होता है। पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि दो सितंबर को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पड़ रही है।
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अमावस्या का शुभ मुहूर्त
पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि दृक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर शिव योग और सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। दो सितंबर शाम छह बजकर 20 मिनट पर तक शिव योग का निर्माण होगा। वहीं, तीन सितंबर सुबह सात बजकर पांच मिनट पर सिद्धि योग रहेगा। ज्योतिर्विद के अनुसार, स्नान-दान की सोमवती अमावस्या दो सितंबर को होगा। इस दिन गंगा, यमुना सहित अन्य नदियों, तीर्थं सरोवरों में स्नान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। व्यक्ति से अनजाने हुए पाप से मुक्ति मिलती है। इस दिन पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितृ दोष शांत होते हैं।
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